सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केवल विवाहेत्तर संबंध, पत्नी के प्रति क्रूरता नहीं

Posted By:
Subscribe to Oneindia Hindi

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी शख्स के विवाहेत्तर संबंध हैं तो इसके आधार पर पत्नी के प्रति क्रूरता का मामला नहीं बनता है। इसके लिए अन्य बातें और परिस्थितियां जरूरी होती हैं।

court

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

एक मामले में सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने ये फैसला दिया है। इस मामले में एक व्यक्ति की पत्नी ने अपने पति के कथित विवाहेत्तर संबंधों के चलते आत्महत्या कर ली थी। जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा जहां आरोपी पति को बरी कर दिया गया।

ढाई लाख क्या, इस जोड़े ने महज 500 रुपए में निपटा दी शादी

सुप्रीम कोर्ट ने ये जरूर कहा कि विवाहेत्तर संबंध गैरकानूनी हो सकता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि ये एक पति का अपनी पत्नी के प्रति क्रूरता को दर्शाता हो। क्रूरता के लिए कई और दूसरी परिस्थितियां और आधार होने जरूरी हैं। जिसके आधार पर आपराधिक मामला बनता है।

जस्टिस दीपक मिश्रा और अमिताव रॉय की बेंच ने ये फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि पत्नी के आरोप और उनकी आत्महत्या के आधार पर पति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

अवैध संबंधों के शक में पत्नी ने कर ली थी आत्महत्या

बता दें कि महिला ने अपनी शादी के 7 साल बाद अपने पति पर अवैध संबंधों का आरोप लगा के आत्महत्या कर ली थी। महिला की आत्महत्या के बाद उसके भाई और मां ने भी खुद को मार डाला था।

अहमदाबाद: मां-बाप ने 13 साल की मासूम बच्ची को देह व्यापार में उतारा, 8 लोगों ने किया गैंगरेप

हालांकि कोर्ट ने इस मामले में सीधे तौर पर कहा कि मानसिक क्रूरता वो है जो व्यक्ति किसी खास परिस्थिति में महसूस करता है। विवाहेत्तर संबंध आईपीसी की सेक्शन 498-ए यानी पत्नी के प्रति क्रूरता को नहीं दर्शाता है।

कोर्ट ने आरोपी पति को किया बरी

कोर्ट ने कहा कि मानसिक प्रताड़ना में शारीरिक परेशानी ही नहीं होती है बल्कि असामान्य व्यवहार भी शामिल है। हालांकि ये सभी विशेष परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

बाजार में आए दो तरह के 500 के नोट, लोग हो रहे कन्फ्यूज

कोर्ट ने साफ शब्दों में बताया कि अगर किसी पत्नी को अपने पति के अवैध संबंधों का शक है तो इसके आधार पर ये नहीं माना जाएगा ये मानसिक क्रूरता है। इसके आधार पर फैसला नहीं सुनाया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि अगर महिला को शक है कि उसके पति के अवैध संबंध हैं तो वह अपने पति से तलाक ले सकती है। इसके अलावा कई और कदम हैं लेकिन इस आधार आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता है।

पति को ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने ठहराया था दोषी

बता दें कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट से आरोपी पति को दोषी ठहराया गया था और सजा भी हुई थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पति को दो साल की सजा सुनाई थी।

वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए चार साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया गया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी पति को बरी कर दिया है।

देश-दुनिया की तबरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
SC Extra marital affair does not necessitate conviction husband for cruelty wife.
Please Wait while comments are loading...