कोई नहीं मिटा सकता आवारा कुत्तों का नामोनिशान, उन्‍हें भी जीने का हक: सुप्रीम कोर्ट

आवारा कुत्तों को मारने के लिए मुंबई और केरल सहित कई राज्यों में चल रही मुहिम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।

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नई दिल्‍ली। आवारा कुत्तों का देश से नामोनिशान मिटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को भी जिंदा रहने का हक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आबादी घटाने के लिए संतुलित और उपयुक्‍त तरीके से सिर्फ कुछ कुत्‍तों को मारा जा सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने की। आपको बता दें कि एक याचिकाकर्ता ने कहा कि वह चाहता है कि पूरे देश में ऐसे कुत्तों का पूरी तरह सफाया कर दिया जाये।

कोई नहीं मिटा सकता आवारा कुत्तों का नामोनिशान, उन्‍हें भी जीने का हक: सुप्रीम कोर्ट

आपको बता दें कि आवारा कुत्तों को मारने के लिए मुंबई और केरल सहित कई राज्यों में चल रही मुहिम के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि केरल में यह मानवीय चिंता का विषय था परंतु इसके लिए सभी कुत्तों का नहीं मारा जा सकता। पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो सकती है। यह एक हादसा है और इसके लिए हम सभी आवारा कुत्तों को मारने के लिए नहीं कह सकते हैं।

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English summary
“Stray dogs have a right to live,” was how the Supreme Court reacted sharply on Tuesday when a submission was made that such canines should be completely destroyed across the country.
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