ट्रिपल तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने बताया मानवाधिकार का मुद्दा

Posted By:
Subscribe to Oneindia Hindi
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के मुद्दे को मानवाधिकार का मुद्दा करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में सिर्फ कानूनी पहलुओं पर फैसला करेगा। इससे जुड़े दूसरे मुद्दों जिनमें समान नागरिक संहिता के मामला अलग है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह एक आदेश पारित करेगा। तीन तलाक को लेकर जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 11 मई तक शुरु कर देगा। चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस एनवी रमणा और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले से जुड़े वकीलों से कहा कि वह साथ में बैठे और मुद्दे को आखिरी रूप दें।
supreme court

तीन तलाक के कानूनी पहलुओं पर फैसला करेगा सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा कि ये एक ऐसा मामला है, जिसमें मानवाधिकार का मुद्दा भी हो सकता है। ये मामला दूसरे मामलों पर भी असर डाल सकता है। हम इस मामले में कॉमन सिविल कोड पर बहस नहीं कर रहे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया कि कि वो मुस्लिम लॉ के तहत तीन तलाक का मुद्दा नहीं देखेगा। सर्वोच्च अदालत मामले में कानूनी पहलू पर ही फैसला देगा। बता दें कि कई महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर विरोध को लेकर आवाज उठाई है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक से जुड़े लोगों का मामला कोर्ट में लाने की इजाजत दी है लेकिन वही जो कथित तौर पर तीन तलाक के पीड़ित हैं।

इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा था कि लैंगिक समानता और महिलाओं के मान सम्मान के साथ समझौता नहीं हो सकता और भारत जैसे सेक्युलर देश में महिला को जो संवैधानिक अधिकार दिया गया है उससे वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफनामा दाखिल कर केंद्र की दलीलों का विरोध किया था। पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से कहा गया कि तीन तलाक के मूल अधिकार की कसौटी पर चुनौती नहीं दी जा सकती।

इसे भी पढ़ें:- तीन तलाक के बाद अब ईसाई समुदाय में तलाक पर चर्चा

देश-दुनिया की तबरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
SC says Triple talaq an issue of human rights, hearing begin May 11.
Please Wait while comments are loading...