बच्चों की पहुंच से पॉर्न दूर करने के लिए केंद्र ने सुझाया यह रास्ता, CBSE करेगी विचार

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नई दिल्ली। छात्रों की अश्लील वेबसाइटों तक पहुंच रोकने के लिए, केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह स्कूल परिसरों में जैमर लगाने का विकल्प तलाश रही है, लेकिन जैसा कि पहले केंद्र की ओर से बताया गया था मशीनों को स्कूल बसों में लगाया जाएगा उससे इनकार कर दिया गया है।

बच्चों की पहुंच से पॉर्न दूर करने के लिए केंद्र ने सुझाया यह रास्ता, CBSE करेगी विचार

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, ए एम खानविलकर और एम. एम. शांतनगुदार के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद और वकील राजेश रंजन ने कहा कि सरकार ने स्कूल परिसर में जैमर लगाने का विकल्प जांचने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कहा था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बेंच से कहा सभी स्कूल बसों में जैमर स्थापित करना संभव नहीं है, लेकिन हमने सीबीएसई को परिसर में जैमर लगाने पर विचार करने को कहा है। सरकार ने पहले ही अदालत से कहा था कि जैमर बसों पर रखे जा सकते हैं लेकिन स्कूल परिसर में नहीं। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि "विद्यालय परिसर के अंदर जैमर स्थापित करना संभव नहीं है क्योंकि स्कूल में जैमर बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटरों तक इंटरनेट एक्सेस को रोकेंगे। हालांकि, इन ड्राइवरों द्वारा सेलफोन पर अश्लील साइटों की पहुंच को रोकने के लिए या बसों में बच्चों के प्रभारी हैं वो जैमर लगा सकते हैं।

सरकार ने कहा कि

"सरकार ने कहा कि इंटरपोल ने बाल यौन दुर्व्यवहार सामग्री को होस्ट करने वाले डोमेन नामों की एक सूची युक्त 'वर्स्ट सूची ' बनाने की जिम्मेदारी ली है। इंटरपोल के साथ सभी इंटरैक्शन के लिए सीबीआई का नोडल प्वाइंट, सूची को एक्सेस करने के लिए सहमत हो गया है और उन साइटों को रोक कर दिया गया है। पिछली ब्लॉकिंग को जून में किया गया है और लगभग 3522 वेबसाइटों को रोका गया है।

अदालत कमलेश वासवानी द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बाल अश्लील साहित्य की वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित वकील विजय पंजवानी ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील वीडियो देखने के लिए लोगों को सज़ा देने के लिए कानून भी तैयार किया जाए।

कई बाल अश्लीलता वेबसाइटों पर चिंता व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञों के साथ बैठने का निर्देश दिया था ताकि ऐसी वेबसाइटों को रोकने के तरीके और साधन पता लगा सकें। अदालत ने कहा था, 'यह भारतीय कानून के तहत अनुमत नहीं है और आपको इसे रोकना होगा।

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English summary
Centre mulls jammers in schools to prevent access of porn sites
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