स्कार्लेट रेप-मर्डर केस: रात के 3 बजे गोवा के बीच पर आखिर हुआ क्या था?

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पणजी। 15 साल की स्कार्लेट 2008 में अपनी मां फियोना, मां के ब्वॉयफ्रैंड और आठ भाई-बहनों के साथ छह महीने के लिए भारत छुट्टियां मनाने आई थी।

परिवार के सभी लोग गोवा के पड़ोस में कर्नाटक जाने लगे तो स्कार्लेट जाने को तैयार नहीं हुई। उसने मां से गोवा में ही रहने की इजाजत मांगी। मां ने स्कार्लेट को गोवा में रहने की इजाजत दे दी। गोवा में 25 साल का लोकल गाइड जुलियो लोबो से स्कार्लेट की दोस्ती थी और वह उसी के साथ रहती थी।

फरवरी 2008 की शुरुआत में स्कार्लेट का परिवार ब्रिटेन वापस लौटने की तैयारी में था। स्कार्लेट गोवा से कर्नाटक के गोकर्ण में परिवार के पास आ गई। लेकिन 14 फरवरी को उसने फिर गोवा जाने की इजाजत मां फियोना से मांगी।

गोवा के हिप्पी यानि अंजुना बीच पर 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे पार्टी थी जिसमें शामिल होने के लिए स्कार्लेट को मां ने हिचकते-हिचकते इजाजत दे दी। इसी हिप्पी बीच पर चार दिन बाद स्कार्लेट की लाश मिली।

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गवाहों के शुरुआती बयानों के आधार पर क्राइम सीन

गवाहों के शुरुआती बयानों के आधार पर क्राइम सीन

तारीख 17 फरवरी 2008। समय रात के 3 बजे। हिप्पियों की मौज-मस्ती के लिए स्वर्ग माने जाने वाले गोवा के अंजुना बीच पर 15 साल की स्कार्लेट डगमगाती चलती हुई एक बार में देखी गई। इस बार का नाम था लुई शैक।

बार के मालिक लुई ने बयान दिया कि उस रात उसने देखा कि नशे में धुत्त स्कार्लेट घर जाना चाहती थी और वह बार में आकर लिफ्ट मांग रही थी।

बार वेटर मुरली सागर के बयान के अनुसार, लुई शेक के अंदर आकर स्कार्लेट किचन में चली गई, जहां वेटर सैमसन डिसूजा और प्लेसिडो कार्वाल्हो के साथ उसने कोकीन ली। उसके बाद स्कार्लेट को घर छोड़ने वह लगभग 5 बजे निकला।

डिसूजा के साथ रहनेवाले ब्रिटिश नागरिक माइकल मैनियन के अनुसार, उसने देखा कि मुरली सागर के साथ स्कार्लेट घर जाने के लिए सुबह के 5 बजे निकली। लेकिन कुछ मिनट बाद मुरली सागर वहां से गायब था और बार के कार पार्किंग में स्कार्लेट के ऊपर सैमसन डिसूजा था।

मुरली सागर ने फिर बयान दिया कि उस वक्त जब वह स्कार्लेट को लेकर बार से निकला था तो अचानक डिसूजा आया और स्कार्लेट को पकड़ लिया। डिसूजा ने मुरली से चले जाने को कहा और वह चला गया। यही वह आखिरी समय था जब स्कार्लेट जिंदा दिखी थी और डिसूजा के साथ थी।

कुछ घंटे बाद पुलिस अफसर गुरंथ नाइक को लोकल बार से एक कॉल आई और जब वह हिप्पी बीच पर पहुंचे तो वहां 15 साल की स्कार्लेट की पेट के बल लेटी अधनंगी लाश पड़ी थी और उसका चेहरा अंजुना तट की लहरों में डूबा हुआ था।

(मर्डर केस में कोर्ट की कार्यवाही के दौरान मुरली सागर और माइकल मैनियन अपने बयानों से मुकर गए।)

