चीन विवाद पर पीएम मोदी की चाणक्य नीति होगी कारगर साबित!

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नई दिल्ली। भारत सरकार ने चीन से डोकलाम में चल रहे मौजूदा विवाद के बारे में विपक्षी पार्टियों को जानकारी दी है, जिसका कई दिनों से इंतजार किया जा रहा था। रक्षामंत्री, गृहमंत्री, विदेश मंत्री एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित विदेश सचिव जैसे उच्च अधिकारियो ने दो दिन लगातार तमाम राजनीतिक पार्टियों को मौजूदा जमीनी हालात और आगे की रणनीति की जानकारी दी है।

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देश के भीतर भरोसा मजबूत करने की कवायद

देश के भीतर भरोसा मजबूत करने की कवायद

यह इस मुद्दे पर भारत के गंभीर नजरिए को दर्शाता है और साथ ही साथ चीन को यह संकेत भी देता है कि चीनी सरकार और वहां के मीडिया के तीखे तेवरों का मुकाबला करने के लिए भारत तैयार है। सरकार ने डोकलाम विवाद से जुड़े हुए तथ्यों के अलावा, विपक्ष को दी गई इस ब्रीफिंग में मुख्य तीन बातें रखी हैं। पहली बात ये की यह विवाद भारत, चीन और भूटान के ट्राई-जंक्शन पर हो रहा है जो जमीन भूटान की है। दूसरी बात ये की भारत अपनी भूटान को दी गई प्रतिबद्धता के कारण इस विवाद में शामिल हुआ है। दरअसल भारत ने २००७ में भूटान से एक समझौते के मुताबिक उसकी सुरक्षा करने का वादा किया था। तीसरी बात यह की भारत अपने राजनयिकों के जरिए चीन से बातचीत करके कोई हल निकालने की कोशिशों में लगा हुआ है।

भारत की उच्चस्तरीय रणनीति

भारत की उच्चस्तरीय रणनीति

चीन ने अभी तक बातचीत के रास्ते से किनारा किया हुआ है। उसका ये कहना है कि जब तक भारत अपने सुरक्षा बलों को डोकलाम से हटा नहीं लेता है तब तक चीन बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा। परंतु भारत ने समझदारी का एक नमूना पेश करते हुए एक तरफ जहां चीन से बातचीत करने के रास्ते खोज रहा है और दूसरी तरफ डोकलाम से अपने सुरक्षा बलों को वापस भी नहीं बुला रहा है।

ब्रिक समिट होगी काफी अहम

ब्रिक समिट होगी काफी अहम

ये रणनीति कारगर साबित हो सकती है क्योंकि सितंबर में चीन के जियामेन शहर में होने वाली ब्रिक्स समिट की तैयारियों के चलते दोनों देशों के राजनयिक कई बार आपस में मिलने वाले हैं। जिसमे से एक मुलाकात भारत के राष्ट्रीय सलाहकार अजित डोवाल और चीन के रक्षा अधिकारियो के बीच भी होने वाली है।

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 टीवी पर होने वाली बहस पर जताई चिंता

टीवी पर होने वाली बहस पर जताई चिंता

कुछ दिनों पहले भारत सरकार ने रक्षा विशेषज्ञों और टीवी डिबेट्स में हिस्सा लेने वाले कुछ पैनेलिस्ट्स को भी एक ऐसी ही ब्रीफिंग दी थी। जिसमें उनको विषय की गंभीरता बताते हुए सलाह दी गई थी की रक्षा संबंधी विषयों पर टीवी डिबेट्स से निकलने वाली नफरत भारत के हितों के खिलाफ साबित होगी जिसको रोकना अत्यंत आवश्यक होना चाहिए।

 भारत-चीन के रिश्तों की डोर बहुत कच्ची

भारत-चीन के रिश्तों की डोर बहुत कच्ची

भारत को इस विवाद को सुलझाने के लिए सिर्फ यहीं नहीं रुकना चाहिए, चीन के लगातार तीखे रवैए ने ये दर्शाया है कि अभी हाल ही में अस्तन में भारत और चीन के बीच बनी आम सहमति कितनी कमज़ोर है, जिसमे दोनों देशों के बीच के विवादों को न बढ़ने देने की कसम खाई गई थी।

भूटान के साथ संबंधों को करना होगा बेहतर

भूटान के साथ संबंधों को करना होगा बेहतर

बहरहाल इन सब चर्चाओं के बीच भारत को ये नहीं भूलना चाहिए की ये विवाद भूटान की जमीन पर हो रहा है और भारत इसमें सिर्फ़ भूटान के कहने पर शामिल हुआ है। इस मसले पर चीन के मंसूबों को भी समझने की ज़रुरत है, जो भारत और भूटान के रिश्तों में दरार पैदा करना चाह रहा है। इसलिए इस मसले को सिर्फ भारत बनाम चीन न समझ के अपने हर फैसले में भारत को भूटान के हितों का भी बराबर ध्यान रखना पड़ेगा।

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English summary
Know How Narendra Modi government is tackling the Doklam issue with China with super strategy.
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