सरकार को नए नोट लाना था, इसलिए रघुराम राजन को जाना पड़ा!

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नई दिल्ली। पीएम मोदी के 1000 और 500 के नोट पर बैन के बाद पूर्व गर्वनर रघुराम राजन के साथ इस मुद्दे पर सरकार के मतभेद भी सामने आ रहे हैं।

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8 नवंबर को पीएम मोदी के बड़े नोट (500 और 1000) पर बैन के बाद एक और कहानी सामने आ रही है। ये है पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन और मोदी सरकार में नोट बैन को लेकर टकराव की।

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इस साल 4 सितंबर को रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर के पद से मुक्त हुए। इससे पहले उनके मोदी सरकार के साथ टकराव की कई बातें सामने आईं। मोदी सरकार के नोट पर बैन के फैसला लेने के बाद एक बार फिर रघुराम राजन का नाम चर्चा में है।

द क्विंट की खबर के मुताबिक, मोदी सरकार के सीनियर अधिकारियों ने रघुराम राजन के गवर्नर रहते हुए सरकार की ओर से 1000 और 500 के नोट को बैन करने को लेकर चर्चा की थी। तब रघुराम राजन ने इसका समर्थन नहीं किया था। इसके बाद राजन और सरकार के बीच टकराव हुआ था। माना जा रहा है कि ये टकराव रघुराम राजन के जाने की एक बड़ी वजह बना।

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रघुराम राजन के जाने के बाद तेज हुई नोट छपाई की प्रक्रिया

जून में रघुराम राजन ने ऐलान किया कि वो बतौर आरबीआई गवर्नर दूसरा कार्यकाल नहीं चाहते हैं। उनके इस फैसले के बाद सरकार ने 500 का नया नोट और 2000 का नोट छापने के काम को गति दी।

सितंबर में रघुराम राजन के पद छोड़ देने और उर्जित पटेल के गवर्नर का पदभार संभाल लेने के बाद ही नोट छापने के काम को गति मिली। पिछले कुछ महीने में नासिक और मैसूर में नोट छापे गए।

रघुराम राजन ने सरकार के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन वो नोट बैन करने और बदलने को कालेधन पर लगाम के लिए बहुत कारगार नहीं मानते थे। इस विषय पर उन्होंने कुछ समय पहले एक लेक्टर के दौरान अपने विचार रखे थे।

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नोट बैन नहीं, टैक्स सुधार की जरूरत: राजन

नोट बैन से कालेधन पर लगाम कितनी कारगर होगी, इस पर कुछ समय पहले रघुराम ने एक सेमिनार में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि नोट बैन कर देने से कालेधन पर लगान लग जाएगी।

उन्होंने कहा कि नोट बैन होता है तो कालाधन रखने वाले लोग उससे निकलने के लिए भी रास्ते निकाल लेते हैं। उन्होंने कहा कि लोग काले को सफेद करने के भी कई तरीके जानते हैं।

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उन्होंने कहा था कि कालेधन पर लगाम लगाने के लिए लोगों पर लगने वाले टैक्स के बारे में हमे सोचना चाहिए। उनका कहना छा कि ज्यादा कमाई करने वालों पर हमारे यहां अधिकतम कर 33 फीसदी है जबकि अमेरिका में ये 39 फीसदी है, जो कई और टैक्स मिलकर 50 फीसदी तक हो जाता है।

रघुराम राजन का कहना है कि हमें कर व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है। उनका मानना है कि तमाम डाटा को ट्रैक करने की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर कोशिश की जाए तो कालेधन पर लगाम हो सकता है।

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English summary
Ex RBi governer was not happy with Currency Demonetisation
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