नोटबंदी के साइड इफेक्ट: खाद-बीज नहीं खरीद पा रहे हैं किसान

खाद-बीज नहीं खरीद पा रहे हैं किसान, लेकिन मोदी का साथ देने को तैयार, कहा फैसला भविष्य के लिए बेहतर।

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लखनऊ। नोटबंदी का असर हर किसी पर पड़ रहा है। जहां आम पब्लिक बैंकों और एटीएम की लंबी लाइनों में अपनी बारी का इंतजार कर रही है तो वहीं किसान कैश के ्भाव में खाद और बीज खरीदने में असमर्थ हो रहे हैं। यूपी के कई जिलों में किसान नोट के अभाव में बीज और खाद नहीं खरीद पा रहे हैं। बुआई का वक्त होते हुए भी किसान खाली हाथ बैठे हैं । वो नोट का इंतजार कर रहे हैं। ताकि उन नोटों से वो दुकानदार के पास जाकर खाद-बीज खरीद सकें।

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वहीं दुकानदारों का कहना है कि उनके पास भी खुले पैसे नहीं बचे हैं, जिसकी वजह से वो किसानों को खाद-बीज देने में असहाय है। कुछ किसान बीज का इंतजार कर रहे हैं तो कुछ के फसल खाद के लिए तरस रहे हैं। किसानों के मुताबिक अगर खाद डालने में 10 दिनों का विलंब कर देंगे तो सरसों की फसल में कीड़े लग जाएंगे। इसका असर कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है।

इफ्फको वेयरहाउस के प्रबंधक एसएन त्रिपाठी के मुताबिक 150 से लेकर 200 किसान सुबह आकर लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं लेकिन उनके पास बड़े नोट हैं जिन्हें हम स्वीकार नहीं कर सकते। ऐसे में बेसहारा किसान इंतजार के अलावा और कुछ कर भी नहीं सकते। ग्रामीण इलाकों में यूं ही बैकों की संख्या बहुत कम है। जो बैंक हैं भी उनमें कैश जल्द खत्म हो जा रहा है। ऐसे में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

हलांकि तमाम दिक्कतों के बाद किसानों का कहना है कि वो इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वो दुकानदारों से लोन लेकर खाद बीज खरीद लेंगे, लेकिन सरकार का ये पैसला उनके भलाई के लिए हैं, इसलिए वो ये सब कठिनाई उठाने को तैयार हैं।

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English summary
Farmers are unable to purchase seeds due to non-availability of change, this is affecting cropping.
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