मर्डर केस और गोवा की लोकल पुलिस

मर्डर केस और गोवा की लोकल पुलिस

स्कार्लेट की लाश मिलने के बाद गोवा की लोकल पुलिस ने वैसा कुछ नहीं किया जैसा पुलिसवालों को मर्डर केस में करना चाहिए। ना तो क्राइम सीन से सबूत जुटाए गए और न ही लाश का ठीक से पोस्टमॉर्टम किया गया।

18 से 20 फरवरी तक ऐसे चला यह केस

18 फरवरी की सुबह लहरों में औंधे मुंह लेटी हुई स्कार्लेट को वहां से उठाकर स्थानीय मुर्दाघर में ले जाया गया जहां तुरत फुरत में पोस्टमॉर्टम हुआ और अगले ही दिन पुलिस इंस्पेक्टर नेर्लोन अल्बुकर्क ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बता दिया कि स्कार्लेट की मौत डूबने से हुई थी। यह एक एक्सिडेंटल डेथ था। बस मामला समाप्त।

लेकिन मामले को वहीं 2 दिन में समाप्त नहीं होना था। लोकल पुलिस ने ऐसा काम किया था कि 2 दिन में क्राइम सीन के कई सारे सबूत मिट गए और मामला 8 साल खिंच गया।

डॉक्टर सिल्वानो सपेको ने स्कार्लेट का पोस्टमॉर्टम किया था। उनका कहना था कि उन्होंने तो स्कार्लेट को डूबाकर मारने की आशंका जताई थी और यह उन्होंने पुलिस से कहा था लेकिन पुलिस इंस्पेक्टर अल्बुकर्क ने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और इसे एक्सिडेंटल डेथ का मामला बना दिया।

21 फरवरी को स्कार्लेट की मां के गोवा आने से केस ने लिया यू टर्न

21 फरवरी को स्कार्लेट की मां के गोवा आने से केस ने लिया यू टर्न

स्कार्लेट की मौत के तीसरे दिन 21 फरवरी को उसकी दुखी मां फियोना गोवा पहुंची और लोकल लोगों से मामले की छानबीन शुरू कर दी। वहां लोगों के बीच यही बात चल रही थी कि स्कार्लेट का रेप और मर्डर किया गया था और फियोना के अनुसार, इस बात के कुछ सबूत भी मिले।

गोवा के तट पर फियोना को स्कार्लेट की बिकिनी, अंडरवियर, शॉर्ट्स और टूटी सैंडल मिलीं जिसे पुलिस ने उठाया तक नहीं था। यह देखकर फियोना को पुलिसिया जांच पर शक हुआ।

वकील विक्रम वर्मा और फियोना ने स्कार्लेट की बॉडी की जांच खुद करने की कानूनी इजाजत ली और उनका कहना था कि स्कार्लेट के बदन पर जख्म के 52 निशान थे। जबकि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में महज 5 निशान होने की बात लिखी थी।

स्कार्लेट अच्छी तैराक थी और घुड़सवारी जानती थी इसलिए मां फियोना को उसके पानी में डूबकर मरने की बात पच नहीं रही थी।

फियोना केस को लेकर मुख्यमंत्री से मिलीं

26 फरवरी 2008 को फियोना गोवा के मुख्यमंत्री से मिलीं और उनसे इस केस को क्राइम केस के तौर पर जांच करवाने की अपील की। पहले तो उनकी अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया गया लेकिन जब इंटरनेशनल मीडिया में मामला उछलने लगा तो इस केस में एफआईआर दर्ज की गई।

इसके बाद स्कार्लेट केस को लोकल पुलिस द्वारा दबाए जाने के मामले पर इंटरनेशनल मीडिया में इतना हंगामा हुआ कि आखिरकार दो केंद्रीय मंत्रियों ने लोकल पुलिस रिपोर्ट की आलोचना करते हुए इसे दुखद और शर्मनाक कहते हुए केस को फिर खुलवा दिया।

तत्कालीन महिला कल्याण मंत्री रेणुका चौधरी को कहना पड़ा कि अगर लोकल पुलिस ने मामले की लीपापोती की है तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दूसरे पोस्टमॉर्टम के बाद बना मर्डर केस

