देश की आजादी की कहानियां कहती हैं ये दुर्लभ तस्वीरें, आप भी देखिए

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दिल्ली। भारत की आजादी की पहली बड़ी लड़ाई 1857 में हुई थी जिसे सिपाही विद्रोह के नाम से जाना जाता है। इस विद्रोह में कई लोगों की जान गई। आखिर में ब्रिटिश हुकूमत इसे दबाने में सफल रही।

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1857 से लेकर 1947 के बीच देश की स्वतंत्रता के लिए हमारे देश के लोगों ने कई तरह से अंग्रेजों का मुकाबला किया। एक तरफ गांधी के नेतृत्व में अहिंसात्मक आंदोलन चला तो दूसरी तरफ भगत सिंह से लेकर कई क्रांतिकारियों ने अपना अलग रास्ता चुना। इनमें से कईयों ने देश के लिए हंसते-हंसते खुद को बलिदान कर दिया।

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भारत जब आजाद हुआ तो विभाजन का शिकार हुआ और देश, भारत और पाकिस्तान, दो भागों में बंट गया। आइए देखते हैं 1857 से लेकर 1947 के बीच के भारत की कुछ ऐसी ही दुर्लभ तस्वीरें जो आजादी की कहानी को बयां करती हैं।

सिकंदर बाग, लखनऊ

सिकंदर बाग, लखनऊ

1857 की खूनी लड़ाई को दर्शाती एक तस्वीर। इसे फेलिस बीटो ने खींचा था। नवंबर 1857 में सिकंदर बाग में अंग्रेजों और विद्रोहियों की बीच लड़ाई हुई। लगभग 2000 विद्रोही इस लड़ाई में मारे गए जिनकी लाशों को यूं ही छोड़ दिया गया। तस्वीर में महल के बाहर बिखरी हड्डियां दिखाई दे रही हैं।

फोटो - फेलिस बीटो

बिरसा मुंडा - आदिवासियों का लोकनायक

बिरसा मुंडा - आदिवासियों का लोकनायक

यह तस्वीर 1900 की है। बिहार के छोटा नागपुर में आदिवासियों को संगठित कर क्रांति का बिगुल बजाने वाले बिरसा मुंडा के अनुयायियों को पुलिस जेल ले जाती हुई।

गोपाल कृष्ण गोखले

गोपाल कृष्ण गोखले

गोपाल कृष्ण गोखले ने 1889 में कांग्रेस ज्वाइन किया और देश की आजादी के लिए नरमपंथ का रास्ता अपनाया। बाद में कांग्रेस के नरमपंथी धड़े के नेता बने और गरमपंथी नेता बाल गंगाधर तिलक से उनका विरोध रहा। महात्मा गांधी उनको अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।

लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल

लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल

लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल, ये तीनों कांग्रेस में गरम दल के नेता थे।

जर्मनी में भारतीय झंडे का प्रदर्शन

जर्मनी में भारतीय झंडे का प्रदर्शन

स्वतंत्रता सेनानी मैडम भीकाजी कामा ने 1905 में अपने सहयोगियों - सरदार सिंह राणा, विनायक दामोदर सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा- के साथ मिलकर भारत के राष्ट्रीय ध्वज का डिजाइन तैयार किया था। 1907 में इसे पेरिस में मैडम कामा ने फहराया। इस झंडे को उसी साल जर्मनी के इंटरनेशनल सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शित किया गया।

खुदीराम बोस

खुदीराम बोस

मुजफ्फरपुर में जज किंग्सफोर्ड की बग्घी पर बम फेंकने की योजना को 18 साल के युवक खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने अंजाम दिया था। इस घटना में किंग्सफोर्ड बच गया। जिस बग्घी पर बम फेंका गया उसमें दो यूरोपियन महिला थी। घटना के बाद प्रफुल्ल चाकी ने पुलिस से घिरने पर खुद को गोली मार ली। 11 अगस्त 1908 को खुदीराम बोस को फांसी दी गई।

