वाजपेयी से लेकर मनमोहन तक ने घेरा है पाक को, आज सुषमा की बारी

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न्‍यूयॉर्क। आज अमेरिका के न्‍यूयॉर्क में स्थित यूनाइटेड नेशंस (यूएन) के हेडक्‍वार्टर में जनरल एसेंबली यानी उंगा में भारत के संबोधन की बारी है। पिछली दो बार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकवाद से लेकर कई और मुद्दों पर महासभा को संबोधित करते आ रहे थे, तो इस बार उनकी जगह विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज सभा को संबोधित करेंगी।

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वाजपेयी से लेकर मनमोहन तक

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2002 में संसद पर हमले के बाद इस मंच से पाक को आतंकवाद पर फटकार लगाई थी। उसके बाद वर्ष 2013 में अपने आखिरी संबोधन में मनमोहन सिंह ने भी आतंकवाद पर पाक को सीख दी थी।

एक नजर डालिए कि कारगिल वॉर के बाद और संसद पर हमले के बाद भारत ने कैसे इस अंतराष्‍ट्रीय मंच पर पाक को घेरने की कोशिश की।

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जसवंत सिंह वर्ष 1999

22 सितंबर 1999 में उंगा का 55वां सत्र था और यह वह समय था जब भारत का कारगिल की जंग में फतह हासिल हुए दो माह ही बीते थे। तत्‍कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने उस समय उंगा के 55वें सत्र को संबोधित किया था।

जसवंत ने यहां पर दुनिया को बताया कि भारत का इसके पड़ोसियों के साथ रिश्‍ता काफी पुराना है और दोनों ही एक जैसा इतिहास रखते हैं। उन्‍होंने  पाक का नाम लिए बिना उन्‍होंने कहा कि दुनिया की कुछ सरकारें इसे आर्थिक समर्थन दे रही हैं।

उंगा का ध्‍यान उस लाहौर बस यात्रा की ओर दिलाया जो फरवरी 1999 में पाक के साथ शांति स्‍थापित करने के मकसद से शुरू की गई थी।

जसवंत ने जानकारी दी कि भारत के इस सबसे बड़े शांति प्रयास के बाद देश को कारगिल की जंग का सामना करना पड़ा।

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अटल बिहारी वाजपेयी-13 सितंबर 2002

वाजपेयी दिसंबर 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद उंगा को संबोधित करने के लिए यहां पहुंचे थे। उनसे एक दिन पहले ही नवाज शरीफ जो कि उस समय भी पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री थे, सभा को संबोधित कर चुके थे। 

उन्‍होंने दुनिया को याद दिलाया कि आतंकवाद की शुरुआत 11 सितंबर से नहीं हुई है। उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद के पीड़‍ित के तौर पर भारत, अमेरिका के नागरिकों के दर्द को समझ रहा है और उनसे सहानुभूति जताता है।

उन्‍होंने कहा था कि 'स्‍टेट स्‍पॉन्‍सर्ड टेररिज्‍म' के बाद अब दक्षिण एशिया में न्‍यूक्लियर वॉर की संभावना बढ़ने लगी है।

वाजपेयी ने उस समय जम्‍मू कश्‍मीर में चुनावों से पहले हुईं कुछ हत्‍याओं का आजादी का संघर्ष बताने वालों को भी जवाब दिया।

उन्‍होंने कहा, 'अगर यहां पर होने वाले चुनाव सिर्फ धोखाधड़ी हैं तो फिर आईएसआई की शह पर आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ करने के लिए क्‍यों प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि आतंकी यहां पर उम्‍मीदवारों और मतदाताओं की हत्‍या को अंजाम दे सकें।'

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मनमोहन सिंह- 28 सितंबर 2013

वर्ष 2013 की जब शुरुआत हुई थी तो जम्‍मू कश्‍मीर में इंडियन आर्मी के जवान हेमराज के सिर काटने की घटना हुई और इसके बाद पाकिस्‍तान की ओर से सीजफायर वॉयलेशन की घटनाएं लगातार बढ़ने लगी।

मनमोहन सिंह इन सबके बीच 28 सितंबर को अपना संबोधन देने के लिए उंगा पहुंचे। उन्‍होंने यहां पर कहा, 'देश की ओर से आतंकवाद को मिल रहे समर्थन के बाद आतंकवाद भारत की एक प्राथमिक चिंता बन गया है।'

उन्‍होंने कहा कि भारत इस सच से वाकिफ है कि आतंकवाद का केंद्र उसके पड़ोस में ही है और यह कहीं और नहीं पाकिस्‍तान में ही है।

मनमोहन सिंह ने उंगा को जानकारी दी कि भारत, पाकिस्‍तान के साथ हर तरह के मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें जम्‍मू कश्‍मीर भी शामिल है। अगर ऐसा होना है तो फिर उसके लिए पाक को पहले अपने यहां पनप रहे आतंकवाद पर लगाम लगानी होगी। 

सुषमा स्‍वराज-2015

पिछले वर्ष पीएम मोदी के संबोधन के बाद सुषमा स्‍वराज ने भी उंगा को संबोधित किया था। उन्‍होंने यहां पर कहा, 'भारत पिछले 25 वर्षों से आतंकवाद को बड़े स्‍तर पर झेल रहा है।

अतंराष्‍ट्रीय समुदाय को एक साथ उन सभी देशों के खिलाफ खड़े होने की जरूरत है जिन्‍होंने आतंकियों को अपने यहां पर सुरक्षित पनाह दी हुई है।'

स्‍वराज ने यहां पर वर्ष 2008 में हुए मुंबई हमलों का जिक्र भी किया और कहा कि यह बात सच है कि हमलों का मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद पाकिस्‍तान में ही रह रहा है। 

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English summary
ormer Prime Minister Atal Bihari Vajpayee and Manmohan Singh both made it very clear to Pakistan that its soil should not be used for terrorism.
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