कश्‍मीर में शांति के लिए मोदी सरकार के 'गुप्‍त' प्रयास

पिछले एक हफ्ते से मोदी सरकार कर रही है कश्‍मीर में शांति और सामान्‍य स्थिति को बहाल करने की कोशिशें।

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श्रीनगर। नौ जुलाई से हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से घाटी में जो अशांति के हालात हैं, अब सरकार उसे सामान्‍य करने के प्रयासों में जुट गई है। सूत्रों की मानें तो घाटी में अलगाववादी नेताओं समेत सभी लोगों से बातचीत जारी है। 

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एक हफ्ते में हुआ है बहुत कुछ

सभी राजनीतिक पार्टियां मानती हैं कि अब जम्‍मू कश्‍मीर में शांति के लिए एक ठोस हल निकलना ही चाहिए।

पिछले एक हफ्ते से सरकार और घाटी के स्‍टेकहोल्‍डर्स के बीच कई तरह के प्रयास हुए हैं जिनमें इस संकट को हल करने से जुड़े कई तरह के प्रस्‍ताव हैं।

घाटी में शांति के लिए जिस कदम को तुरंत उठाने पर चर्चा हुई उसमें आम-जनजीवन को पटरी पर लाना सबसे अहम है। एक वरिष्‍ठ अधिकारी की ओर से इस बारे में जानकारी दी गई है।

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सामान्‍य स्थिति सबसे जरूरी

इस अधिकारी के मुताबिक सुरक्षा बलों को बाहर से मिलने वाली चुनौतियों और खतरों से भी निबटना है। सुरक्षा बल एक साथ घरेलू और बाहरी खतरों पर नजर नहीं रख सकते हैं। ऐसे में यह काफी जरूरी है कि घाटी में सामान्‍य स्थिति को वापस लाया जाए।

आपको बता दें कि पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्‍हा ने अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की है। इस मुलाकात में सबसे खास है हुर्रियत कांफ्रेस के नेता सैयद अली शाह गिलानी से हुई उनकी मुलाकात।

गिलानी ने इस मुलाकात में सिन्‍हा से जो दो शर्तें रखी हैं उसमें 6,000 लोगों की रिहाई और 450 लोगों पर पबिलक सेफ्टी एक्‍ट को हटाना है।

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अलगाववादियों का नया कैलेंडर

हालांकि सिन्‍हा से मुलाकात के बाद भी अलगाववादी नेताओं ने विरोध प्रदर्शनों का एक नया कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर में 18 अक्‍टूबर और नवंबर में विरोध प्रदर्शनों की मांग की गई है।

इस कैलेंडर की खास बात है कि इसमें अलगाववादी नेताओं ने किसी भी तरह से पाकिस्‍तान के लिए प्रार्थना करने और पाक के समर्थन में नारे लगाने की बात नहीं कही है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि निश्चित तौर पर यह एक बदलाव का संकेत है।

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English summary
There appears to be a resolution in sight where the Kashmir issue is concerned.
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