पीएम नरेंद्र मोदी की नोटबंदी का एक महीना: क्या खोया और क्या पाया

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दिल्ली। 8 नवंबर की शाम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने इसे काला धन और आतंकवाद के खिलाफ बड़ा कदम बताते हुए लोगों से नोटबंदी की वजह से होने वाले कष्ट को झेलने की अपील की।

नोटबंदी के बाद एटीएम और बैंकों में लंबी लाइनें लगने लगीं। मुश्किल झेल रहे लोगों में से कइयों के मरने की खबरें आईं। एटीएम और बैंकों में नए नोटों की कमी से लोगों के पास कैश का संकट हो गया।

ग्रामीण इलाकों में, जहां एटीएम तक लोगों की पहुंच आसान नहीं है, वहां नोटबंदी का विरोध हो रहा है। कई लोग नोटबंदी के समर्थन में खड़े हैं और कहते हैं कि समस्या अभी है लेकिन इससे देश को फायदा है।

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सरकार के दावे और जमीनी हकीकत की एक पड़ताल

सरकार के दावे और जमीनी हकीकत की एक पड़ताल

नोटबंदी के बाद एक तरफ सरकार इसके फायदे गिनाती रही तो दूसरी तरफ विपक्ष, लोगों की मौत के मुद्दे पर हंगामा खड़ा करता रहा। सरकार और विपक्ष के बीच नोटबंदी पर नोंक-झोंक का सिलसिला जारी है।

अभी नोटबंदी को एक महीना ही बीता है। वैसे तो सरकार ने 50 दिन तक देश में नोटबंदी की वजह से समस्या रहने की बात कही थी। लेकिन आइए जानते हैं कि सरकार के दावों में कितनी सच्चाई है? क्या सच में नोटबंदी की वजह से काले धन और आतंकवाद पर रोक लगी है? एक महीने के दौरान देश ने क्या खोया और क्या पाया?

कितने नए नोट जारी हुए, कितने का हुआ नुकसान

कितने नए नोट जारी हुए, कितने का हुआ नुकसान

नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से 5 दिसंबर के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 19.1 अरब रुपए के नए नोट जारी किए हैं। लेकिन नोटबंदी से देश को करोड़ों रुपए के नुकसान होने के अनुमान लगाए गए हैं।

सेंटर फॉर मॉनिटिरिंग इंडियन इकनॉमी के आंकड़ों के अनुसार, डिमोनेटाइजेशन के अगले 50 दिनों में देश की अर्थव्यवस्था को 1 लाख 28 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

एक तरफ आरबीआई गिना रही फायदे, दूसरी तरफ मौतों के आंकड़े

एक तरफ आरबीआई गिना रही फायदे, दूसरी तरफ मौतों के आंकड़े

सरकार और आरबीआई एक तरफ नोटबंदी के बाद नोटों से जुड़े आंकड़ों को बताने में लगी है तो दूसरी तरफ विपक्ष आम लोगों की हुई मौतों को गिना रहा है।

आरबीआई के अनुसार, 7 दिसंबर तक यानि पिछले 30 दिनों में 500 और 1000 के कुल 11.55 लाख करोड़ रुपए बैंकों में वापस आ चुके हैं। वहीं विपक्ष चीख-चीख कर कह रहा है कि नोटबंदी की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की जानें चली गईं।

नई करेंसी उतारने के दावे लेकिन देश में कैश की भारी किल्लत

नई करेंसी उतारने के दावे लेकिन देश में कैश की भारी किल्लत

नोटबंदी के बाद देश में कैश का भारी संकट है। इससे निपटने के लिए आरबीआई ज्यादा से ज्यादा कैश एटीएम और बैंकों के जरिए लोगों तक पहुंचाने में लगी है। आरबीआई ने कहा है कि नोटबंदी के बाद से 4 लाख करोड़ रुपए की नई करेंसी बाजार में उतारी जा चुकी है।

लेकिन देश में कैश का संकट अभी भी बरकरार है। लोग बाजार से जरूरत के सामान खरीद नहीं पा रहे हैं क्योंकि बैंकों और एटीएम से उनको पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। पोस्ट ऑफिस को तो बहुत कम कैश मिल रहा है जिससे ग्रामीण इलाकों की समस्या ज्यादा गंभीर है।

एटीएम में कैश पर सरकार के दावे की जमीनी हकीकत

एटीएम में कैश पर सरकार के दावे की जमीनी हकीकत

एटीएम के जरिए जनता तक नई करेंसी पहुंचाने के सरकार के दावे की जमीनी हकीकत रुला देनेवाली है। लोग घंटों एटीएम की लाइन में लगते हैं और कई लोगों का नंबर आने से पहले ही एटीएम में पैसा खत्म हो जाता है। और तो और पैसा खत्म होने के बाद एटीएम में फिर कब आएगा, यह भी तय नहीं होता।

