आखिर कैसे मोदी सरकार की एलपीजी योजना गरीबों के लिए बनी वरदान
केंद्र सरकार की उज्जवला योजना गरीबों के लिए अबतक की सबसे सफल योजना साबित हुई है, जानिए कैसे लोगों को मिल रहा है लाभ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना मौजूदा मोदी सरकार की सबसे लोकप्रिय योजना है। इस योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी, महज एक साल के भीतर इस योजना के जरिए देशभर में बीपीली कार्ड धारक गरीबों 5 करोड़ लोगो को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। तीन साल के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने का मोदी सरकार ने समय निर्धारित किया था। केंद्र सरकार की इस योजना को बेहद की प्रभावपूर्ण तरीके से लागू कराया जा रहा है, जिसका लोगों को सीधा लाभ हो रहा है।


क्यों जरूरी है उज्जवला योजना
देशभर में करोड़ों लोग आज भी चूल्हा, कोयला, मिट्टी के तेल पर खाना बनाने को आज भी मजबूर हैं। उज्जवला योजना को शुरु करने के पीछे केंद्र सरकार ने कई वजह दी हैं। पहली बात कि एलपीजी अन्य ईधन की तुलना में बेहतर ईधन हैं, जो कॉर्बन के उत्सर्जन को कम करता है। इसके बाद दूसरी जो सबसे बड़ी वजह एलपीजी को लोगो तक पहुंचाने की है वह यह कि इसका लकड़ी और अन्य ईधन की वजह से लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है जोकि कई बीमारी की जड़ होती है। धुंए की वजह से महिला और बच्चों को श्वसन संबंधी गंभीर बीमारी होती है। लकड़ी के धुएं से महिलाओं और बच्चों के अंदर 400 सिगरेट के बराबर धुंआ एक बार में जाता है।

हर साल 5 लाख महिलाओं की होती है मौत
WHO की रिपोर्ट के अनुसार हर वर्ष 5 लाख महिलाएं की धुएं में खाना बनाने की वजह से मौत हो जाती है। ऐसे में एलपीजी गैस के बढाने से लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है, इसका लाभ देशभर की महिलाओं को होगा। उज्जवला योजना की खास बात यह है कि एलपीजी कनेक्शन महिलाओं के नाम से ही दी जाती है। ऐसे में गैस पर मिलने वाली सब्सिडी भी महिलाओं के खाते में सीधे जाती है, जो उन्हें आर्थिक मदद भी पहुंचाती है।

कैसा रहा है उज्जवला योजना हाल
इस योजना के शुरु होने के महज एक वर्ष के भीत रही सरकार ने देशभर के 694 जिलों में लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन बांटा है। तकरीबन 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को अभी तक गैस कनेक्शन दिया जा चुका है। पिछले एक वर्ष के भीतर ही देशभर में एलपीजी गैस कनेक्शन धारकों की संख्या में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस योजना के बाद अब हर 10 में से 7 घरों में एलपीजी कनेक्शन पहुंच चुका है।

राजीव गांधी सरकार को भी पीछे छोड़ा
2016-17 के आंकड़ों पर नजर डालें तो 3.25 करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन बांटा गया है जिसमें उज्जवला योजना के अलावा साधारण तौर पर कनेक्शन पाने वाले लोग भी शामिल हैं। यह आंकड़ा अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, महज एक साल के भीतर रिकॉर्ड गैस कनेक्शन बांटा गया है। अभी भी उज्जवला योजना को लगातार लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। माना जा रहा है कि राजीव गांधी की सरकार में शुरु की गई एलपीजी वितरण योजना से कहीं आगे यह उज्जवला योजना लोगों को लाभ पहुंचा रही है।

आर्थिक नुकसान के बिना चल रही है योजना
राजीव गांधी के कार्यकाल में एलपीजी के लिए पैसे सीएसआर और तेल कंपनियों से लिए गए थे, लेकिन मोदी सरकार में लोगों को एलपीजी कनेक्शन पहुंचाने के लिए कुल 8000 करोड़ रुपए का आवंटन बजट से किया गया है। ऐसे में इस योजना का किसी दूसरी सरकार कंपनी पर कोई बोझ नहीं पड़ रहा है। मोदी सरकार ने सब्सिडी छोड़ने के लिए लोगों से जो अपील की थी उसका सरकार को काफी लाभ हुआ।

लोगों ने खुद छोड़ी सब्सिडी
देशभर में पहल योजना के तहत 1.05 करोड़ लोगों ने गैस पर मिलने वाली सब्सिडी को खुद से छोड़ दिया है। सरकार की इस पहल के बाद जिस तरह से लोगों ने इस योजना में अपना रुझान दिखाया उसके चलते सरकार को काफी राजस्व हासिल हुआ जिसका लाभ सीधे तौर पर गरीब लोगों को सब्सिडी के तौर पर दिया गया।

क्या है आगे की योजना
उज्जवला योजना की शुरुआत के बाद पहले वर्ष में यह योजना काफी सफल रही है औऱ बड़ी संख्या में रिकॉर्ड लोगों को इसका लाभ पहुंचा है। लेकिन सरकार इस रफ्तार को आगे भी जारी रखने पर ध्यान दे रही है। सरकार की जो सबसे बड़ी सफलता है वह यह कि लोगों ने एलपीजी कनेक्शन का इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है। हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि कई गरीब घर गैस कनेक्शन होने के बाद भी गैस का इस्तेमाल नहीं करते हैं, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन लोगों को अन्य ईधन के साधन सस्ते मिलते हैं।

बनाए रखनी होगी रफ्तार
ऐसे में सरकार के सामने जो सबसे बड़ा लक्ष्य होगा वह यह कि एलपीजी गैस की कीमतें काबू में रहे और यह आगे भी सस्ती रहे, ताकि लोग एलपीजी गैस का इस्तेमाल करें। डायरेक्ट सब्सिडी योजना के तहत लोगों को सीधे सब्सिडी उनके खाते में पहुंचती रहे। अगर लोग सब्सिडी के रूप में मिलने वाला पैसा बैंक से नहीं निकाल पाते हैं तो लोग इससे दूरी बनाना शुरु कर देंगे। ऐसे में सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह इस योजना को बेहतर ढंग से आगे भी लागू कराए।
(नितिन मेहता, रणनीति कंसल्टिंग एंड रिसर्च के मैनेजिंग पार्टनर हैं, प्रणव गुप्ता एक स्वतंत्र शोधकर्ता हैं।)
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