एक्सपर्ट ने बताया- अपराध के वक्त बच्चों के यौन शिकारी के मन में क्या चल रहा होता है?

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नई दिल्ली। बच्चों का यौन उत्पीड़न करने के आदी अपराधियों की मानसिक स्थिति को समझने वाले साइकोलॉजिस्ट को भी आम लोगों के बीच काफी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट रजत मित्रा ने हाल ही में दिल्ली में सीरियल रेपिस्ट की गिरफ्तारी के बाद इसे लेकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि अपने अनुभवों और तमाम केसों की स्टडी के बाद उन्होंने ऐसे अपराधियों की मानसिक स्थिति को समझा है और यह भी जाना है कि अपराध करते समय उनके दिमाग में क्या चल रहा होता है? क्या वे इसे गलत मानते हैं या फिर अपने किए पर उन्हें किसी तरह का पछतावा होता? बच्चों कौ यौन उत्पीड़न करने वाले अपराधियों के दिलो-दिमाग में कौन सी बात चल रही होती है यह लोगों के बीच चर्चा का विषय है। हिंदुस्तान टाइम्स से रजत मित्रा ने अपने अनुभव साझा किए हैं।

ऐसे पता चला कौन है अपराधी...

ऐसे पता चला कौन है अपराधी...

रजत मित्रा के मुताबिक, वह एक मामले की जांच कर रहे थे जिसमें एक शख्स घर में घुसता है और मां-बाप के बीच में सो रहे पांच साल के बच्चे को उठा लेता है। वह घर से बाहर आता है लेकिन पुलिस जीप की लाइट उस पर पड़ती है तो भागने लगता है। मामले की जांच शुरू होती है तो एरिया के अस्पताल और स्कूलों में पता लगाया जाता है। आखिरकार एक स्कूल से अटेंडेंट गायब मिला। जब उससे पूछताछ की गई तो आखिरकार उसने सच बता दिया। स्कूल की प्रिंसिपल ने पहले तो इस बात से साफ इनकार कर दिया कि उनके स्कूल का स्टाफ ऐसी कोई हरकत कर भी सकता है। उन्होंने कहा, 'जब भी कोई बच्चा बीमार होता है या उसे वॉशरूम जाना होता है तो मैंने हमेशा इसी अटेंडेंट पर भरोसा किया।' मित्रा ने कहा कि अपराधी बड़े ही शातिर अंदाज में अपनी करतूत को छिपा लेते हैं। READ ALSO: अपने सामने लड़कियों से कपड़े बदलवाता था सीरियल रेपिस्ट

बच्चों की तस्वीरों के पास लिखी थी मन की बात

बच्चों की तस्वीरों के पास लिखी थी मन की बात

उन्होंने बताया कि एक बार एक बच्चे ने एक शख्स के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की। उस शख्स ने खुद को बेकसूर बताते हुए बच्चे और उसके परिजनों पर ही आरोप लगा दिए। पुलिस ने जांच शुरू की लेकिन कोई सबूत नहीं मिला और उस शख्स को छोड़ दिया गया। मित्रा ने कहा, 'मैंने उस केस की जांच शुरू की। पुलिस टीम ने उसके घर की तलाशी ली थी लेकिन कुछ नहीं मिला। मैंने उनकी अनुमति से घर की तलाशी ली। मुझे एक कोने में कई मैगजीन रखी मिलीं। मैंने उनके पन्ने पलटने शुरू किए तो इंस्पेक्टर ने बताया कि उन्होंने पूरी छानबीन की है लेकिन मैगजीन पोर्नोग्राफिक नहीं हैं। लेकिन मेरी आंखें मैगजीन में बच्चों की तस्वीरों पर अटक गईं जिनके बगल में तमिल में कुछ लिखा था। तमिल उस शख्स की मातृभाषा थी। मैंने एक्सपर्ट को बुलाया और उससे उन शब्दों का मतलब पूछा तो सब हैरान थे। वह शख्स उन बच्चों के साथ सेक्स करना चाहता था, और यही उन तस्वीरों के पास लिखा था।' उस शख्स को जब गिरफ्तार कर लिया गया तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। READ ALSO: 12 साल में 500 से ज्यादा लड़कियों का उत्पीड़न करने वाले टेलर का कबूलनामा

'अपराधी इसे समझते हैं जरूरी काम'

'अपराधी इसे समझते हैं जरूरी काम'

रजत मित्रा ने कहा कि बच्चों का शरीर भी वयस्कों की तरह होता है। बस एक चीज की कमी होती है वह है सेक्स की फीलिंग। अपराधियों को लगता है कि यह उनका जरूरी काम है कि बच्चों को इसके बारे में बताया जाए और इसीलिए वे अपने काम को कभी गलत नहीं समझते। उन्होंने कहा, 'एक सवाल और भी सामने आता है कि क्या पुरुष या रेपिस्ट महिलाओं की गैरमौजूदगी में बच्चों का उत्पीड़न करते हैं? इसका जवाब सटीक नहीं है। लेकिन एक बार एक दलाल ने बातचीत के दौरान मुझे बताया था कि जब कोठा या वेश्यालय में सारी लड़कियां व्यस्त होती हैं तो वे ग्राहकों से पूछते हैं 'बच्चा चलेगा क्या' और ज्यादातर ग्राहक इसके लिए राजी भी हो जाते हैं।' उन्होंने कहा कि बच्चों से यौन उत्पीड़न करने वालों में साधु, पादरी, अनाथालयों के संचालक तक पकड़े जा चुके हैं। ये ऐसे पेशे हैं जहां ये लोग आसानी से अपनी करतूतों को छुपा सकते हैं। READ ALSO: लड़कियों को बिना कपड़ों के नहाने को मजबूर करता था टीचर

क्या काउंसलिंग या थेरेपी से हो सकता है बदलाव?

क्या काउंसलिंग या थेरेपी से हो सकता है बदलाव?

काउंसलिंग या थेरेपी से ऐसे अपराधियों में बदलाव की संभावनाओं को रजत मित्रा सिरे से नकार देते हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे अपराधियों दिमाग में यह बात बैठी होती है कि बच्चों से शारीरिक संबंध बनाकर ही वह बेहतर फील कर सकते हैं। उन्हें आम जिंदगी के बाकी सुख अच्छे नहीं लगते।' उन्होंने कहा कि इंटरनेट और तकनीक की वजह से ऐसे अपराधी ज्यादा शातिर हो गए हैं। अगर अभी हम अपने बच्चों को यह नहीं बताएंगे कि वे कैसे अपना बचाव करें तो उनका बचपन खराब हो जाएगा। अपने बच्चों को अपराधियों से बचाने के लिए परिजनों को भी अलर्ट रहना चाहिए और बच्चों को सही जानकारियां देनी चाहिए।

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English summary
Paedophiles feel their act as rightful task never feel remorse says expert Rajat Mitra.
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