दवाइयों की कीमतों में हुई 44 फीसदी तक की कटौती, 50 से अधिक ड्रग हैं इसमें शामिल

मोदी सरकार ने 50 से भी अधिक दवाइयों की कीमतों में 5 प्रतिशत से लेकर 44 फीसदी तक की कटौती कर दी है। इसमें एचआईवी, डायबिटीज, बैक्टीरियल इंफेक्शन समेत बहुत ही जरूरी दवाइयां हैं।

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नई दिल्ली। सरकार ने कई दवाइयों की कीमतों पर कैप (सीमा) लगा दी है, जिसके चलते करीब 50 जरूरी दवाइयों की कीमतों में 5 प्रतिशत से लेकर 44 प्रतिशत तक की कमी आ गई है। इन 50 जरूरी दवाइयों में एचआईवी इंफेक्शन, डायबिटीज, चिंता विकार, बैक्टरियल इंफेक्शन, एंजिना और एसिड रिफ्लक्स भी मौजूद हैं। नेशनल ड्रग प्राइसिंग रेगुलेटर ने भी 29 दवाइयों की रिटेल कीमतें फिक्स कर दी हैं। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने अपने एक बयान में कहा है- एनपीपीपए ने शेड्यूल-1 की 55 दवाइयों की कीमतों को ड्रग्स प्राइस कंट्रोल अमेंडमेंट ऑर्डर 2016 के तहत और 29 दवाइयों की कीमतों को ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के तहत फिक्स कर दिया है।

दवाइयों की कीमतों में हुई 44 फीसदी तक की कटौती, 50 से अधिक ड्रग हैं इसमें शामिल
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जब दवाइयों की कीमतें घटाने के मुद्दे पर एनपीपीए के चेयरमैन भूपेन्द्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा- कीमतें 5 से लेकर 44 प्रतिशत तक कम की गई हैं। अगर औसत की बात करतें तो औसतन 25 फीसदी कटौती की गई है। जो दवाइयां प्राइस कंट्रोल के अंतर्गत नहीं आती हैं, उन्हें बनाने वालों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) सिर्फ 10 फीसदी तक बढ़ाने की छूट दी गई है। सरकार ने डीपीसीओ 2013 को कहा है कि 15 मई 2014 से 1995 के उस आदेश को बदला जा रहा है, जिसके तहत सिर्फ 74 बल्क ड्रग की कीमतें रेगुलेट होती हैं।
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एनपीपीए की स्थापना 1997 में की गई थी, जिसका काम फार्मा प्रोडक्ट कीमतें फिक्स करने और डीपीसीओ द्वारा बनाए गए नियमों को लागू करने का है। एनपीपीए कीमतों की मॉनिटरिंग का काम भी करता है। इनके अलावा प्राइस को कंट्रोल करने का काम भी एनपीपीए का ही है। प्राइस कंट्रोल के तहत न केवल कीमतें घटाई जाती हैं, बल्कि आवश्यकता अनुसार कीमतें बढ़ाई भी जाती हैं। सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम आम जनता को काफी राहत देने वाला कदम है।

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English summary
price of more than 50 drugs slashed up to 44 percent
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