गोवा विधानसभा चुनाव में किस दल के क्या हैं हालात, जानिए सबकुछ...

गोवा विधानसभा चुनाव में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। जिसमें बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में है।

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नई दिल्ली। गोवा में इस बार किसकी सरकार बनेगी अब ये फैसला वहां मतदाता करेंगे? फिलहाल यहां विधानसभा चुनाव में सियासी दलों के प्रचार का दौर थम चुका है। 40 सीटों वाली गोवा विधानसभा के लिए 4 फरवरी को मतदान है। यहां इस बार त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। जिसमें सत्ताधारी बीजेपी को कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी से कड़ी टक्कर मिल रही है।

गोवा में क्या आम आदमी पार्टी बिगाड़ेगी बीजेपी और कांग्रेस का खेल

कांग्रेस तो पहले से ही बीजेपी के साथ मुकाबले में रही है लेकिन जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने चुनाव में एंट्री की है उससे कांग्रेस पार्टी को भी कहीं न कहीं प्रभाव जरुर होगा। फिलहाल सभी दलों ने प्रदेश में अपनी पैठ बढ़ाने और वोटरों को अपने हक में करने के लिए जमकर प्रचार किया अब फैसला वोटरों को हाथ में है। इस बीच पढ़िए गोवा का सियासी हाल, आखिर कौन सा दल किस स्थिति में है...

त्रिकोणीय मुकाबले में कौन-किस पर भारी

गोवा विधानसभा चुनाव में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। जिसमें बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में है। प्रदेश में सरकार चला रही बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का सामना तो करना पड़ ही सकता है। वहीं पहली बार गोवा विधानसभा चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी मजबूत दावेदार के तौर पर उभरी है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के आने के मुकाबले में आने के बाद गोवा में कांग्रेस कहीं पिछड़ती नजर आ रही है। हालांकि असल में कामयाबी किसे मिलेगी इसका पता 11 मार्च को चलेगा जब मतगणना शुरू होगी। फिलहाल ओपिनियन पोल में सीधा मुकाबला बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच ही देखा जा रहा है।

क्या है बीजेपी की स्थिति

साल 2012 के गोवा विधानसभा चुनाव में 21 सीटें जीत कर सरकार बनाने वाली बीजेपी के लिए बार सत्ता की राह आसान नहीं दिख रही है। यहां जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपने खिलाफ माहौल तैयार किया है उससे बीजेपी की गणित प्रभावित हो सकता है। बीजेपी भी इस बात को समझ रही है शायद यही वजह है कि पार्टी ने रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को एक बार फिर गोवा वापस भेजने पर विचार कर रही है। इसकी वजह भी है क्योंकि प्रदेश में सीएम उम्मीदवार को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। इसका असर चुनावों पर नहीं हो इसलिए भी बीजेपी इस रणनीति पर विचार कर रही है। वर्तमान में लक्ष्मीकांत पारसेकर गोवा के मुख्यमंत्री हैं। पार्टी को एक खतरा सत्ता विरोधी लहर का भी है। ऐसे में गोवा की सत्ता एक बार फिर हासिल करने की कवायद में जुटी बीजेपी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने विकास और रोजगार में मुख्य मुद्दा बनाया है।

आम आदमी पार्टी का हाल

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सोची-समझी रणनीति के तहत अपने कदम बढ़ा रहे हैं। शायद यही वजह है कि वो छोटे-छोटे राज्यों पर पहले फोकस कर रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी इस बार पंजाब और गोवा के चुनावी जंग में अपनी किस्मत आजमा रही है। दोनों ही राज्यों में खुद अरविंद केजरीवाल कई बार प्रचार के लिए गए हैं। उन्होंने यहा अपने संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया। इस असर भी दिख रहा है। बीजेपी और कांग्रेस से अलग आम आदमी पार्टी की रणनीति बेहद साफ थी। उन्होंने गोवा चुनाव के लिए काफी समय पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। पार्टी ने कैसीनो को मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि अगर सरकार बनी तो कैसीनो को गोवा से बाहर किया जाएगा। आम आदमी पार्टी का सीधा हमला सत्ताधारी बीजेपी पर रहा। उनका आरोप है कि बीजेपी ने गोवा के लिए कुछ भी नहीं किया।

कितनी मजबूत है कांग्रेस की सियासी जमीन

गोवा विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबले में रहने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार क्या कमाल करेगी ये तो चुनाव के बाद पता चलेगा। हालांकि आम आदमी पार्टी के आने से कांग्रेस को नुकसान जरुर हुआ है। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 9 सीटें आई थी। इस बार पार्टी का सीधा हमला बीजेपी पर है। कांग्रेस ने भी अपने चुनावी वादों में कैसीनो का मुद्दा उठाया है। उनका भी ऐलान है कि अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो कैसीनो को गोवा से बाहर किया जाएगा। इसके साथ-साथ कांग्रेस ने नोटबंदी को भी चुनावी मुद्दे तौर पर इस्तेमाल किया है। उनका सीधा आरोप है कि नोटबंदी से पर्यटन प्रभावित हुआ है।

बीजेपी के लिए है एक और मुश्किल

गोवा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी तो बीजेपी को टक्कर दे ही रही हैं। इस बार कई छोटे दल हैं जो सत्ताधारी पार्टी के लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं। इसमें महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी, गोवा सुरक्षा मंच के साथ-साथ शिवसेना शामिल हैं। ये तीनों ही दल ने गोवा चुनाव में गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। हालांकि कोई प्रतिकूल हालात होने की स्थिति को भांपते हुए बीजेपी ने भी कुछ छोटे-छोटे दलों से संपर्क साधा है। साथ ही कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्टी की नजर में हैं।

गोवा में किन मुद्दों पर रहा जोर...

गोवा चुनाव में इस बार सबसे बड़ा मुद्दा कैसीनो का रहा। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने ही वादा किया है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो कैसीनो को गोवा से बाहर किया जाएगा। दूसरी बीजेपी इस मुद्दे से दूर ही रही। बीजेपी का पूरा फोकस विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने पर है। ये बात उनके चुनावी घोषणा पत्र में भी देखने को मिली है। उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने पर खास जोर देने की बात कही है। हालांकि बीजेपी को नुकसान एंटी इनकम्बेंसी से हो सकता है।

साल 2012 के आंकड़ों पर एक नजर

साल 2012 के गोवा विधानसभा चुनाव में 21 सीटें बीजेपी के खाते में आई थी। कांग्रेस के खाते में 9 और बाकी 10 सीटें क्षेत्रीय दलों के खाते में गई थी। 2012 में बीजेपी की जीत के बाद मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि बाद में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया, उनकी जगह लक्ष्मीकांत पारसेकर को मुख्यमंत्री बनाया गया। पर्रिकर वर्तमान में केंद्र की मोदी सरकार में रक्षा मंत्री हैं। हालांकि चुनावी जमीन को मजबूत करने के लिए फिर चर्चा है कि मनोहर पर्रिकर को बीजेपी गोवा वापस भेजने पर विचार कर रही है।

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English summary
an overview of Goa assembly election 2017.
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