कोटखाई गैंगरेप: छात्रा का नाम उजागर कर वीरभद्र सरकार ने किया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के कोटखाई में स्कूली छात्रा से गैंगरेप मर्डर मामले में पुलिस हिरासत में एक आरोपी की मौत के मामले को निपटने में शुरू से ही संवेदनहीन रही वीरभद्र सरकार अब एक नये विवाद में फंस गई है। सरकार ने जिस तरीके से स्कूली छात्रा की याद में उसके स्कूल को अपग्रेड करते हुये उसका नाम उजागर किया है, वह सुप्रीम कोर्ट की उस गाइडलाइन का सीधा उल्लंघन है जिसमें बलात्कार की शिकार का नाम उजागर करने की मनाही है।

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छात्रा के नाम पर स्कूल का नाम और अपग्रेडेशन

छात्रा के नाम पर स्कूल का नाम और अपग्रेडेशन

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मद्देनजर सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के एक अंश को वन इंडिया भी प्रकाशित नहीं कर रहा है जिसमें छात्रा का नाम लिखा है। सरकार का यह कदम हैरानी भरा है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कोटखाई गैंगरेप-मर्डर की शिकार हुई छात्रा के स्कूल को अपग्रेड करने के साथ उसके असली नाम से मेमोरियल स्कूल खोलने की घोषणा की गई है। यह घोषणा अब विवादों में घिर गई है।

प्रदेश सरकार ने कोटखाई में रेप व मर्डर की शिकार छात्रा के स्कूल जी.एम.एस. धार तरपुणू (टाली) को वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का दर्जा देकर अपग्रेड कर दिया है। सरकार ने स्कूल के अपग्रेड व इसमें शिक्षकों के 9 पद सृजित करने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। इस स्कूल का नाम स्कूली छात्रा के असली नाम मैमोरियल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धार तरपुणू रखा गया है। इस धार तरपुणू टाली मिडिल स्कूल से ही स्कूली छात्रा ने आठवीं तक की पढ़ाई की थी। सरकार ने नियमों में छूट देकर इस स्कूल को सीधा वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का दर्जा दे दिया है। इसी वर्ष इस स्कूल में कक्षाएं शुरू की जाएंगी। इसके लिए प्रधानाचार्य का एक पद, पी.जी.टी. के 5 पद, टी.जी.टी. आर्टस व मेडीकल का एक-एक पद और एक पद भाषा अध्यापक का सृजित कर दिया गया है। इन पदों को भी तुरंत भरा जाएगा।

'बेटी ने पढ़ाई करने की कीमत जान देकर चुकाई

'बेटी ने पढ़ाई करने की कीमत जान देकर चुकाई"

स्कूली छात्रा के रेप-मर्डर केस के बाद उसके पिता ने कहा था कि स्कूली छात्रा पढ़ना चाहती थी लेकिन गांव में स्कूल नहीं था तो वह पढ़ने के लिए दूर के स्कूल चली गई जहां उसे अपनी जान देकर पढ़ाई की कीमत चुकानी पड़ी। उसका छोटा भाई भी घटना के बाद से स्कूल नहीं जा पा रहा है। गांव की अन्य छात्राएं भी उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने के लिए मजबूर थीं लेकिन अब गांव के स्कूल का अपग्रेडेशन होने के बाद छात्राएं इसी स्कूल में आगे की पढ़ाई कर पाएंगी। नियमों के मुताबिक वरिष्ठ माध्यमिक का दर्जा उस स्कूल को दिया जाता है जहां मैट्रिक में छात्रों की संख्या 60 या इससे अधिक हो। इसी तरह जहां आठवीं कक्षा में 40 या इससे ज्यादा छात्र हों, उस स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा दिया जाता है। इस मामले में सरकार ने नियमों में छूट देकर मिडिल स्कूल को वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल का दर्जा दिया है।

