भारत ने रेटिंग अपग्रेड करने के लिए मूडीज से की थी सिफारिश, एक नहीं सुनी एजेंसी ने

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नई दिल्ली। भारत ने मूडीज के रेटिंग करने के तरीकों की आलोचना की थी और भारत की रेटिंग को अपग्रेड करने के लिए कहा था। इस बात का खुलासा न्यूज एजेंसी रायटर्स ने कुछ दस्तावेजों के आधार पर किया है। भारत द्वारा रेटिंग अपग्रेड किए जाने को कहने के बावजूद अमेरिका की इस रेटिंग एजेंसी ने भारत के कर्ज के स्तर और कमजोर बैंकों पर अपनी रेटिंग नहीं बदली। भारत को कर्ज के मामले में अच्छी क्रेडिट रेटिंग मिलने से और अधिक निवेश आकर्षित करने में काफी मदद मिलती। 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही पीएम मोदी लगातार निवेश को बढ़ाने, महंगाई को कम करने और साथ ही फिस्कल और करंट अकाउंट डेफिसिट को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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भारत के वित्त मंत्रालय और मूडीज के बीच हुई बातचीत के आधार पर दिल्ली रेटिंग एजेंसी की चिंताओं को शांत करने में असमर्थ रहा, जिसमें 136 अरब डॉलर के बैड लोन की बात कही गई थी। अक्टूबर में वित्त मंत्रालय द्वारा मूडीज को लिखे पत्र और ईमेल दिखाते हैं कि वित्त मंत्रालय ने मूडीज की रेटिंग देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। हालांकि, मूडीज ने सभी बातों को खारिज करते हुए कहा कि भारत की कर्ज (डेट) की स्थिति इतनी नहीं है, जितना सरकार इसे दिखा रही है और इसके लिए बैंक सबसे बड़ा कारण हैं।

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जब इस बारे में रायटर्स ने रेटिंग एजेंसी से बात करनी चाही तो मूडीज और एक एनालिस्ट मैरी डिरोन ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि रेटिंग देने की प्रक्रिया कॉन्फिडेंशियल है। वहीं दूसरी ओर भारत के वित्त मंत्रालय ने भी इस पर कमेंट करने से मना कर दिया। वित्त मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी अरविंद मरियम ने कहा कि सरकार का तरीका पूरी तरह से गलत था। उन्होंने रायटर्स से कहा कि किसी भी रेटिंग एजेंसी पर किसी तरह का दवाब नहीं डाला जा सकता है, यह ठीक नहीं है।

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English summary
know how india lobbied to moodys for upgrading the rating, but fails
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