दूसरे पोस्टमॉर्टम के बाद बना मर्डर केस

22 मार्च को लाश का दूसरी बार पोस्टमॉर्टम किया गया और इसमें सिफारिश की गई कि इसे मर्डर केस मानकर जांच की जाय। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि लाश की कमर के नीचले हिस्से में चोट के निशान थे जिससे मां फियोना के इस शक को बल मिला कि स्कार्लेट के साथ रेप हुआ था।

लाश के फेफड़े में बालू मिला पानी भरा था जिसका संकेत यह था कि स्कार्लेट समुद्र तट पर वहां मरी थी जहां पानी कम था।

लाश के पीठ के ऊपरी हिस्से यानि गर्दन के ठीक निचले हिस्से में चोट के निशान थे जिससे फियोना और वकील विक्रम वर्मा को यह लगा कि स्कार्लेट को किसी ने पीछे से ताकत लगाकर बालू वाले पानी में उसका सिर चेहरे के बल डुबाए रखा था जिससे उसकी मौत हुई। लेकिन यह बात पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नहीं थी।

बाद में के आरोपियों के वकील ने इस बारे में सफाई दी कि स्कार्लेट के पीछे चोट के निशान हॉस्पिटल और मुर्दाघर ले जाते समय लग गए होंगे।

मां फियोना के खिलाफ लापरवाही के आरोप

स्कार्लेट मर्डर में गोवा पुलिस और सरकार की मीडिया में काफी किरकिरी हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने यह बयान देकर बवाल को और बढ़ा दिया कि उन्होंने स्कार्लेट की मां के खिलाफ नाबालिग बेटी को गोवा में छोड़ने की लापरवाही करने की जांच के लिए अधिकारियों से कहा था।

फियोना ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए जांच की इस दिशा को काफी घृणित कदम कदम बताया और नेताओं, पुलिस अधिकारियों तथा ड्रग माफियाओं पर मामले की लीपापोती का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि दूसरे पोस्टमॉर्टम के लिए दबाव डालने की वजह से पुलिस उनको फंसा रही है और जांच की दिशा को कहीं और ले जाने की कोशिश कर रही है। फियोना के वकील विक्रम वर्मा ने पुलिस पर जानबूझकर केस में लेटलतीफी करने का आरोप लगाया ताकि मामले को दबाने के लिए समय मिल सके।

फियोना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर देश की पुलिस व्यवस्था के प्रति निराशा जताई। दबाव पड़ने पर बाद गोवा पुलिस ने कहा कि मां फियोना के खिलाफ जांच नहीं की जाएगी और इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हुई।

मर्डर केस में हुई डिसूजा और कार्वाल्हो की गिरफ्तारी

मर्डर केस में हुई डिसूजा और कार्वाल्हो की गिरफ्तारी

लुई शैक बार का कर्मचारी सैमसन डिसूजा वह आखिरी शख्स था जिसके साथ स्कार्लेट दिखी थी। उसे गवाहों के बयान के आधार पर एरेस्ट किया गया। मार्च के अंत तक उसके साथी प्लेसिडो कार्वाल्हो को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही पुलिस इंस्पेक्टर और पहला पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया।

इस मामले में दो ही महत्वपूर्ण गवाह थे - बार वेटर मुरली सागर और ब्रिटिश नागरिक मैनियन। दोनों ही बाद में कोर्ट में अपने शुरुआती बयानों से मुकर गए। कोर्ट यह साबित ही नहीं हो पाया कि डिसूजा और कार्वाल्हो ने ड्रग ली थी या स्कार्लेट को ड्रग दी थी या फिर रेप और मर्डर किया था।

सीबीआई के पास गया यह मर्डर केस

स्कार्लेट की मौत के 100 दिन बाद 5 जून को इस केस को सीबीआई को सौंपा गया। 16 महीने की जांच के बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार किया।

सीबीआई ने दोनों आरोपियों - डिसूजा और कार्वाल्हो के खिलाफ हत्या का केस नहीं, गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया। दोनों पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्कार्लेट का यौन शोषण किया, जानबूझकर समंदर के बीच पर लाकर नशे में धुत्त स्कार्लेट को मरने के लिए छोड़ा और अपराध को छुपाने का प्रयास किया।

