बचपन में अनाथ हुए कालिखो पुल का गार्ड से सीएम बनने तक का सफर

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ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के दिवंगत भूतपूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल की जिंदगी संघर्षों से भरी एक दर्दनाक कहानी है जिसका अंत भी उतना ही दुखदायी रहा। कम उम्र में अनाथ होने के बाद उनको बहुत सालों तक पैसों की भारी तंगी झेलनी पड़ी।

ऐसे बुरे हालात में भी उन्होंने पढ़ने के लिए और आगे बढ़ने के लिए हर तरह का संघर्ष किया। पान बीड़ी बेचने से लेकर बढ़ई और चौकीदारी तक की और अरुणाचल प्रदेश के सीएम की कुर्सी तक पहुंचे।

kalikho pul

वह फरवरी से जुलाई तक अरुणाचल के सीएम रहे और हाल के दिनों में राज्य में राजनीतिक हंगामों के केंद्र में थे। कालिखो पुल अपने कुछ समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस के अंदर बागी हो गए थे। कालिखो पुल मंगलवार की सुबह अपने आवास में मृत पाए गए।

हाल में ही जुलाई में उनको सुप्रीम कोर्ट के एक सांविधानिक बेंच के आदेश के बाद कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। शुरुआती रिपोर्टों में यह कहा जा रहा है कि 47 साल के कालिखो पुल ने खुदकुशी की है।

अरुणाचल के आठवें मुख्यमंत्री बने थे कालिखो पुल

कालिखो पुल को इसी साल अरुणाचल प्रदेश के आठवें मुख्यमंत्री के तौर शपथ दिलाई गई थी। कालिखो पुल अपनी जिंदगी में बढ़ई और गार्ड का काम कर चुके थे।

पान-बीड़ी बेचने से लेकर चौकीदारी तक का काम

रातों में चलने वाले स्कूल में पढ़ने के लिए कालिखो पुल ने पान और बीड़ी बेचे थे। जब वह छह साल के थे तब उनके पिता की मौत हो गई और तेरह साल की उम्र में उनकी माता दुनिया से चली गईं और कालिखो अनाथ हो गए।

इसके बाद कालिखो की जिंदगी में आर्थिक संघर्षों का एक लंबा दौर चला। पैसों की कमी झेलते हुए कालिखो अपनी चाची के पास रहा करते थे।

1995 में मिला कांग्रेस का टिकट

कॉलेज में तीन साल तक कालिखो पुल छात्र संगठन के जेनरल सेक्रेटरी रहे। 1995 में उनको कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला।

'मैं लोहित नदी में कूदना चाहता था'

एक इंटरव्यू में कालिखो ने अपनी जिंदगी के बारे में बताया था कि जब वह आठवीं क्लास में थे तो एक बार उनकी तबियत बहुत खराब हो गई और उनको असम मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाने के लिए डिब्रूगढ़ जाना था। लेकिन उनके पास सिर्फ 1600 रुपए थे। उन्होंने पैसे के लिए रिश्तेदारों और लोगों के सामने हाथ फैलाया लेकिन उनकी चाची ने उनको सिर्फ दो रुपए और भतीजी ने पांच रुपए दिए।

उन्होंने कहा था, 'इस हालात में मैं लोहित नदी में कूद जाना चाहता था लेकिन जितनी बार भी कोशिश की, किसी न किसी ने आकर रोक लिया।'

 

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English summary
Late former Chief Minister of Arunachal Pradesh had lived a very painful life that was full of struggle from the begining.
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