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Exclusive: जासूसी कांड में कैसे रिपोर्टिेंग के बहाने दस्तावेज चुराते पत्रकार

नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्रालय हो या वित्त मंत्रालय और या फिर टेलीकॉम मंत्रालय। हो सकता है अन्य मंत्रालय भी। ये वो जगह हैं जहां जासूसी का जाल बिछाया गया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जब करवट ली, तो एक-एक कर तार खुलने शुरू हुए और देखते ही देखते 12 लोगों को धर दबोचा। सच पूछिए तो कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। जासूसी कांड के इस जाल में अभी कई दिग्गज फंसने वाले हैं। [आम बजट के दस्तावेज भी लीक]

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अध‍िकारी ने वनइंडिया से खास बातचीत में बताया कि इस जासूसी के पर्दे में कई पत्रकार, बिचौलिये, लॉबिस्ट, बाहुबलि और ढेर सारा पैसा लगा है। ये लोग कैसे काम करते थे इस बात का खुलासा भी अध‍िकारी ने किया।

कॉर्पोरेट और मंत्रालय के बीच संपर्क

पुलिस अध‍िकारी के अनुसार कॉर्पोरेट कंपनियां अपने मिडिल मैन चानी बिचौलियों के माध्यम से मंत्रालय के अध‍िकारियों के आगे चारा डालती हैं। जो अध‍िकारी रिश्वतखोरी का आदि हो गया, वो फिर सरकार के लिये कम कॉर्पोरेट कंपनी के लिये ज्यादा काम करने लगता है।

पत्रकारों की भूमिका

खुफिया विभाग के एक अध‍िकारी ने वनइंडिया से विशेष बातचीत में बताया कि कुछ पत्रकारों ने एनर्जी कंसल्टेंसी फर्म खोली हैं। और इस बिजनेस में फायदा भी बड़ा है, क्योंकि एक तरफ कॉर्पोरेट क्लाइंट जहां से पैसा आता है तो दूसरी तरफ मंत्रालय, जहां वो पैठ बना चुके हैं।

वो पत्रकार जो सालों से इन मंत्रालयों में अपने संपर्क सूत्र बना चुके हैं, वो पेट्रोलियम मंत्रालय बीट को वर्षों से संभालते आये हैं, अब खुद के पोर्टल खोल चला रहे हैं। पोर्टल से कोई कमाई नहीं हो रही है, लेकिन उसके बावजूद उनके पास अथाह पैसा है। यह पैसा वो कमा रहे हैं अध‍िकारियों और कॉर्पोरेट दिग्गजों के बीच में खड़े होकर।

दिखावे के लिये चलते न्यूज पोर्टल

क्राइम ब्रांच के अध‍िकारी ने बताया कि ये वो पत्रकार हैं, जो सिर्फ इसलिये न्यूज पोर्टल चला रहे हैं, ताकि उन्हें मंत्रालय में घुसने दिया जाये। चूंकि ये मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं, इसलिये इनके पास मंत्रालयों में प्रवेश का पास भी होता है।

ये वो पत्रकार हैं, जो प्रेस कार्ड पाने के बाद सिर्फ दिखावे के लिये न्यूज पोर्टल चला रहे हैं। इन न्यूज पोर्टलों पर प्रेस रिलीज के अलावा कुछ नहीं छपता। रीडरश‍िप भी ज्यादा नहीं है। ये पत्रकार मंत्रालयों के अध‍िकारियों को अपने जाल में फंसा कर महत्वपूर्ण दस्तावेज हांसिल करते और उन्हें कॉर्पोरेट कंपनी तक पहुंचा देते।

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