मिर्जापुर: अब सत्ता के दबाव में नहीं बन पाएंगे थानाध्यक्ष, SP ने बनाए नए मानक

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्ष बनाने का नया मानक तय किया है।

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मिर्जापुर। मिर्जापुर ही नहीं अपितु पूरे उत्तर प्रदेश प्रदेश का यही हाल है कि थानेदारी उसी को मिलती है जिसकी सत्ता में पकड होती थी।

ऊपर जिले में आये नवागत पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने थानेदारी देने का तरीका ही बदल दिया है। बिना किसी सोर्स सिफारश के जिसका रिर्पोट कार्ड बेहतर होगा, उसकी थानेदारी बची रहेगी और जो फिसड़्डी होगा उसकी थानेदारी चली जायेगी।

एक माह के रिर्पोट कार्ड बीतने पर रिर्पोट कार्ड तैयार कर पुलिस अधीक्षक ने यही तरीका अपनाया। इससे सभी थानाध्यक्षों में खलबली मच गयी है।

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एक माह पूर्व जिले में आने पर पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि थानाध्यक्षो का रिर्पोट कार्ड बनेगा। जिसका रिकार्ड बेहतर नहीं होगा। उसकी थानाध्यक्षी जायेगी। जो बेहतर करेगा उसे पुरस्कृत किया जायेगा,हुआ भी ऐसा।

15 नवंबर से 14 दिसंबर तक के रिर्पोट कार्ड में सर्किल क्षेत्र में सीओ चुनार मुकेश चंद्र उत्तम व थानो में पडरी थानाध्यक्ष अशाेक कुमार सिंह प्रथम स्थान पर रहे। पुलिस अधीक्षक ने इन्हें प्रशस्त्रि पत्र देकर पुरस्कृत किया।

पर सबसे नीचले 15वें पायदान पर रहे चील्ह थानाध्यक्ष राकेश बहादुर सिंह गाज गिरी। उन्हें हटाकर एसपी ने विंध्याचल थानाध्यक्ष अंजय कुमार सिंह को चील्ह का थाना प्रभारी और भुवनेश्वर पांडेय को विंध्याचल थाने का नया प्रभारी बनाया।

शास्त्री पुल से गंगा में गिरे ट्रक व शव को निकालने में बेहतर कार्य करने पर यातायात प्रभारी देवेंद्र प्रताप सिंह को पुरस्कृत किया गया।

क्या है रिर्पोट का बननाने का तरीका

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पुलिस अधीक्षक ने सीओ और थानाध्यक्षों का रिर्पोट कार्ड बनाने के लिए प्राप्तांक और सूचकांक को मानक तय किये है। इसमें थानाध्यक्षों के द्वारा किये गये अपराध नियंत्रण एंव निरोधात्मक कार्रवाई के लिए उनको प्राप्तांक नंबर मिलता है।

पर रैंक में अव्वल आने के लिए सूचकांक मेनटेन करना जरुरी है। सूचकांक उसका अधिक रहता है जिस थाने की पुलिस कम पुलिस फोर्स और संसाधन में बेहतर काम करती है।

यही कारण है कि पड़री थानाध्यक्ष का प्राप्तांक कम होने के कारण भी नंबर वन स्थान दिया गया। क्योंकि उनका सूचकांक सबसे अधिक है।

क्या मलाईदार थानाप्रभारियों पर लागू होगा नियम?

पुलिस अधीक्षक के थानाध्यक्षी देने के इस तरीके की सभी तारीफ कर रहे है।

पर लोग प्रश्न ये भी खडा कर रहे है कि क्‍या मलाईदार थाना प्रभारियों पर भी इस तरीके के तहत कार्रवाई होगा। क्‍योंकि मलाईदार थाना प्रभारी तो सीधे सत्ता में सबसे पकड का फायदा उठाकर ही थानाध्यक्षी प्राप्त करते है।

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या यूं कहे कि विरोधी जो मलाईदार व ज्यादातर थानो पर जातिगत थानाध्यक्ष को तैनात आरोप लगाते है। क्या इससे इतर जाकर पुलिस अधीक्षक इन पर भी कार्रवाई करेंगे। क्योंकि इसी पकड़ के चलते नीचले क्रम में 14वें स्थान पर रहे कछवां थानाध्‍यक्ष अपनी थानाध्यक्षी बचाने मे सफल रहे।

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English summary
In UP if you want to became Thanadhyksh then will have to work hard.
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