जयललिता और उनकी खास कुर्सी का एक खास राज

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नई दिल्‍ली। जयललिता ने जब इस वर्ष मई 2016 में विधानसभा चुनावों में फिर से एक बड़ी जीत हासिल की, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए दिल्‍ली आई थीं। यह उनकी दिल्‍ली का आखिरी दौरा था। जब जया दिल्‍ली आई थीं उनके साथ पूरा लाव लश्‍कर भी दिल्‍ली आया। इन सबके बीच एक स्‍पेशल कुर्सी भी उनके लिए आई थी।

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अम्‍मा की कुर्सी पर सबकी नजरें

जया चुनावों में जीत मिलने के बाद पीएम मोदी पहली बार मिली थीं। यहां पर उन्‍होंने अपनी मांगों का जुड़ा एक मेमोरेंडम पीएम मोदी को सौंपा था। इसी दौरान जया की कुर्सी पर सबकी नजरें गई थीं। यह कोई साधारण कुर्सी नहीं थी और इस कुर्सी का मुख्‍यमंत्री के दिल में एक खास स्‍थान था।

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डॉक्‍टरी सलाह या फिर अंधविश्‍वास

जया जहां कहीं भी जाती थीं अपनी कुर्सी को साथ लेकर जाती थीं। वह इस कुर्सी के अलावा और किसी भी कुर्सी पर नहीं बैठती थी।

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कहते हैं कि उन्‍हें डॉक्‍टरों ने एक बीमारी की वजह से सलाह दी थी कि वह सागौन की लकड़ी से बनी कुर्सी पर ही बैठें।

वहीं कुछ लोग यह कहने से भी नहीं चुकते हैं कि जया अपनी कुर्सी को लेकर काफी अंधविश्‍वासी थीं और इसलिए ही वह सिर्फ इस पर ही बैठती थीं। जया की यह खास कुर्सी राजधानी दिल्‍ली के तमिलनाडु भवन में रखी हुई है।

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English summary
Whenever Jayalalithaa travelled to Delhi, she brought one special chair all the way from Chennai to Delhi.
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