चीन को घुटनों के बल झुकाने का ये है अचूक हथियार, जिससे डरता है चीन

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नई दिल्‍ली। जब से सिक्किम में भारत और चीन के बीच तनाव की शुरुआत हुई है तब से ही देश में फिर से चीनी सामान को बैन करने की मांग उठने लगी है। चार हफ्तों से जारी इस समस्‍या का कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकल पा रहा है। चीन के साथ सभी तरह का व्‍यापार बंद करने की भी मांग हो रही है। एक वर्ष के अंदर यह दूसरा मौका है जब इस तरह की मांग उठी है। भारत में कई चीनी उत्‍पाद इस समय हैं जो न सिर्फ धड़ल्‍ले से बिक रहे हैं बल्कि उनकी लोकप्रियता भी काफी बढ़ रही है।

आंतकियों का समर्थन करता चीन

आंतकियों का समर्थन करता चीन

चीन, पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर बैन की मंजूरी नहीं दे रहा है। इसके अलावा चीन, न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री में रोड़े अटकाता आ रहा है। अब चीन, सिक्किम में भारत के साथ तनाव के लिए जिम्‍मेदार है। चीन की ओर से पाकिस्‍तान को मिलते समर्थन की वजह से भी देश में चीन के खिलाफ गुस्‍सा बढ़ता जा रहा है।

अब भारत प्रयोग करे अपना हथियार

अब भारत प्रयोग करे अपना हथियार

विशेषज्ञों की मानें तो चीन के खिलाफ भारत के पास मजबूत हथियार देश की सेना नहीं है बल्कि इसके साथ होने वाला व्‍यापार है। जाने-माने रणनीतिकार ब्रह्म चेलानी की मानें तो यहही समय है जब भारत को अपने सबसे ताकतवर हथियार को चीन के खिलाफ प्रयोग करना चाहिए।

लेकिन सरकार तैयार नहीं

लेकिन सरकार तैयार नहीं

पिछले वर्ष वाणिज्‍य मंत्री निर्मला सीतारमण से चीन के साथ होने वाले व्‍यापार को लेकर कई सवाल पूछे गए थे। उन्‍होंने इस पर जवाब दिया था, 'हम चीन के साथ होने वाले आयाता को पूरी तरह से बंद नहीं कर सकते हैं। हम उन पर कुछ कर लगा सकते हैं लेकिन इसे करने का भी एक तरीका है।' उन्‍होंने राज्‍यसभा में भी यह बात कही थी कि डब्‍लूयटीओ के नियमों की वजह से भारत के लिए यह संभव नहीं है कि वह चीनी उत्‍पादों को पूरी तरह से बैन कर दे। वहीं दूसरी तरफ चीन के साथ होने वाले व्‍यापार में भारत का अघिशेष यानी ट्रेड सरप्‍लस बढ़कर करीब 60 बिलियन डॉलर पर पहुंच चुका हे।

कैसे बदला लेता है चीन

कैसे बदला लेता है चीन

दिसंबर 2016 में चीन ने अपने बॉर्डर पर मोंगोलिया से आने वाले ट्रकों को रोक दिया था। चीन ने यह कदम बदले के तहत उठाया था क्‍योंकि तिब्‍बती धर्मगुरु दलाई लामा ने चीन की नाराजगी के बाद भी इस देश का दौरा किया था। मंगोलिया ने चीन का विरोध झेला था।

नॉर्वे को भी झेलना पड़ा विरोध

नॉर्वे को भी झेलना पड़ा विरोध

इसके अलावा वर्ष 2010 में नॉर्वे को भी चीन का विरोध झेलना पड़ा था। उस वर्ष नॉर्वे स्थित नोबेल पुरस्‍कार कमेटी ने चीन ने असहमति रखने वाले ल्‍यू जिआओबो को शांति पुरस्‍कार से नवाज तो चीन ने नॉर्वे से आने वाली सॉलमन मछली को ही बैन कर दिया था।

अमेरिका की वजह से साउथ कोरिया की मुसीबतें

अमेरिका की वजह से साउथ कोरिया की मुसीबतें

साउथ कोरिया ने जब अमेरिका के मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम थाड को डेप्‍लॉय किया तो चीन ने साउथ कोरिया के कॉस्‍मेटिक्‍स प्रॉडक्‍ट्स को ही बैन कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं चीन ने एक कदम आगे बढ़कर लोट्टे के ऑपरेशंस को भी देश में बैन कर दिया।

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English summary
The cry for a ban on Chinese goods has once again hit the air in the wake of the standoff between India and China.
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