केन्द्र ने किया था अन्याय, 80 साल की उम्र में मिला न्याय

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मुंबई। केन्द्र सरकार द्वारा बैंक ऑफ इंडिया के रिटायर्ड सीएमडी को पेंशन न दिए जाने के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। केन्द्र सरकार ने कहा था कि जल्दी प्रमोशन दे दिया गया था इसलिए पेंशन नहीं दिया जाएगा।

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस फैसले को खारिज करते हुए कहा है कि बैंक ऑफ इंडिया के रिटायर्ड सीएमडी को 1995 से लेकर अब तक का सारा एरियर और उस पर लगा ब्याज भी मिलेगा।

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इस शख्स का नाम है गजानन दाहोत्रे, जिसकी उम्र अब 80 साल हो चुकी है। उन्होंने 38 साल तक पब्लिक सेक्टर बैंक में काम किया। 'जनहित' में उन्हें 1986 में केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा उन्हें 'बोर्ड लेवल' पर प्रमोट कर दिया गया। उन्हें होलटाइम (Wholetime) डायरेक्टर बना दिया।

इससे पहले उन्होंने 'करिवर लेवल' की पोस्ट पर करीब 9 साल तक काम किया था। उस समय उनकी उम्र 51 साल थी। जब वह रिटायर हुए तो 1995 में सरकार ने कहा कि पेंशन पाने के लिए नए नियमों के हिसाब से उन्हें करियर लेवल पर 10 साल और काम करना था, इसलिए उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती है।

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20 साल के संघर्ष के बाद 27 अक्टूबर को जस्टिस अनूप मोहता के नेतृत्व में बॉम्बे हाईकोर्ट की एक बेंच ने केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के इस फैसले को 'मनमाना' और 'बिना दिमाग लगाए' लिया गया फैसला करार दिया है।

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English summary
bombay high court denied the decision on union to not giving pension
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