भूमि अधिग्रहण बिल पर सरकार के फूले हाथ-पांव
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) सरकार को दिन में तारे नजर आ रहे हैं भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर विपक्ष के तगड़े विरोध के कारण। सरकार के हाथ-पैर फूलते रहे हैं विरोध को देखकर। सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया।

चौतरफा विरोध
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती, सपा के रामगोपाल यादव, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नेता डी.राजा ने विधेयक पर सरकार पर हमला किया।
इस बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समाजसेवी अन्ना हजारे के आंदोलन में शामिल हुए और इस विधेयक को किसान विरोधी करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की। अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के अंदर किसी की भी जमीन का जबरदस्ती अधिग्रहण नहीं करने दिया जाएगा।
अन्ना आगे आए
अन्ना ने अध्यादेश के खिलाफ तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा कि आने वाले 3-4 महीनों में किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। अन्ना ने इन बदलावों को किसान विरोधी बताया है। उन्होंने कहा है कि भूमि अधिग्रहण में किए गए बदलावों की वजह से किसानों से सरकार उनका हक छीन रही है।
अन्ना ने सरकार के बदलावों को किसान विरोधी और उद्योगपतियों के लिए फायदेमंद बताया है। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून में किए गए संशोधन के खिलाफ अन्ना हजारे का साथ देने के लिए किसान भी जंतर मंतर पहुंच रहे हैं।
अन्ना ने कहा कि सरकार ने नारा दिया था कि अच्छे दिन आने वाले हैं, तो वो अच्छे दिन कब आएंगे। क्या ये अच्छे दिन सिर्फ बड़े बिल्डर्स के लिए आने वाले हैं। अध्यादेश उद्योगपतियों के लिए है। इतना अन्याय तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया। आप नेता मीरा सान्याल भी यहां पहुंची। उन्होंने कहा कि वो भी इस कानून के विरोध में हैं और जंतर मंतर पर अन्ना का साथ देने आई हैं।
अधिग्रहण कानून में किए जा रहे संशोधन के खिलाफ अन्ना हजारे का आयोजित यह धरना दो दिन का होगा। इस धरने में हिस्सा लेने के लिए हजारों किसानों के दिल्ली पहुंचने की संभावना है। वहीं राज्यसभा के उप सभापति पी.जे.कुरियन ने सदस्यों से आग्रह किया कि जब विधेयक राज्यसभा में आए, तब उसपर चर्चा की जाएगी। अध्यादेश की जगह विधेयक ले लेगा। जब विधेयक यहां आएगा, तब उसपर आप चर्चा कर सकते हैं।
उधर,विपक्ष को शांत करने के लिए कदम उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक कमेटी बनाई है, जिसमें पार्टी के आठ सांसद होंगे, जिसकी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल मलिक करेंगे। यह कमेटी मुद्दे पर किसानों तथा अन्य संगठनों से चर्चा करेगी।
सांसद करें बचाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक को किसान समर्थित बताते हुए अपने सांसदों से इस मुद्दे पर बचाव करने के लिए कहा है। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजधानी में जंतर मंतर पर दो दिवसीय आंदोलन के अंतिम दिन केजरीवाल ने कहा, "दिल्ली का मुख्यमंत्री होने के नाते आज मैं यह ऐलान करता हूं कि दिल्ली में जमीन का मुद्दा भले ही केंद्र सरकार के अधीन आता है, लेकिन राज्य सरकार अपनी पूरी ताकत से जहां तक हो सकेगा यह सुनिश्चित करेगी कि यहां किसी की जमीन का अधिग्रहण जबरन नहीं होने दिया जाए।"
उधर पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में विधेयक पर निशाना साधते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया। नीतीश ने कहा, "भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों, गरीबों और गांव में रहने वाले लोगों के हित में नहीं है। यह विधेयक चंद पूंजीपतियों के हित और उनके भलाई के लिए लाया जा रहा है।"
समाजवादी पार्टी (सपा) नेता नरेश अग्रवाल ने कहा, "हमने एक नोटिस दिया है। पूरे देश में अध्यादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली में भी प्रदर्शन हो रहे हैं।" कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि अध्यादेश का सहारा लेकर सरकार संसद की मर्यादा को कम कर रही है।












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