तीन तलाक पर जेटली की राय, कहा-पर्सनल लॉ संविधान के दायरे में हो

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नई दिल्ली। मुस्लिम समुदाय में एक साथ तीन बार तलाक बोलने को लेकर चल रहे विवाद के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी बात रखी। जेटली ने तीन तलाक का समर्थन करते हुए फेसबुक पर लिखा है कि पर्सनल लॉ संविधान के दायरे में आने चाहिए। उन्होंने लिखा कि पर्सनल लॉ को भी मूल अधिकारों के अनुरूप होना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि तीन तलाक को समानता और सम्मान के साथ जीने के अधिकार के मानदंडों पर कसा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि तीन तलाक समान नागरिक संहिता से अलग है। उन्होंने कहा कि ऐसे नियमों को धर्म के महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग के रूप में नहीं देखा जा सकता है।

अपने फेसबुक पोस्ट में जेटली ने लिखा है कि बहस विधि आयोग के जारी रह सकती है, लेकिन जिस यह जानना महत्वपूर्ण है कि सभी धर्म और समुदायों के अपने पर्सनल लॉ हैं। ऐसे में क्या ये पर्सनल लॉ संविधान के तहत नहीं आने चाहिए?अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

लेकिन क्या प्रत्येक नागरिक के जीवन को प्रभावित करने वाले पर्सनल लॉ समानता के इन संवैधानिक मूल्यों और सम्मान के साथ जीने के अधिकार के अनुरूप नहीं होने चाहिए? जेटली ने एक के बाद एक कई सवाल उठाकर सरकार के कदम को सही बताने की कोशिश की है। वहीं तीन तलाक को उन्होंने अनुचित बताने की भरपूर प्रसाय किया है। आपको बता दें कि कानून मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में कहा है कि एक साथ तीन बार तलाक बोलने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए।

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English summary
Amid the ongoing debate over 'triple talaq', Finance Minister Arun Jaitley said the government is of the clear view that personal laws should be constitutionally .
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