कश्मीर के 'बवालियों' पर सरकार ने पांच साल में 560 करोड़ लुटाए

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श्रीनगर। देश विरोधी नारे लगाने वाले, कश्मीर के युवाओं को देश के खिलाफ भड़काने वाले और पाकिस्‍तान से करोड़ों रुपए हासिल करने वाले कश्‍मीर के अलगाववादी नेता जिस थाली में खा रहे हैं उसी में छेद कर रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि कश्‍मीर के अलगाववादी नेताओं की वजह से राज्‍य सरकार के खजाने ने पिछले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का बोझ झेला है।

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सुरक्षा पर सबसे ज्‍यादा खर्च

अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सबसे ज्‍यादा खर्च होता है। राज्‍य सरकार की ओर से 950 पुलिसकर्मियों को घाटी के अलगाववाादियों की सुरक्षा में लगाया गया है।

जम्‍मू कश्‍मीर सरकार की ओर से दिए गए वर्ष 2015 के आंकड़ों पर अगर यकीन करें तो पिछले पांच वर्षों में 309 करोड़ रुपए इन सुरक्षाकर्मियों को बतौर तनख्‍वाह दिए जा चुके हैं।

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पांच वर्ष में 27 करोड़ का पेट्रोल

पिछले पांच वर्षों के दौरान 26.43 करोड़ रुपए सिर्फ पेट्रोल और डीजल पर खर्च हुए तो 21 करोड़ रुपए इन अलगाववादी नेताओं के किसी होटल में रुकने के दौरान खर्च हो चुके हैं।

जम्‍मू कश्‍मीर में बीजेपी के विधायक अजात शत्रु की ओर से जानकारी दी गई है कि पिछले पांच वर्षों में करीब 560 करोड़ रुपए इन अलगाववादी नेताओं पर खर्च किए जा चुके हैं।

पिछले वर्ष आई एक रिपोर्ट के मुताबिक जम्‍मू कश्‍मीर सरकार पांच वर्षों में 560 करोड़ रुपए अलगाववादी नेताओं पर खर्च कर चुकी है।

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कब से मिली है सुरक्षा

जम्‍मू कश्‍मीर में वर्ष 1990 में ऑल जम्‍मू एंड कश्‍मीर आवामी एक्‍शन कमेटी के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी फारूक की उनके ही गार्ड ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी। इस घटना ने सरकार को मजबूर कर दिया कि वह अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा प्रदान करे।

बंद होगी सारी सुविधाएं

इसका जिक्र आज इसलिए और भी जरूरी है क्‍योंकि केंद्र सरकार अब कश्‍मीर के अलगाववादी नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं को बंद करने के फैसले पर विचार कर रही है।

जल्‍द ही हो सकता है कि इस पर कोई बड़ा फैसला ले लिया जाए। अगर ऐसा होता है तो फिर अलगाववादी नेताओं को मिल रही सुरक्षा से लेकर इलाज तक सुविधाओं पर फुल स्‍टॉप लग जाएगा।

जहां एक तरफ वह देश के खिलाफ आग उगलते हैं तो वहीं केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली कई सुविधाओं का मजा भी उठाते हैं।

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English summary
The security of the separatists has burdened the government's exchequer the most, which costs 500 crore rupees to Indian government.
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