देश में 3 बार हुई है नोटबंदी, पर 1978 में आम जनता को नहीं हुई थी कोई दिक्कत

देश में तीन बार नोटबंदी की गई है, आइए डालते हैं उस वक्त के फैसलों पर नजर, आखिर क्यों 1978 में आम जनता को नहीं हुई थी कोई समस्या

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस वक्त पूरे देश को चकित कर दिया जब उन्होंने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रधानमंत्री के फैसले के बाद लोगों को अपने पुराने नोट बदलने की इजाजत दी गई जिसके बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लाइने लगनी शुरु हो गई।

नए नोट के रंग छोड़ने पर केंद्र सरकार ने किया बड़ा खुलासा

रातो-रात नोटों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला देश में पहले भी हो चुका है। इससे पहले जब देश में दो बार नोटों पर प्रतिबंध लगाया गया तो उस वक्त भी कालाधन के खिलाफ लड़ाई के तौर पर इस फैसले को आगे किया गया था।

500 और 2000 रुपए के नोट के बारे में बड़ा खुलासा किया अधिकारी ने

जनवरी 1946 में बंद हुए थे नोट

आजादी से पहले 100 रुपए से उपर के नोटों पर प्रतिबंध लगाया गया था, उस वक्त यह फैसला लोगों के पास जमा कालाधन वापस लाने के लिए किया गया था। लेकिन उस वक्त के फैसले के बाद तमाम ऐसी घटनाएं हुई जिसकी सरकार को उम्मीद नहीं थी।

 

 

नोटों की कालाबाजारी हुई थी शुरु

नोटबंदी के बाद उस वक्त 60-70 फीसदी तक ही पैसा लोगों को मिल रहा था। लोग कालाधन को सफेद करने का धंधा करने लगे और 500 रुपए के बदले उन्हें 300-350 रुपए दिए जाने लगे।

सरकार ने 500, 1000 और 10000 रुपए के नोटों पर प्रतिबंध लगाते हुए 11 जनवरी 1946 से इन नोटों को अवैध करार दिया था। सरकार के इस फैसले के बाद पुराने नोटों को बदलने के लिए कालाबाजारी शुरु हो गई थी। लोगों के बीच इस तरह की अफवाह भी फैली की 100 रुपए के नोट भी बंद हो सकते हैं। जिसके चलते लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

 

जनवरी 1978 में 1000, 5000 और 10000 रुपए की नोटबंदी

तत्कालीन जनता पार्टी की सरकार ने भी बड़े नोटों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था, इस फैसले के पीछे भी सरकार ने कालाधन और भ्रष्टाचार को अहम वजह बताया था। जिन लोगों के पास ये नोट थे उन्हें 24 जनवरी तक का समय दिया था कि वह इन नोटों को बदल लें।

लेकिन उस वक्त जो बात काफी अहम था वह यह कि उस वक्त 1000 रुपए के नोट आम आदमी के पास मिलना लगभग नामुमकिन था। ऐसे में सरकार के इस फैसले के बाद आम जनता को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा था।

 

नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद

तीसरी बार प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया, लोगों को 30 दिसंबर तक का समय दिया गया कि वह अपने पुराने नोट को बदल लें। मोदी सरकार के इस फैसले का कई विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं। आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस तो सरकार को अपना फैसला वापस लेने के लिए तीन दिन तक का अल्टीमेटम तक दे रही हैं।

नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद

तीसरी बार प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया, लोगों को 30 दिसंबर तक का समय दिया गया कि वह अपने पुराने नोट को बदल लें। मोदी सरकार के इस फैसले का कई विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं। आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस तो सरकार को अपना फैसला वापस लेने के लिए तीन दिन तक का अल्टीमेटम तक दे रही हैं।

क्या है इस बार बड़ी मुश्किल

यहां एक बात यह भी समझन वाली है कि मौजूदा समय में 86 फीसदी नोट 500 और 1000 रुपए के हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले का बाद काफी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि 1978 की तुलना में इस बार बैंकों और एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनों की वजह से लोगों का काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।

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English summary
A complete account of all three demonetisation which took place in India. How in 1978 there was no problem to common man from the demonetisation.
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