नोटबंदी: चढ़ावा में कमी से मंदिर परेशान, प्रांगण में लगेंगे एटीएम

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मुंबई। 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद देशभर से कारोबार को नुकसान की खबरें आ रही हैं। इससे पार पाने को कारोबारी नए रास्ते भी निकाल रहे हैं। मंदिरों भी नोटबंदी के बाद चढ़ावे में कमी आई है, इसको देखत हुए मंदिर भी इससे पार पाने के लिए रास्ते निकालने में लगे हुए हैं।

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नोटबंदी के बाद से मंदिरों को मिलने वाला चढ़ावा भी खबरों में बना हुआ है। नोटबैन के बाद कई मंदिरों ने लोगों से पुराने नोट दान ना करने की अपील की। इसके बाद देशभर के मंदिरों के चढ़ावे में भारी कमी आई है।

मंदिर बांट रहे हैं पुराने नोट, ले जाइए इस्तेमाल करिए

मंदिरों ने इससे पार पाने के लिए ई-वॉलेट और पेटीएम से दान लेना शुरू कर दिया है। नोटबैन के बाद लगातार घटते चढ़ावे और आयकर विभाग के सख्त तेवरों के चलते मंदिरों ने चढ़ावा लेने के तरीकों में कई बदलाव किए हैं।

इकनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक, मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के प्रशासन ने बताया है कि नोटबैन के बाद रोजाना का चढ़ावा 6 लाख से गिरकर 3.5 लाख पर आ गया है।

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लगातार नुकसान को देखते हुए मंदिर प्रशासन अपने प्रांगण में ही एटीएम खोलने पर विचार कर रहा है। मंदिर प्रशासन इसके लिए बैंकों से संपर्क में भी है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर ने सेवकों को चेक के जरिए वेतन देने का फैसला किया है ताकि कैश को लेकर हो रही दिक्कतें कम हो। श्री सोमनाथ मंदिर में कार्ड, चेक और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए ही दान लिया जा रहा है, लेकिन चढ़ावे में काफी कमी आई है।

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8 नवंबर को पीएम मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद मंदिरों को भी अपने दान को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। देश में कई कारोबारों में पिछले 17-18 दिन में भारी घाटा देखने को मिला है। रुपया भी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है।

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English summary
Demonetisation effect on temples
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