सरकार का दावा है कि देश के करीब 95 प्रतिशत एटीएम काम कर रहे हैं और नई करेंसी उगल रहे हैं। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर एटीएम में कैश नहीं होते। अगर कैश डाले भी जाते हैं तो एटीएम तुरंत खाली हो जाता है। इसका मतलब, एटीएम में कम पैसे डाले जाते हैं।

बैंकों के ब्याज दर दावे के मुताबिक कम नहीं हो पाए

बैंकों के ब्याज दर दावे के मुताबिक कम नहीं हो पाए

नोटबंदी के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने यह दावा किया था कि इससे तमाम बैंकों के ब्याज दर में कमी आएगी जिससे ईएमआई कम होगी। लेकिन 7 दिसंबर को आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्याज दर कम होने के दावे पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों के रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

क्या भ्रष्टाचार, आतंकवाद और काले धन पर लगी रोक?

क्या भ्रष्टाचार, आतंकवाद और काले धन पर लगी रोक?

नोटबंदी के बारे में सबसे बड़ा दावा मोदी सरकार ने यह किया था कि इससे भ्रष्टाचार, आतंकवाद और काले धन पर रोक लगेगी। सरकार के इस दावे की पोल तब खुल गई जब जम्मू कश्मीर में मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के पास से 2000 रुपए के नए नोट मिले।

नोटबंदी के बाद बैंक कर्मचारियों से मिलीभगत करके पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने के गोरखधंधे का भी कई जगहों पर पर्दाफाश हुआ है। लोग काले धन को सफेद बनाने के लिए कई तरीके अपना रहे हैं। अपने रिश्तेदारों के खाते में या जनधन अकाउंट्स में काले धन को खपाया जा रहा है। कई बिजनेसमेन ने अपने कर्मचारियों के खाते में काले धन वाले लाखों रुपए डाल दिए हैं।

देश में भारी मात्रा में 2000 के नए नोटों की जब्ती

देश में भारी मात्रा में 2000 के नए नोटों की जब्ती

मोदी सरकार ने दावा किया है कि नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 2000 करोड़ रुपए के काले धन और 130 करोड़ रुपए की नकदी व ज्वैलरी को जब्त किया है। वहीं भारी मात्रा में नए नोटों की बरामदगी होने के चौंकाने वाले मामले सामने आए।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब अधिकतम कैश निकालने की एक सीमा तय की गई है तो फिर भारी मात्रा में नए नोटों को हासिल करने में कुछ लोग कैसे कामयाब हुए?

नोटबंदी का किसानों पर पड़ा बहुत बुरा असर

नोटबंदी का किसानों पर पड़ा बहुत बुरा असर

नोटबंदी के बाद किसान बहुत ज्यादा परेशान हुए क्योंकि खाद, यूरिया और अन्य जरूरतों के लिए उनके पास कैश नहीं थे। एक तरफ नए फसल पर बुरा असर हुआ तो दूसरी तरफ जो फसल या सब्जियां बाजार में उतरीं, उसके खरीदार कम हो गए क्योंकि कैश की किल्लत से हर कोई जूझ रहा है।

आलू और टमाटर की नई खेप बाजार में आई है और उसके कम बिकने की वजह से किसान के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है जबकि सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़े-बड़े वादे किए थे।

नोटबंदी के बाद गरीब मजदूरों पर आया संकट

नोटबंदी के बाद गरीब मजदूरों पर आया संकट

मोदी सरकार ने दावा किया कि नोटबंदी के बाद कैशलेस पेमेंट के तहत चेक या डिजिटल से भुगतान होने पर गरीब मजदूरों को वह न्यूनतम राशि मिलेगी जिसे सरकार ने तय किया है।

लेकिन यह दावा तब खोखला साबित हुआ जब नोटबंदी की वजह से सरकार के नरेगा जैसी योजनाओं में मजदूरों को किया जाने वाला भुगतान अटक गया। कई राज्यों ने मजदूरों को भुगतान नहीं कर पाने की जानकारी केंद्र सरकार को दी।

ब्लैक मनी जमा करने वालों ने अपनाए नए तरीके

ब्लैक मनी जमा करने वालों ने अपनाए नए तरीके

नरेंद्र मोदी सरकार ने दावा किया था कि नोटबंदी से बड़ी मात्रा में कैश जमाकर रखनेवाले लोगों पर सीधा असर पड़ेगा। उनका सारा नोट बेकार हो जाएगा।

लेकिन ऐसे लोगों ने कैश के रूप में रखे गए काले धन को सफेद करने के लिए जनधन खातों को मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया बना लिया। 30 नवंबर तक जनधन खातों में करीब 1118 करोड़ रुपए जमा हुए।

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English summary
PM Narendra Modi announced demonetisation move of govt on 8 December. After one month, the loss and gains of demonetisation is discussed in this special story.
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