स्कार्लेट की मां फियोना के वकील विक्रम वर्मा का कहना था कि जब तक सीबीआई के पास केस आया तब तक कई सबूत नष्ट हो चुके थे इससे आरोपियों को फायदा हो गया।

चिल्ड्रेन्स कोर्ट में महीने में सिर्फ एक बार केस की सुनवाई

स्कार्लेट नाबालिग थी इसलिए यह केस 3 मार्च 2010 से चिल्ड्रेंस कोर्ट में चला। लेकिन नाकाबिल लोकल पुलिस, सीबाआई के कम गंभीर चार्जशीट से केस होते-होते अब अदालत के चक्कर में फंस गया। महीने में सिर्फ एक बार इस केस की सुनवाई हो पाती थी।

फिर तो देर पर देर होने का सिलसिला शुरू हो गया। रिटायरमेंट की वजह से कई जज बदलते चले गए।

स्कार्लेट केस में अभियोग पक्ष की कमजोरी

स्कार्लेट केस में अभियोग पक्ष की कमजोरी

अभियोग पक्ष का केस स्कार्लेट के साथ आखिरी बार दिखे आरोपी सैमसन डिसूजा पर टिका था जिसमें ब्रिटिश नागरिक मैनियन गवाह था लेकिन वह अदालत में गवाही देने से मुकर गया।

43 साल के गवाह माइकल मैनियन को दोस्त मसाला माइक कहते थे। वह अपने दोस्त और केस के आरोपी सैमसन डिसूजा के साथ उस रात था जब स्कार्लेट की मौत हुई थी।

स्कार्लेट की लाश मिलने के बाद वह फरार होकर बहुत दिनों तक छुपा रहा। उसने अपनी जान को खतरा बताया। पुलिस ने जब उसको सुरक्षा देने की बात कही तब जाकर घटना के बारे में मजिस्ट्रेट के सामने उसने अपनी कहानी बताई। बयान देने के बाद वह इंग्लैंड चला गिया और फिर गवाही के लिए गोवा नहीं लौटा।

वीडियो लिंक के जरिए भी कोर्ट में गवाही देने से वह मुकर गया। उसका कहना था कि वह मेंटल डिसऑर्डर का शिकार है और उसे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर है।

वकील वर्मा और स्कार्लेट की मां फियोना का मानना है कि मैनियन ने धोखा दिया। मैनियन ने वादा किया था कि वह गवाही देने के लिए लौटेगा लेकिन वह नहीं लौटा।

स्कार्लेट केस में डिफेंस की दलील

दोनों आरोपियों में से किसी ने भी अदालत में बयान नहीं दिया। उनका कहना था कि वह अपने आपको निर्दोष साबित नहीं करेंगे बल्कि उन पर लगे आरोपों को साबित करना अभियोग पक्ष का काम है।

इस केस में आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण गवाह मैनियन जब गवाही से मुकर गया तो स्कार्लेट की जिंदगी के आखिरी क्षणों की कोई कहानी ही नहीं बची। आरोपी डिसूजा ने स्कार्लेट के साथ होने पर बयान दिया कि वह 5 बजे उसके साथ था लेकिन उसके बाद अकेले घर चला गया। उसने और कार्वाल्हो ने कोकीन या किसी प्रकार के ड्रग्स लेने या स्कार्लेट को देने की बात से इनकार कर दिया।

डिसूजा और कार्वाल्हो के वकील ने दलील दी कि मीडिया और कूटनीतिक दबाव की वजह से गोवा सरकार ने दो छोटे लोगों को बली का बकरा बनाया गया है।

बचाव पक्ष ने पहले पोस्टमॉर्टम के आधार पर बार-बार दलील देकर कहा कि उसमें तो यह निकला था कि स्कार्लेट की मौत पानी में डूबने से हुई थी और उसके शरीर पर किसी घातक चोट के निशान नहीं थे।

दूसरे पोस्टमॉर्टम में मिली चोटों के निशान पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वह लाश को उठाने और हॉस्पिटल ले जाने की वजह से लग गए होंगे।