सरकार की इस घोषणा पर उठे सवाल

सरकार की इस घोषणा पर उठे सवाल

अब सवाल उठ रहा है कि प्रदेश सरकार यदि पहले ही स्कूली छात्रा के स्कूल (धार तरपुणू) को अपग्रेड कर देती तो उसके साथ ऐसा जघन्य अपराध घटित न होता। उसे आगे की पढ़ाई के लिए डेढ़ घंटा जंगल के रास्ते से पैदल चल कर न जाना पड़ता बल्कि वह अपने गांव के स्कूल में ही बाहरवीं तक की पढ़ाई कर पाती। वहीं सवाल यह भी है कि सरकार आखिर कैसे कानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज कर छात्रा का नाम उजागर कर सकती है।

इस बीच नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने सरकार के मंसूबों पर सवाल उठाया है व कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक छात्रा का नाम उजागर करना गैरकानूनी है। सरकार ने स्कूल को उसके नाम पर खोल कर नियमों को तोड़ा है। सरकार तुरंत इस अधिसूचना को वापिस ले नहीं तो भाजपा सुप्रीम कोर्ट जायेगी। सोशल मिडिया में भी सरकार के इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाये जा रहे हैं। शिमला के राकेश शर्मा अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखते हैं कि ऐतिहासिक फैसला: दरियादिली की अनोखी मिसाल: गुड़िया के गांव का स्कूल मिडिल से हाई नहीं बल्कि सीधा वरिष्ठ माध्यमिक अपग्रेड किया, गुड़िया के नाम से होगा नामकरण: बरसों से ऐसी ही ठगी-ठोरी से ही लोगों की भावनाओं से सत्ता चमकाई गई है, बिन विजन के ठेले को धकेलते आए हैं।

छात्रा की फोटो इस्तेमाल करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई!

छात्रा की फोटो इस्तेमाल करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई!

इस बीच राज्य बाल संरक्षण आयोग ने रेप व मर्डर की शिकार कोटखाई की स्कूली छात्रा की फोटो का सोशल मीडिया और प्रदर्शनों में इस्तेमाल रोकने को कहा है। स्कूली छात्रा से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश है। संवेदनाओं में बहकर स्कूली छात्रा की फोटो का सोशल मीडिया और प्रदर्शनों में खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पॉक्सो एक्ट-23 (प्रिवेंशन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ओफेंसिज) और जेजे जुवेनायल जस्टिस एक्ट के तहत कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में सोशल मीडिया, प्रदर्शन और राजनीतिक दलों के खिलाफ राज्य बाल संरक्षण आयोग कार्रवाई करने जा रहा है। स्कूली छात्रा के फोटो का इस्तेमाल करने वाले यूजर और संगठनों पर आयोग स्वयं नजर रख रहा है।

आयोग ने एसपी शिमला को भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग अब इस मामले पर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। कानूनन किसी भी दुष्कर्म की शिकार छात्रा या उसके परिजनों के फोटो का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया सकता है। बावजूद इसके प्रदर्शनों और सोशल मीडिया में गुड़िया को न्याय दिलाने के लिए चल रहे आंदोलनों, फेसबुक और वाट्सएप पर फोटो का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष किरण धांटा ने ऐसे सभी संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स से किसी भी सूरत में गुड़िया की फोटो का इस्तेमाल न करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह कानून का उल्लंघन है। फोटो का इस्तेमाल करने और इसको बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष और राज्य जुवेनाइल जस्टिस के सदस्य आशुतोष ने आम जनता, राजनीतिक दलों और संगठनों से अपील की है कि स्कूली छात्रा की फोटो का इस्तेमाल प्रदर्शन और सोशल मीडिया में न करें। यदि किसी ने किया है तो उसे तुरंत सोशल मीडिया से हटा दें। यह कानूनन अपराध है। ऐसा करने वालों के विरुद्ध आयोग कानूनी कार्रवाई करेगा। कोटखाई में स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या से पनपे आक्रोश के चलते प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर लगातार उसकी फोटो का इस्तेमाल हो रहा है।

छह महीने से दो साल की सजा का है प्रावधान

जुवेनायल जस्टिस बोर्ड के सदस्य आशुतोष ने कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 23 केतहत दुष्कर्म पीडि़ता या उसके परिजनों की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। इसमें छह माह तक की सजा हो सकती है। जुवेनायल जस्टिस एक्ट के तहत ऐसा करने पर छह माह से दो साल तक सजा का प्रावधान है।

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English summary
Himachal govt revealed the name of Kotkhai gang rape victim.
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