केजरीवाल के ट्वीट से उठे उनकी अवसरवादी राजनीति पर सवाल

Written by: ब्रजेश मिश्र
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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की मोदी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। दिल्ली में काम न करने देने से लेकर 'सैनिकों के हितों' के मुद्दे पर भी केजरीवाल ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया। लेकिन गुरुवार को उनके एक ट्वीट ने उनकी राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वे अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं?

Arvind Kejriwal

वन रैंक वन पेंशन (OROP) से जुड़ी मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या के बाद केजरीवाल ने मोदी सरकार को सैनिकों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार सैनिकों को नजरअंदाज कर रही है और उनको मिलने वाली सुविधाओं में कटौती कर रही है। दिल्ली के सीएम ने यह भी कहा कि इस घटना से प्रधानमंत्री मोदी के फर्जी राष्ट्रवाद की पोल खुल गई। उन्होंने नरेंद्र मोदी को सैनिक विरोधी करार देते हुए ट्वीट भी किया।

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केजरीवाल बोले- सभी चैनल मोदीजी की आरती उतारें
गुरुवार को केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने पठानकोट हमले के दौरान रिपोर्टिंग में नियमों का उल्लंघन करने पर न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर 24 घंटे के लिए प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। प्रतिबंध की खबर सामने आने पर केजरीवाल ने ट्वीट करके इसके लिए भी प्रधानमंत्री को दोषी ठहराया और कहा, 'सुन लो सारे चैनल वालों। अगर मोदी जी की आरती नहीं उतारी तो आपका चैनल भी बंद कर देंगे।'

चैनल ने खुफिया जानकारी सार्वजनिक की
केजरीवाल के इस ट्वीट के बाद सवाल उठता है कि क्या वह वाकई सैनिकों का हित चाहते हैं? न्यूज चैनल पर की गई कार्रवाई कहीं न कहीं राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर ही है। आतंकी हमले के दौरान पठानकोट एयरबेस से जुड़ी खुफिया जानकारी को सार्वजनिक करके न्यूज चैनल ने न सिर्फ एयरबेस और वहां मौजूद जवानों की सुरक्षा को खतरा पहुंचाया बल्कि आस-पास के इलाकों में रह रहे लोगों के लिए भी यह जानकारी मुसीबत बन सकती थी।

Kejriwal

जानकारी का इस्तेमाल कर सकते थे हैंडलर
आतंकी हमले की रिपोर्टिंग के दौरान एयरबेस की खुफिया जानकारी का इस्तेमाल आतंकियों को निर्देश दे रहे हैंडलर भी कर सकते थे और उससे काफी ज्यादा नुकसान हो सकता था। चैनल पर प्रतिबंध का आदेश जारी होने से पहले मामले की जांच कर रही कमेटी ने भी यही सवाल उठाए थे। हमले में सुरक्षाबलों के सात जवान शहीद हुए थे, जबकि एक आम नागरिक भी मारा गया था। इसमें 6 आतंकियों को मार गिराया गया था।

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क्या वाकई केजरीवाल हित चाहते हैं?
आतंकी हमलों की रिपोर्टिंग हो या फिर अन्य मुद्दे, इलेक्टॉनिक मीडिया की कवरेज के लिए नियम तय करने और कार्रवाई की मांग लंबे समय से उठती रही है। 26/11 आतंकी हमले के समय भी आतंकियों ने टीवी फुटेज देखकर सुरक्षाबलों की स्थिति का पता लगाया था। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी चैनल पर सैनिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने पर कार्रवाई हुई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि लगातार सैनिक हितों की बात करने वाले केजरीवाल इस फैसले पर सरकार का विरोध क्यों कर रहे हैं?

2007 में लगा था इस चैनल पर प्रतिबंध
इसके पहले एक स्कूल टीचर पर सेक्स रैकेट चलाने का झूठा आरोप लगाने वाला स्टिंग ऑपरेशन चलाने औप अधूरा सच दिखाने के आरोप में सितंबर 2007 में लाइव इंडिया न्यूज चैनल को एक महीने के लिए बैन कर दिया गया था। उस वक्त केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि जनता के हित और नैतिकता के उल्लंघन पर सरकार किसी भी चैनल पर प्रतिबंध लगा सकती है।

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English summary
questions on arvind kejriwal's politics over his concern of army personals.
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