'लाल बत्ती' युग का अंत: जानिए, इससे कैसे पुलिस को मिलेगी मदद

ट्रैफिक पुलिसकर्मी अधिकतर लाल बत्ती लगी गाड़ियों को इसलिए नहीं रोकते थे, क्योंकि उन्हें अपनी नौकरी जाने का खतरा रहता था। पीएम मोदी के एक फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से लाल बत्ती के इस्तेमाल को बंद करने के फैसले से न सिर्फ 'लाल बत्ती कल्चर' खत्म होगा बल्कि इसके गलत इस्तेमाल पर भी रोक लगेगी। दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस ने बत्तियों के गलत इस्तेमाल को रोकने की भरपूर कोशिशें की थीं लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिली।

2011-13 के बीच एक भी केस नहीं

ट्रैफिक पुलिसकर्मी अधिकतर लाल बत्ती लगी गाड़ियों को इसलिए नहीं रोकते थे, क्योंकि उन्हें अपनी नौकरी जाने का खतरा रहता था। उन्हें डर रहता था कि गाड़ी किसी बड़े पद वाले शख्स की हो सकती है जो उनकी नौकरी छीन सकता है। अगर आंकड़ों पर गौर करें साल 2011 से 2013 के बीच दिल्ली में एक भी शख्स के खिलाफ बत्ती के गलत इस्तेमाल का केस दर्ज नहीं हुआ। READ ALSO: जानें, केंद्र के फैसले के बाद किन मंत्रियों ने गाड़ी से हटाई लाल बत्ती

2014 में दर्ज हुए 10 केस

साल 2014 में बत्ती के गलत इस्तेमाल को लेकर 10 मामले दर्ज किए गए जबकि 2015 में 7 मामले दर्ज हुए। लाल बत्ती को लेकर दिल्ली मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यह नियम बनाया गया था कि किसी भी स्थिति में बिना अनुमति के वाहनों पर लाल या नीली बत्ती लगाने वालों पर कार्रवाई होगी। READ ALSO: वीआईपी कल्चर पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, लाल बत्ती लगाने पर रोक

नियमों में बदलाव:

-दिल्ली मोटर व्हीकल रुल्स के मुताबिक, बत्ती के गलत इस्तेमाल पर पहली बार पकड़े जाने पर 100 रुपये और उसके बाद पकड़े जाने पर 300 रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।

-इमरजेंसी सर्विसेज जैसे एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस पेट्रोल वाहन पर नीली बत्ती लगाने की अनुमति होगी। दिल्ली मोटर व्हीकल रुल्स 1993 के एक्ट 97 (2) के मुताबिक, इन वाहनों को नीली बत्ती लगाने की अनुमति थी।

-घूमने वाली या फ्लैशर लाल बत्ती अब सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों जैसे एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, पीसीआर वैन में ही इस्तेमाल की जा सकेगी। इन वाहनों पर छत के बीचोंबीच बत्ती लगाई जाएगी।

- पुलिस पेट्रोल वाहन, पायलट वाहन, ट्रांसपोर्ट विभाग के वाहन एक निशानी के तौर पर घूमने वाली या फ्लैशर नीली बत्ती का इस्तेमाल विंड स्क्रीन के ऊपर और सामने वाले हिस्से में कर सकते हैं।

- घूमने वाली या फ्लैशर पीली बत्ती का इस्तेमाल सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की ड्यूटी में लगे वाहनों पर किया जा सकेगा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नोटिफिकेशन

-घूमने वाली या फ्लैशर लाल बत्ती का इस्तेमाल सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति, उपप्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री, लोकसभा और राज्यसभा के नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के जज कर सकते हैं।

- बिना फ्लैशर वाली लाइट मुख्य चुनाव आयुक्त, CAG, राज्यसभा के उपसभापति, लोकसभा के उपाध्यक्ष, केंद्रीय राज्यमंत्री, कैबिनेट सचिव, तीनों सेनाओं के जनरल, केंद्र के उपमंत्री, तीनों सेनाओं के लेफ्टिनेंट जनरल या बराबर की पोस्ट के अधिकारी, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के चेयरमैन, अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन, अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के चेयरमैन, केंद्रीय लोकसेवा आयोग के चेयरमैन और सॉलिसीटर जनरल कर सकते हैं।

- मंत्रालय के नए नोटिफिकेशन में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और चीफ जस्टिस को बत्ती के इस्तेमाल की छूट दी गई है।

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English summary
How the end of Lal batti regime will help the police.
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