स्कार्लेट के अच्छी तैराक होने के अभियोग पक्ष की दलील के खिलाफ बचाव पक्ष ने कहा उसके शरीर में इतना मॉर्फिन और कोकीन था जिससे मजबूत से मजबूत तैराक भी देर रात समंदर में डूब सकता था।

चिल्ड्रेंस कोर्ट का आठ साल बाद फैसला

चिल्ड्रेंस कोर्ट का आठ साल बाद फैसला

शुक्रवार को स्कार्लेट की मौत के 8 साल बाद चिल्ड्रेंस कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। दोनों आरोपियों को सबूत और गवाह के अभाव होने का फायदा मिला। स्कार्लेट को ड्रग्स देने या उसके साथ रेप और बाद में मर्डर करने का आरोप अभियुक्तों के खिलाफ साबित नहीं हो पाया।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सैमसन डिसूजा और प्लेसिडो कार्वाल्हो को आरोपों से मुक्त कर बरी कर दिया।

फैसला सुनकर फियोना कहने लगीं कि उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिला और भारत की न्याय-व्यवस्था पर से उनका यकीन उठ गया है। उन्होंने सीबीआई को भी नाकाबिल और भ्रष्ट कहा।

इस केस का सबसे डार्क पहलू

इस केस का सबसे डार्क पहलू

स्कार्लेट की जिंदगी में उसकी मौत से पहले क्या चल रहा था, छानबीन के दौरान इसके बारे में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। 15 साल की स्कार्लेट की डायरी से यह भी पता चला कि वह इतनी कम उम्र में सेक्स और ड्रग्स के साथ प्रयोग कर रही थी और गोवा में जुलियो के साथ उसके जिस्मानी रिश्ते थे।

जूलियो ने भी इस रिश्ते को एक इंटरव्यू में स्वीकार किया और कहा कि वह नहीं जानता था कि स्कार्लेट नाबालिग है। स्कार्लेट ने बताया था कि वह 19 साल की है।

इस केस में जुलियो लोबो की क्या भूमिका थी, इसकी ठीक से जांच नहीं हो पाई। कहा जाता है कि जुलियो लोबो ने ही स्कार्लेट को गोवा में ड्रग्स मुहैया करवाने वालों से मिलवाया था।

जुलियो लोबो इस केस से साफ बचकर निकल गया जबकि वह स्कार्लेट का सबसे करीबी था। जुलियो का कहना था कि 17 तारीख की उस मनहूस रात को उसने अंजुना बीच के एक रेस्टोरेंट पर स्कार्लेट को लगभग 8.30 बजे छोड़ा था।

17 तारीख की रात हिप्पी बीच पर स्कार्लेट के साथ क्या हुआ और उसकी मौत कैसे हुई, यह अनसुलझी पहेली बनकर रह गई।

गोवा में ड्रग्स का धंधा

गोवा में ड्रग्स का धंधा

स्कार्लेट केस से गोवा में ड्रग्स का धंधा भी सुर्खियों में आया। केस के शुरू में गवाहों ने लुई शेक बार पर भी ड्रग्स का धंधा करने के आरोप लगाया था। बार के बारे में कहा गया था कि गोवा के ड्रग डीलर से माल लेकर इसका मालिक उसे डिसूजा और कार्वाल्हो जैसे वेटरों के जरिए सप्लाई करता था। यह भी कहा गया कि लुई शेक मालिक ने बहुत सारा ड्रग्स छुपा रखा था।

स्कार्लेट की जब लाश मिली तो उस वक्त मामले में लुई शेक बार वह आखिरी जगह थी जहां वह देखी गई थी। वहां डिसूजा और कार्वाल्हो के साथ स्कार्लेट के कोकीन लेने की बात एक गवाह ने बताई थी।

लोकल पुलिस ने स्कार्लेट केस को दबाने की कोशिश की। इसमें ड्रग माफिया-पुलिस नेक्सस होने की भी बात कही जा रही थी।

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English summary
A fifteen years old Brit schoolgirl raped and killed on Anjuna beach of Goa in 2008 and this murder case is still unsolved. Read the full case history.
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