नेताओं के हंगामे में जनता के 200 करोड़ स्वाहा, जानिए कैसे

संसद की कार्रवाई में रोजाना करोड़ों रुपए खर्च होते हैं और अगर ऐसे में संसद ठप होती है तो यह एक बड़ा नुकसान होता है।

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नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र 2016 पिछले 15 सालों में सबसे कम प्रोडक्टिव सत्र रहा है। इस सत्र में नोटबंदी के विरोध में इतना हंगामा हुआ कि कोई भी काम नहीं हो सका। शीतकालीन सत्र के दौरान कुल 8 बिल पेश किए गए, लेकिन महज दो को ही मंजूरी मिल सकी।

200 करोड़ का नुकसान

आपको बता दें कि किसी भी मुद्दे पर नेताओं के हंगामे से संसद का ठप होना एक बड़ा नुकसान होता है। दरअसल, संसद की कार्रवाई में रोजाना करोड़ों रुपए खर्च होते हैं और अगर ऐसे में संसद ठप होती है तो यह एक बड़ा नुकसान होता है। इस शीतकालीन सत्र में जनता के करीब 200 करोड़ रुपए स्वाहा हो गए हैं। आइए जानते हैं इसकी 5 खास बातें।

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1- हर मिनट खर्च होते हैं 2.5 लाख

संसद की 1 मिनट की कार्रवाई में 2.5 लाख रुपए खर्च होते हैं। इस तरह से महज 1 घंटे की संसद की कार्रवाई पर करीब 1.5 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। ऐसे में संसद की कार्रवाई में रोजना 9 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इस बात के शीतकालीन सत्र में 20 दिन तक संसद ठप होने की वजह से 180 करोड़ से भी अधिक का नुकसान हुआ है। इस तरह यह कहना गलत नहीं होगा कि नेताओं के हंगामे के चलते जनता के करीब 200 करोड़ रुपए स्वाहा हो गए हैं।

2- कितने सवालों के मिले जवाब?

इस पूरे शीतकालीन सत्र में 300 सूचीबद्ध सवालों में से राज्यसभा में सिर्फ 2 सवालों के मौखिक जवाब दिए गए। इससे पहले 2010 के शीतकालीन सत्र में 480 सवालों में से सिर्फ एक सवाल का जवाब दिया गया था और 2013 में 420 सवालों में से किसी का भी जवाब नहीं दिया जा सका था। वहीं दूसरी ओर, लोकसभा में भी सिर्फ 11 फीसदी सवालों के ही मौखिक जवाब दिए जा सके।

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3- कितने विधेयक हुए पारित?

शीतकालीन सत्र की शुरुआत में 19 बिलों को चर्चा करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन इनमें से कोई भी पारित नहीं हो सका। इसके अलावा 9 अन्य बिल शीतकालीन सत्र में लाए जाने के लिए सूचीबद्ध किए गए, जिनमें से सिर्फ तीन को लाया जा सका। इसमें से शीतकालीन सत्र के दौरान सिर्फ 2 बिल पारित हो सके। जो दो बिल पारित हुए वो टैक्सेशन लॉ (सेकेंड अमेंडमेंट) बिल, 2016 और राइट्स ऑफ पर्सन्स विथ डिसएबिलिटी बिल 2014 है। इन बिलों को चंद घंटों में ही पारित कर दिया गया।

4- कितना काम हुआ दोनों सदनों में?

इस साल शीतकालीन सत्र में लोकसभा में औसतन 92 फीसदी और राज्यसभा में 71 फीसदी काम हुआ है। लोकसभा में कुल 107 घंटे और राज्यसभा में कुल मिलाकर 101 घंटे तक कार्रवाई बाधित रही। कार्रवाई बाधित होने का कारण नोटबंदी है, जिसे लेकर विरोधी पार्टियां ससंद में हंगामा करती रहीं और कोई भी काम नहीं होने दिया।

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5- 15 सालों में सबसे कम काम

संसद के इतिहास को देखा जाए तो पिछले 15 सालों में 16वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र में सबसे कम काम हुआ है। लोकसभा में निर्धारित समय के सिर्फ 15 फीसदी समय में काम हो सका, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में निर्धारित समय के सिर्फ 18 फीसदी समय में काम हो सका। 16वीं लोकसभा में अभी तक की प्रोडक्टिविटी 92 फीसदी रही है, जबकि राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 71 फीसदी रही है।

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English summary
Parliament functioning in the Winter Session 2016
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