रामपुर के अंतिम राजा से हिमाचल के मुख्यमंत्री तक, वीरभद्र सिंह के 84 सालों का सफर

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आज 84 साल के हो गये। शिमला में उनके निजी आवास हॉलीलॉज में मंत्रिमंडल के सहयोगी, पार्टी कार्यकर्ता,अधिकारी, सभी बधाई देने पहुंच रहे हैं। पूर्व रामपुर रियासत के अंतिम राजा वीरभद्र सिंह का जन्म रामपुर रियासत में 23 जून, 1934 को हुआ था। प्रदेश की राजनीति के दिग्गज वीरभद्र सिंह को राजनीति में ही पांच दशक से अधिक हो गए हैं। 1962 में राजनीति में कदम रखने वाले वीरभद्र सिंह को राजनिति में भी 55 वर्ष हो गए हैं।

1962 में कांग्रेस में शामिल हुए

1962 में कांग्रेस में शामिल हुए

रामपुर रियासत के राजखानदान से ताल्लुक रखने वाले वीरभद्र सिंह हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र सिंह ने 30 जनवरी, 1962 को दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी और इससे दो दिन पहले ही उन्हें कांग्रेस ने महासू से अपना संसदीय उम्मीदवार घोषित कर दिया था। वीरभद्र सिंह दावा करते हैं कि उन्होंने अपने 55 साल के लम्बे राजनीतिक जीवन में एक घंटे के लिए भी कांग्रेस नहीं छोड़ी और न ही उन्हें कभी ऐसा करने का विचार उनके मन में आया।

इंदिरा गांधी ने बनाया केंद्रीय मंत्री

इंदिरा गांधी ने बनाया केंद्रीय मंत्री

वीरभद्र सिंह मानते हैं कि कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा का ही प्रतिफल है कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के साथ ही तीन बार केंद्रीय मंत्री बनने का मौका मिला। बकौल उनके आज लगभग सभी राजनीतिक दलों में आया राम, गया राम का अत्यधिक चलन हो गया है लेकिन उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि उन्हें कांग्रेस में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ मौकों पर पार्टी नेताओं से मतभेद जरूर हुए लेकिन कभी भी किसी से मनभेद नहीं हुआ। यही कारण है कि वह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री बने।

नहीं छुटा सत्ता का मोह

नहीं छुटा सत्ता का मोह

बढ़ती उम्र और अदालती मामलों में जूझने के बावजूद सत्ता से वीरभद्र सिंह का मोह अभी तक छूटा नहीं है। यही वजह है कि वह प्रदेश में इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये अपने मन माफिक माहौल तैयार करने में जुटे हैं। और पार्टी आलाकमान पर दवाब बना रहे हैं कि उन्हें चुनावों के लिये अमरेन्द्र सिंह की तरह खुला हाथ दिया जाये लेकिन अभी तक उन्हें आलाकमान से सकारात्मक संदेश नहीं मिल पाया है। यही वजह है कि वीरभद्र सिंह इन दिनों भाजपा पर कम कांग्रेस पर अधिक हल्ला बोलते हैं। यह उनका अपना स्टाईल है। वीरभद्र सिंह को मिडिया में बने रहने का हुनर आता है। वह मिडिया मेनेजमेंट के नुस्खे के साथ अपने विरोधियों पर हमला बोलते हैं।

हिमाचल की जनता का है कर्ज

हिमाचल की जनता का है कर्ज

वीरभद्र सिंह मानते हैं कि प्रदेश की जनता ने उन्हें बहुत प्यार दिया है और अगर वह पांच जन्म भी लेते हैं तो भी इस प्यार का ऋण नहीं चुका सकते। सक्रिय राजनीति में वीरभद्र सिंह ने इस लम्बे सफल राजनीतिक जीवन के लिए कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा और प्रदेश की जनता के स्नेह और प्यार का नतीजा बताया है। दरअसल इसी बहाने उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह सातवीं बार भी सीएम बनने को तैयार हैं।

आसानी से हथियार नहीं डालते वीरभद्र सिंह?

आसानी से हथियार नहीं डालते वीरभद्र सिंह?

वीरभद्र सिंह की अपनी एक शख्सियत है। हिमाचल प्रदेश में वाई एस परमार के बाद वही एक ऐसे नेता हैं जिन्हें जनता का पूरा प्यार व समर्थन मिलता रहा है। हालांकि वह 84 साल के हो गये हैं, लेकिन आज भी उनमें वही ऊर्जा बरकार है जो शायद इस उम्र के शख्स में न हो। भले ही उनके खिलाफ चल रहे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उनके विरोधी उन्हें घेरने का प्रयास कर रहे हों। लेकिन उन्होंने आसानी से अपने हथियार नहीं डालने की जिद्द पकड़ रखी है। कांग्रेस हालांकि चुनावों के लिये तैयारियों में जुटी है। लेकिन क्या वीरभद्र सिंह को अलग थलग कर सत्ता में वापिसी संभव है? यह एक बड़ा सवाल है। प्रदेश के मौजूदा राजनैतिक हालात जो हैं। उससे साफ कहा जा सकता है कि भाजपा के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा उठाने में मौजूदा कांग्रेस संगठन पूरी तरह नाकाम रहा है।

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English summary
Himachal Pradesh CM Virbhadra Singh celebrates his birthday, as he turned 84
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