ताजा सर्वे में खुलासा, मोदी सरकार के आने के बाद भी नहीं कम हुई बेरोजगारी

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नई दिल्ली। भारत में विकास और रोजगार के तमाम दावों की हाल में आया सर्वे पोल खोलता है। सर्वे के मुताबिक भारत में बेरोजगारी पिछले पांच सालों के सबसे उच्च स्तर पर है।

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5 फीसदी बढ़ी बेरोजगारी

रोजगार-बेरोजगारी पर लेबर ब्यूरो द्वारा कराए गए सर्वे के मुताबिक पिछले पांच सालों में 15 वर्ष से अधिक समय तक नौकरी करने के लिहाज से भारत में 5 फीसदी बेरोजगारी बढ़ी है। भारत में एक तिहाई लोग सिर्फ एक साल का ही रोजगार पा रहे हैं।

68 फीसदी लोग 10 हजार रुपए प्रति माह की कमाई पर

68 फीसदी लोग 10 हजार रुपए प्रति माह की कमाई पर

सर्वे के मुताबिक 68 फीसदी लोग प्रति माह 10 हजार रुपए ही कमा रहे हैं। सर्वे के लिए देशभर में 7.8 लाख लोगों पर जिनमें 1.6 लाख परिवार शामिल है पर यह सर्वे 2015 में अप्रैल-दिसंबर माह में कराया गया था।

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थित नहीं सुधरी

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थित नहीं सुधरी

ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में लोगों को बेहतर सैलरी वाली नौकरी मिल रही है। 82 फीसदी लोग शहरी इलाकों में ही नौकरी पाते हैं। लेकिन सिर्फ 53 फीसदी ही ग्रामीण इलाके के लोग सुरक्षित नौकरी पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 42 फीसदी लोग 12 महीनों से भी कम समय के लिइए काम पाते हैं, जिसकी अहम वजह है कि वह मौसमी खेती पर निर्भर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 77 फीसदी ग्रामीण लोग महीने में 10 हजार रुपए ही कमा पाते हैं। लेकिन शहरी क्षेत्रों में आधे से ज्यादा लोग 10 से 50 हजार प्रति माह की सैलरी पर नौकरी करते हैं।

मोदी सरकार में भी नहीं मिल रही अपेक्षित नौकरी

मोदी सरकार में भी नहीं मिल रही अपेक्षित नौकरी

यह सभी तथ्य मोदी सरकार में पहली बार इतने बड़े स्तर पर कराए गए सर्वे में सामने आए हैं। ऐसे में इस सर्वे के दौरान केंद्र में सरकार को बदले एक साल हो चुके थे लेकिन नई नीतियों के बावजूद भी नौकरी पाने वालों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं।

क्या हैं पिछले सर्वे के आंकड़े

क्या हैं पिछले सर्वे के आंकड़े

2011 के जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो 5 फीसदी और 35 फीसदी बेरोजगारी का मतलब है भारत में 15 साल में 45 करोड़ श्रमिक थे। ऐसे में 5 फीसदी का मतलब है कि 2.3 करोड़ लोग, इनमें ऐसे लोग भी हैं जो नौकरी तो करते हैं लेकिन 12 महीने नहीं, जोकि छिपी हुई बेरोजगारी है। पिछले सर्वे के आंकड़ों की तुलना करें तो यह 2011 में 3.8 फीसदी, 4.9 फीसदी 2013 में था। लेकिन यह उस वक्त था जब भारतीय अर्थव्यवस्था गिरावट पर थी। लेकिन 2015-16 में अर्थव्यवस्था 7.3 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है, बावजूद इसके लोगों को नौकरी नहीं मिल रही है।

मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल

मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल

ऐसे में इन आकंड़ों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, डिजिल इंडिया जैसी मुहिम लोगों को नौकरी देने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी है।

47 फीसदी लोग खुद पर निर्भर

47 फीसदी लोग खुद पर निर्भर

आंकड़ों के मुताबिक 47 फीसदी लोग खुद के रोजगार पर निर्भर हैं और उनका खुद का बिजनेस है। इसमें मुख्य रूप से किसान, दुकानदार, छोटे व्यापारी शामिल हैं। लेकिन इसमें जो चौंकाने वाला आंकड़ा है वह यह कि 85 फीसदी लोग 10 हजार रुपए प्रति माह पर निर्भर हैं।

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English summary
Survey reveals that Joblessness has increased drastically in Modi government. Maximum people are dependant on 10 thousand rupees salary per month.
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