भारत की इस परमाणु पनडुब्बी की जद में आएंगे इस्लामाबाद और कराची!

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नई दिल्‍ली। देश की पहली स्‍वदेशी पनडुब्‍बी आईएनएस अरिहंत अगस्‍त में इंडियन नेवी में शामिल हो चुकी है। अंग्रेजी अखबार टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक यह पनडुब्‍बी अगस्‍त से ही ऑपरेशनल है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत ने इस पनडुब्‍बी के जितने भी टेस्‍ट्स किए वे भी एकदम चुपचाप ही किए गए थे। 3500 किमी की रेंज वाली आईएनएस अरिंहत चार से 12 मिसाइलों को एक साथ ले जा सकती है।  

इस पनडुब्‍बी को इंडियन नेवी में शामिल करने के साथ ही भारत ने परमाणु पनडुब्‍बी का चक्र पूरा करने की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। फरवरी में अरिहंत ने समंदर में सभी जरूरी ड्रिल और बाकी जरूरी सभी परीक्षाओं को पास कर लिया था।

भारत के पास इस पनडुब्‍बी से पहले अरिहंत क्‍लास की दो पनडुब्बियां पहले से ही मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों ही पनडुब्बियां इस तीसरी पनडुब्‍बी के मुकाबले कहीं ज्‍यादा एडवांस्‍ड हैं। एक नजर डालिए इस पनडुब्‍बी से जुड़ी कुछ खास बातों पर।

चुपचाप हुए ट्रायल्‍स

पिछले पांच माह से आईएनएस अरिंहत को टेस्‍ट किया जा रहा था। इसमें इंस्‍टॉल सभी हथियारों को बहुत ही गुपचुप तरीके से इसी अवधि में टेस्‍ट किया गया था।

खत्‍म होगी रूस पर निर्भरता

भारत अब तक रूस से परमाणु पनडुब्बियों को लीज पर लेता था ऐसे में यह भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी है।

विशाखापट्टनम में हुए टेस्‍ट्स

आईएनएस अरिहंत को इसके निर्माण के समय ही विशाखापट्टनम में गहरे समंदर में टेस्‍ट किया गया था। सारे टेस्‍ट्स के दौरान रूस की डाइविंग सपोर्ट टीम, आरएफएस एप्रॉन भी पूरे समय समंदर में मौजूद थी।

कितना वजन

इस सबमरीन का वजन 5,443,108किलोग्राम है और इसके वजन हो देखते हुए इसकी क्षमता के बारे में अगल-अलग आकलन लगाया जा रहा है।

कौन कौन से हथियार

आईएनएस अरिहंत पर 700 किमी रेंज से ज्‍यादा वाली 12 कम दूरी की के-15 मिसाइलें और 3,500 किमी की दूरी तक मार कर सकने वाली चार के-4 बैलेस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं।

पानी के अंदर से भी हमला

इस सबमरीन ने जहां अपने न्‍यूक्लियर ट्रायल्‍स को पूरा कर लिया है जिसमें हवा, समंदर और जमीन तक इसकी मारक क्षमता को टेस्‍ट किया था तो वहीं यह सबमरीन पानी के अंदर रहकर भी न्‍यूक्लियर वेपेंस फायर कर सकती है।

पांच पनडुब्बियों में से एक

अरिंहत भारत के पास मौजूद पांच पनडुब्बियों का हिस्‍सा होगी और इसे भारत के लिए एक कामयाबी माना जा रहा है।

कब शुरू हुआ प्रोजेक्‍ट

न्‍यूक्लियर हथियारों से लैस पनडुब्बियों वाली परियोजना को भारत में वर्ष 1970 में मंजूरी मिली थी। 1984 में आखिरी फैसला इन सबमरींस के लिए वर्ष 1984 में डिजाइन और टेक्‍नोलॉजी पर आखिरी मंजूरी मिली थी।

कब शुरू हुआ काम

परमाणु पनडुब्‍बी पर वर्ष 1998 में काम शुरू हुआ और वर्ष 2009 में अरिहंत को पहली बार दुनिया के सामने लाया गया।

 

 

चार से 12 मिसाइलें एक साथ

3500 किमी की रेंज वाली आईएनएस अरिंहत चार से 12 मिसाइलों को एक साथ ले जा सकती है। इस पनडुब्‍बी में के-15 मिसाइल और के-4 मिसााइलों को इंस्‍टॉल किया गया है। केे-15 मिसाइल की रेंज 750 किमी तक है।

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English summary
India's first indigenous nuclear submarine, the INS Arihant has joined Indian Navy in August silently. Take a look on some facts related with this submarine.
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