दिल्ली के ये इलाके हैं रेप और खतरनाक अपराध के अड्डे

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नई दिल्‍ली। दिल्‍ली पुलिस ने बेशक अपना स्‍लोगन 'विद यू, फॉर यू, ऑलवेज' (हमेशा आपके साथ, आपके लिए) से बदल कर 'पीस, सेल्फलेस सर्विस, जस्टिस' (शांति, निस्वार्थ सेवा, न्याय) कर दिया हो लेकिन ''शांति'' कायम कर पाने में हमेशा से नाकाम रही है। एक गैर सरकारी संस्‍था (NGO)की ओर से जो खुलासे हुए हैं वो तो इस बात पर पुख्‍ता मुहर लगा रहे हैं। जी हां प्रजा फाउंडेशन की ओर से किए गए दावे की मानें तो दिल्‍ली में छेड़खानी व चेन स्‍नैचिंग के मामले भले कम हुए लेकिन हत्‍या, बलात्‍कार, दंगे, अपहरण और फिरौती जैसे अपराधों में जबरदस्‍त बढ़ोत्तरी हुई है।

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70 percent of heinous crime recorded only in 2 districts of Delhi

प्रजा फाउंडेशन ने इस बात का खुलासा 'दिल्ली में पुलिस व्यवस्था और कानून एवं व्यवस्था' पर जारी श्वेत पत्र से किया है। इतना ही नहीं एनजीओ की तरफ से दिल्‍ली के उन इलाकों को भी चिन्‍हित किया गया है जो अपराध के गढ़ बन चुके हैं। एनजीओ को आरटीआई के माध्‍यम से जो डाटा मिले हैं उनके मुताबिक दिल्‍ली का नॉर्थ ईस्‍ट जिला अपराध का अड्डा साबित हो रहा है।

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इस इलाके में सबसे ज्‍यादा जघन्‍य अपराधों को अंजाम दिया जाता है। पिछले साल करीब 16,273 आपराधिक मामलों से 40 फीसदी अकेले इस जिले में हुए हैं। इन अपराधों में हत्या, हत्या का प्रयास, रेप, छेड़खानी, दंगा और अपहरण शामिल हैं। दूसरे नंबर पर आउटर जिला है, जहां 30 फीसदी अपराध होते हैं।

नॉर्थ ईस्‍ट जिला और आउटर जिला क्‍यों बना है अड्डा

नॉर्थ ईस्ट जिले में अनधिकृत कॉलोनियां और पुनर्वासित बस्तियां हैं और वहां से उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में आसानी से जाया जा सकता है। इन कॉलोनियों में सीमापुरी, गोकुलपुरी, भजनपुरा, जाफराबाद, शाहदरा, सीलमपुर और खजूरी खास शामिल है। मानसरोवर पार्क जैसा मिडिल क्लास एरिया भी इसमें शामिल है। वहीं आउटर डिस्ट्रिक्ट में हरियाणा की सीमा से लगे मिले जुले हुए ग्रामीण इलाके और अनधिकृत कॉलोनियां हैं।

इनमें नरेला, अलिपुर, बवाना, कंझावला, शाहबाद डेयरी, मंगोलपुर, सुल्तानपुरी और समयपुर बादली शामिल है। इन इलाकों में मिड्ल क्लास एरिया रोहिणी और इस तरह के अन्य छोटे-छोटे क्षेत्र भी आते हैं। पुलिस के मुताबिक, इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में देश के अन्य भागों से प्रवास कर आए लोग रहते हैं। इन क्षेत्रों में अपराध के बड़े कारणों में गरीबी, सुविधाओं का अभाव है, जिस कारण बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। इस कारण वे नशाखोरी और अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं।

रोजाना औसतन 6 रेप, 2 मर्डर और 215 लूट

कानून व्‍यवस्‍था पर चिंता जाहिर करते हुए एनजीओ ने श्‍वेत पत्र में उल्‍लेख किया है कि 2015 में रोजाना औसतन 6 रेप, दो मर्डर और 215 लूट के मामले सामने आए। 2014 के बाद मर्डर के मामलों में 16 फीसदी और रेप के मामलों में 14 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी हुई है। लूटपाट और डकैती के मामले तो 33 फीसदी बढ़ गए है।

बलात्‍कारियों के निशाने पर मासूम बच्‍चे

पुलिस फाइल में दर्ज मुकदमों के मुताबिक रेप के सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हुए हैं। 2015 में कुल 2,338 मामले रेप के दर्ज किए गए। इनमें से 876 मामलों में बच्चों को शिकार बनाया गया। रेप का शिकार हुए 81 बच्चे ऐसे थे जो कि छह साल से कम उम्र के थे, वहीं 146 बच्चे ऐसे थे जो कि 6-12 साल की उम्र के थे।

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English summary
The north-east district is turning out to be the crime underbelly of Delhi. This area reported the largest number of heinous crimes among the 11 police districts about 40 per cent of 16, 273 last year.
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