नोटबंदी के 50 दिन बाद आखिर क्या हासिल हुआ ?

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के नोटों पर पाबंदी का ऐलान किया था, उस वक्त उन्होंने देश की जनता से 50 दिन तक उनका साथ देने को कहा था, लेकिन नोटबंदी के फैसले के 50 दिन पूरे होने के बाद भी हालात अभी तक सामान्य नहीं हुए हैं। नोटबंदी के फैसले के बाद इसके नियमों में कई बदलाव किए गए, आइए डालते हैं एक नजर इस फैसले के 50 दिन के बाद की जमीनी हकीकत पर।

आतंक और ड्रग इंडस्ट्री खत्म होगी

आतंक और ड्रग इंडस्ट्री खत्म होगी

नोटबंदी के फैसले के पीछे की एक बड़ी वजह जाली नोटों को खत्म करने की कवायद थी, मार्केट में 500 और 1000 के जाली नोट बड़ी संख्या में थे, कहा जा रहा था कि इस फैसले के बाद सभी जाली नोट बाजार से खत्म हो जाएंगे। लेकिन अधिकारियों की मानें तो ये जाली नोट एक फिर से छपेंगे और मुमकिन है कि यह पाकिस्तान में छपने शुरु भी हो गए हों।

आतंक और ड्रग इंडस्ट्री खत्म होगी

आतंक और ड्रग इंडस्ट्री खत्म होगी

नोटबंदी के फैसले के पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि इसके जरिए आतंकियों की आर्थिक मदद को काटा जा सके, लेकिन विश्लेषण के आधार पर इसको परखा जाए तो देश में पनप रहे जिहाद पर रोक लगने की बजाए इसमें बढ़ोत्तरी हुई है। पाकिस्तान से आतंकी संगठन चलाने वालों पर इस फैसले का खास असर नहीं पड़ा है। वहीं ड्रग माफिया इस फैसले से परेशान हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अधिकारियों की मानें तो नोटबंदी के फैसले के बाद ड्रग की खरीद फरोख्त पर भारी कमी आई है।

कालाधन पर असर

कालाधन पर असर

नोटबंदी के फैसले से कालाधन पर रोक को लेकर कई तरह के मतभेद सामने आए हैं, कालाधन रखने वाले छोटे व्यापारी तो इस फैसले के बाद अधिकारियों की पकड़ में आए हैं, लेकिन बड़े व्यापारी अभी भी पकड़ से दूर हैं। इसकी बड़ी वजह है कि बड़े व्यापारी अपना पैसा कैश में नहीं रखते हैं, बल्कि वह अपना पैसा विदेशी बैंकों में रखते हैं, ऐसे में इनपर नोटबंदी के फैसले से कोई असर नहीं पड़ा है। आईएसआई में असिस्टैंट प्रोफेसर अभिरूप सरकार का कहना है कि अगर आपको कालाधन पर रोक लगानी है तो आपको 100 करोड़ रुपए से उपर जिनके पास है उनपर नजर रखनी होगी और उनको पकड़ना होगा।

अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

नोटबंदी के फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हुआ है, 500 और 1000 रुपए पर प्रतिबंध लगने के बाद लोगों को खरीद-फरोख्त करने में भारी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। 500 और 1000 रुपए के कुल नोट 86 फीसदी हैं, ऐसे में नए नोट जिस रफ्तार से लोगों के बीच पहुंच रहे हैं उसके चलते बाजार पर इसका बुरा असर पड़ा है। बाजार से कुल 15 लाख करोड़ रुपए वापस लिया गया है, जबकि लोगों तक कुलल 6.5 लाख करोड़ रुपए पहुंचे हैं। लिहाजा नोटों की मांग और सप्लाई में भारी कमी के चलते देश की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है।

एटीएम अभी भी काम नहीं कर रहे

एटीएम अभी भी काम नहीं कर रहे

जिन एटीएम पर इस बात की जिम्मेदारी थी वह नोटबंदी के फैसले के बाद लोगों की मदद करेंगे वो अभी भी पर्याप्त मात्रा में पैसे देने में विफल हैं। देश के दो लाख एटीएम में से सिर्फ 60 फीसदी ही एटीएम काम कर रहे हैं, जबकि कई एटीएम अभी भी कैलिब्रेट नहीं किए गए हैं, जबकि कई एटीएम में पैसे नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो हालात सही होने में अभी भी एक या दो महीने लग सकते है।

ग्रामीण भारत की हालत खराब

ग्रामीण भारत की हालत खराब

नोटबंदी के फैसले के बाद डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसका असर शहरों में बड़ी संख्या में देखने को मिल रहा है, लेकिन गांवों के हालात अभी भी काफी खराब है। अभी भी बड़ा तबका ऐसा है जिसके पास मोबाइल फोन भी नहीं है, स्मार्ट फोन तो दूर की बात है। अभी भी बड़ी संख्या में गांव में रहने वाले लोगों के पास बैंक का खाता भी नहीं है, लिहाजा इन लोगों को कैश को लेकर काफ दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सैलरी मिलने में मुश्किल

सैलरी मिलने में मुश्किल

8 नवंबर के नोटबंदी के फैसले के बाद पहली बार दिसंबर माह में सैलरी बांटी गई, लेकिन इस फैसले के बाद लोगो को सैलरी तो मिली लेकिन उन्हें कैश नहीं मिली। देश में पांच करोड़ 60 लाख कर्मचारी फैक्ट्रियों में काम करते हैं, जिसमें से सिर्फ 10 फीसदी ही संगठित हैं। ऐसे में सिर्फ 10 फीसदी लोगो को ही ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए सैलरी मिल पाई जबकि बाकियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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English summary
After 50 days of demonetisation situations are still not normal. Reality check of demonetisation aim after 50 days.
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