सुप्रीम कोर्ट ने महिला की याचिका पर 23 हफ्ते के भ्रूण को गिराने की इजाजत दी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल की एक महिला को 23 सप्ताह से ज्यादा के गर्भ को गिराने की इजाजत दे दी। महिला की कोख में पल रहा भ्रूण को दिल की गंभीर बीमारी है और डॉक्टरों ने रिपोर्ट दी कि इससे महिला की जान को भी खतरा हो सकता था, इसी आधार पर दंपत्ति ने कोर्ट से गर्भपात की अनुमति मांगी थी।

supreme court

गर्भवती महिला शर्मिष्ठा चक्रवर्ती और उसके पति की याचिका पर कोर्ट ने महिला और उसके गर्भ के स्वास्थ्य की जांच के लिए 7 डॉक्टरों के एक पैनल का गठन किया था, जिससे महिला के स्वास्थ्य को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट में डॉक्टरों के इस पैनल ने कहा कि गर्भावस्था जारी रखी गई तो मां को भी खतरा हो सकता है और बच्चे का जन्म हुआ भी तो दिल की बीमारियों की वजह से उसका जिंदा रहना मुश्किल है। रिपोर्ट देखने के बाद जस्टिस वाई वाई चंद्रचूड और जस्टिस एस के कौल की बेंच ने महिला को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी।

कोलकाता की इस गर्भवती महिला ने एमटीपी ऐक्ट 1971 के सेक्शन 3 की वैधता को कोर्ट में चुनौती दी थी। इस कानून के तहत 20 हफ्ते से ज्यादा वक्त होने के बाद गर्भपात कराना कानूनन गलत माना जाता है। महिला ने कोर्ट को बताया था कि 25 मई को जब उसे इस जन्मजात बीमारी के बारे में पता चला, तब तक गर्भ 20 हफ्ते से ज्यादा का हो गया था। उसने कोर्ट से कहा कि अगर गर्भपात की इजाजत नहीं दी गई तो उसकी मौत हो जाएगी। कोर्ट ने महिला के स्वास्थ्य सर्टिफिकेट और तमाम रिपोर्ट देखकर सोमवार को उसे गर्भपात की इजाजत दे दी।

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English summary
SC allows Kolkata woman to abort 23-week-old foetus
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