कोर्ट ने रोका राम किशन के परिजनों को 1 करोड़ देने का केजरीवाल का फैसला

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्होंने भूतपूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल को शहीद का दर्जा देते हुए एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की थी और परिवार के एक सदस्य नौकरी देने का वादा किया था।

ram kishan

केजरीवाल सरकार के इस फैसले के विरोध में वकील अवध कौशिक द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है।

पहले भी दायर हुई जनहित याचिका

इससे पहले भी वकील अवध कौशिक ने दो बार केजरीवाल सरकार के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। एक बार तब, जब राजस्थान के किसान गजेन्द्र सिंह कल्याणवंत द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद केजरीवाल सरकार ने उसे शहीद का दर्जा दिया था। आपको बता दें कि गजेन्द्र ने जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की एक रैली के दौरान खुद को फांसी लगा ली थी।

इसके अलावा दूसरी बार तब, जब केजरीवाल सरकार ने मुआवजा देने के मुद्दे पर हैदराबाद यूनिवर्सिटी के दलित छात्र द्वारा जनवरी में आत्महत्या करने के बाद रोहित के भाई को मुआवजे के तौर पर नौकरी देने की घोषणा की थी।

जंतर-मंतर पर दिया था धरना

वन रैंक वन पेंशन को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे एक भूतपूर्व सैनिक राम किशन ग्रेवाल ने कुछ दिन पहले आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइड नोट में ग्रेवाल ने लिखा था कि वह सैनिकों के लिए एक बड़ा कदम उठा रहे हैं।

आपको बता दें कि राम किशन ग्रेवाल हरियाणा के भिवानी जिले में स्थिति बुमला गांव के रहने वाले थे। राम किशन के बेटे ने बताया कि उन्होंने आत्महत्या करने से पहले बताया कि सरकार वन रैंक वन पेंशन को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं कर रही है, इसलिए वह आत्महत्या कर रहे हैं।

जैसे ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राम किशन द्वारा वन रैंक वन पेंशन मुद्दे पर अपनी मांगें न माने जाने के चलते आत्महत्या करने का पता चला, वह तुरंत ही राम किशन के परिवार से मिलने हरियाणा गए थे।

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English summary
delhi high court stays the decision of kejriwal government
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