कोटखाई गैंगरेप-मर्डर केस में अहम किरदार नेपाली की लॉकअप क्यों की गई हत्या?

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व मर्डर मामले में सबूतों के एक अहम किरदार को मिटा दिया गया। यह ऐसे समय हुआ है जब चंद घंटों बाद ही हिमाचल हाईकोर्ट इस अहम मामले की सीबीआई से जांच कराने को लेकर सुनवाई करने वाला था।

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हत्या के आरोपी राजू पर धारा 302 के तहत मुकदमा

हत्या के आरोपी राजू पर धारा 302 के तहत मुकदमा

इस बीच शिमला के एसपी डी डब्ल्यू नेगी ने घटना के बारे में अपनी फेस बुक पोस्ट में लिखा है कि मध्यरात्रि को इस मामले के संदिग्ध आरोपी राजू ने दसरे संदिग्ध आरोपी सूरज की कोटखाई पुलिस थाना के लॉकअप में हत्या कर दी। सूरज को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में कोटखाई थाना में हत्यारे राजू के खिलाफ एफआईआर धारा 302 के तहत दर्ज कर ली गई है। इस मामले की ज्यूडिशियल मेजिस्ट्रेट जांच करेंगे। वहीं साउदर्न रेंज के आईजी घटनास्थल पर रवाना हो गये हैं। कोटखाई थाना का सारा स्टाफ लाइन हाजिर कर दिया गया है ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो। बताया गया है कि प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार की ओर से सीबीआई से जांच कराने के मामले की सुनवाई होगी।

नेपाली आरोपी की हत्या पर पुलिस की कहानी

नेपाली आरोपी की हत्या पर पुलिस की कहानी

कोटखाई थाना में जिस तरीके से नेपाली मूल के आरोपी सूरत सिंह की हत्या हुई है वह आसानी से किसी के भी गले उतरने वाली नहीं है। दरअसल इस मामले में एसआईटी जांच के दौरान पिकअप चालक राजेंद्र सिंह उर्फ राजू (32) जो कि मंडी के जंजैहली का रहने वाला है , सुभाष सिंह बिष्ट (42) उत्तराखंड और दीपक उर्फ दीपू (38) पौड़ी गढ़वाल के अलावा सूरत सिंह (29) नेपाल, लोकजन उर्फ छोटू (19) नेपाल के साथ आशीष चौहान को गिरफ्तार किया गया था। आशीष चौहान ज्यूडिशियल कस्टडी में है तो कोटखाई थाना में जीप चालक राजेंद्र सिंह उर्फ राजू व सूरत सिंह बीती रात एक ही सेल में थे।

अगर पुलिस की कहानी पर यकीन करें तो बताया जा रहा है कि रात करीब 12 बजे के बाद राजू व सूरत सिंह के बीच आपस में लड़ाई-झगड़ा हुआ व मारपीट के दौरान सूरत सिंह की मौत हो गई लेकिन पुलिस की इस कहानी पर जब सवाल उठ रहे हैं तो पुलिस के ही अफसर इस कहानी को मजबूत करने के लिये ठोस सबूत देने से आनाकानी कर मामले की जांच करने का बहाना बना रहे हैं जिससे संदेह और मजबूत हो रहा है व घटना पर कई सवाल उठ रहे हैं।

सीबीआई जांच से ठीक पहले हुआ मर्डर

सीबीआई जांच से ठीक पहले हुआ मर्डर

मारा गया वही नेपाली है जो शिमला में पोस्टमॉर्टम के लिये लाये गये आरोपियों की मेडिकल जांच के दौरान जब एक आरोपी पर महिला ने चप्पल दे मारी थी तो वह वहां चुपचाप बैठा रहा था। शुरू से ही इलाके के लोग इस मामले में पुलिस जांच के दौरान फंसे दोनों नेपालियों व गढ़वालियों को आरोपी मानने से इनकार कर रहे थे। इसको लेकर शिमला में लगातार धरने प्रर्दशन हो रहे हैं। निस्संदेह मामले में यह आरोपी जिसकी कोटखाई थाना में हत्या हुई है, अहम किरदार था। उसकी हत्या उस समय हुई जब प्रदेश हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई होनी थी व अदालत की ओर से मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश आने ही वाला था।

भाजपा ने लगाए सबूत मिटाने के आरोप

भाजपा ने लगाए सबूत मिटाने के आरोप

कहा जा रहा है कि सीबीआई की जांच के दौरान सूरत सिंह कहीं न कहीं अपनी जुबान खोल सकता था। इसका डर परदे के पीछे छिपे असल अपराधियों को था। सूरत नेपाली को जनता में मिल रहे सर्मथन से भी यह लोग परेशान थे। इस हत्या के बाद भाजपा नेता अरुण धूमल ने फेसबुक पर लिखा कि सारे सबूत मिटाकर मामले को सीबीआई को हस्तांतरित कर दिया जाएगा ताकि सबूतों के अभाव में निकम्मा चालान पेश हो जो 90 दिन में कोर्ट में पेश करना पड़ेगा सीबीआई को। आरोपी झूठे सच्चे जो भी हैं, छूट जाएंगे और फिर मुख्यमंत्री कहेंगे मेरे कुछ लेना देना नहीं, यह तो सीबीआई की जांच थी और दोष मढेंगे केंद्र सरकार पर। सारे घटनाक्रम से हर कोई स्तब्ध है।

जहूर जैदी की छुट्टी होने के बाद एसआईटी में एएसपी भजन देव नेगी के अलावा डीएसपी मनोज जोशी, रतन नेगी, एसएचओ बाबू राम ढली, धर्म सिंह छोटा शिमला, राजेंद्र ठियोग एएसआई रजनीश समेत कई अधिकारी शामिल रहे हैं, लेकिन सब लाजवाब हैं कि लॉकअप में हत्या कैसे हो गई। इस मामले में कोटखाई थाने में स्कूली छात्रा से गैंगरेप व हत्या के मामले में धारा 302 और 376 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा-4 में दर्ज है।

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English summary
Why Nepali accused of Kotkhai gang rape murdered in police lock up.
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