वानी की मौत का फायदा कैसे उठा रहे हैं कश्‍मीर के अलगाववादी नेता

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श्रीनगर। आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद हालातों के बीच ही अलगाववादी नेताओं के बीच काफी हलचल है। लेकिन कश्‍मीर में एक बड़ा तबका भी है जो वानी को अपना हीरो या फिर आदर्श मानने से इंकार कर देता है। यह तबका मानता है कि वानी को अगर किसी ने हीरो बनाया तो वह सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले लोगों ने।

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इनकी वजह से नहीं सुधर रहे हैं हालात

ऐसे लोगों के बीच ही यह बात भी हैरान कर देती है कि जब वानी को लेकर ऐसी सोच थी तो फिर घाटी में हालात क्‍यों नहीं सुधर रहे हैं। इसकी वजह है वे अलगाववादी नेता जो वानी की मौत के बाद से ही माहौल को अपने फायदे के लिए भड़काने में यकीन रखते हैं।

हुर्रियत कांफ्रेंस के मुखिया सैयद अली शाह गिलानी कभी भी वानी को पसंद नहीं करते थे। गिलानी और जेकेएलएफ का नेता यासीन मलिक भी एक-दूसरे का आमना सामना करने से बचते थे।

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दोनों ही इस बात को लेकर हैरान थे कि 20 वर्ष की उम्र में वानी कश्‍मीर के युवाओं की आवाज बन गया था। जबकि गिलानी और मलिक दोनों ही कई वर्षों की कोशिशों के बाद भी ऐसा करने में नाकाम रहे थे।

पाक और गिलानी एक जैसे

वानी की मौत के बाद से मलिक इस बात को सुनिश्चित करने में लग गया कि उसकी पार्टी के लोग युवाओं को प्रभावित करें और सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो जाएं।

गिलानी ने वानी की मौत के पहले दिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी बल्कि दो दिन बाद वानी के समर्थन में बयान जारी किया। वहीं पाकिस्‍तान की तरफ से भी वानी के समर्थन में बयान आने लगे जिसने आग में घी का काम किया।

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घर-घर जा रहे हैं आतंकी

कश्‍मीर में कई लोग इस बात से काफी दुखी हैं कि सड़कों पर आतंकियों की ओर से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। घाटी के अलावा पाकिस्‍तान से आए कुछ आतंकी भी इन प्रदर्शनों का हिस्‍सा हैं।

सूत्रों के मुताबिक साउथ कश्‍मीर में आतंकी लोगों के घरों तक जा रहे हैं और उनसे प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए कह रहे हैं ताकि इस मुद्दे को कभी मरने न दिया जाए।

90 का दौर वापस लाने की कोशिश

घाटी में फिर से 90 के दशक को वापस लाने की कोशिशें हो रही हैं और अलगाववादी नेता भी अपना वजूद तलाशने के चक्‍कर में प्रदर्शनो को भड़का रहे हैं और वानी की मौत का फायदा उठाने में लगे हैं। वह युवाओं को पैसे का लालच देकर सुरक्षाबलों पर पथराव भी कराने लगे हैं।

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English summary
Kashmir's separatists used an irrelevant Wani to stay relevant.
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