धींगरा और जतिन

धींगरा और जतिन

1 जुलाई 1909 को मदनलाला धींगरा ने इंग्लैंड में अंग्रेज अधिकारी सर हट कर्जन वाइली को गोली मार दी।

दूसरी तस्वीर में महान क्रांतिकारी और युगांतर पार्टी के नेता बाघा जतिन।

चम्पारन सत्याग्रह 1917-18

चम्पारन सत्याग्रह 1917-18

महात्मा गांधी के नेतृत्व में बिहार के चम्पारण में किसानों ने नील की खेती करवाने वाले अंग्रेज बगान मालिको के खिलाफ सत्याग्रह किया।

रवींद्रनाथ टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोर

1919 में जालियांवाला बाग हत्याकांड के बाद महाकवि रविंद्रनाथ टैगोर ने भारतीयों पर हो रहे अत्याचार का विरोध करते हुए ब्रिटिश सम्राट के द्वारा दिया गया नाइटहुड का सम्मान लौटा दिया था। उसकी चिट्ठी तस्वीर में है।

द ट्रिब्यून अखबार

द ट्रिब्यून अखबार

लाहौर से छपे अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून की 25 मार्च 1931 की हेडलाइन- भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फांसी। यह एक दुर्लभ दस्तावेज है।

इसी तस्वीर में एक कमरा भी है जो दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस रीगल लॉज का है जिसमें भगत सिंह को ट्रायल के दौरान एक दिन के लिए रखा गया था।

भगत सिंह की एक दुर्लभ तस्वीर

भगत सिंह की एक दुर्लभ तस्वीर

1927 में लाहौर रेलवे पुलिस स्टेशन में गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह। लाहौर दशहरा बम कांड के सिलसिले में सीआईडी डीएसपी गोपाल सिंह पन्नू उनसे पूछताछ कर रहे हैं।

इसी फोटो में देखिए वह कलम जिससे जज ने भगत सिंह का फांसीनामा लिखा।

राम प्रसाद बिस्मिल-अशफाकउल्ला खां

राम प्रसाद बिस्मिल-अशफाकउल्ला खां

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल ने साथियों के साथ 9 अगस्त 1925 को काकोरी में ट्रेन लूट की योजना को अंजाम दिया था। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए हथियार खरीदने के लिए पैसों की जरूरत थी। क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला। राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा मिली।

काकोरी कांड में चंद्रशेखर आजाद भी शामिल थे। चंद्रशेखर आजाद 27 फरवरी 1931 के इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए।

जतिन दास

जतिन दास

भारत के महान क्रांतिकारी जतींद्र नाथ दास, जतिन दास के नाम से भी जाने जाते हैं। जतिन लाहौर जेल में 63 दिन के भूख हड़ताल के बाद 13 सितंबर 1929 को देश के लिए शहीद हो गए।

साइमन गो बैक

साइमन गो बैक

1928 में साइमन कमीशन का देशभर में व्यापक विरोध हुआ। 'साइमन गो बैक' इसका नारा था।

दांडी मार्च - 12 मार्च 1930

दांडी मार्च - 12 मार्च 1930

महात्मा गांधी के दांडी मार्च को नमक सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है। साबरमती आश्रम से दांडी तक लंबा रास्ता गांधी की अगुवाई में लोगों ने पैदल तय किया था।

नमक कानून तोड़ते गांधी

नमक कानून तोड़ते गांधी

साबरमती आश्रम से दांडी पहुंचने में 24 दिन लगे। लगभग 390 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद दांडी पहुंचकर गांधी ने नमक कानून को तोड़ा।

विदेशी चीजों का बहिष्कार

विदेशी चीजों का बहिष्कार

भारत की आजादी की लड़ाई में शरीक हो रहे नौजवान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी। 1930 के बॉम्बे की गलियों में विदेशी चीजों पर बहिष्कार करने का पोस्टर लगाते हुए।

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक

1942 के ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक में महात्मा गांधी और सरोजनी नायडू।

1942 का भारत

1942 का भारत

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की कुछ तस्वीरें।

खान अब्दुल गफ्फार खान

खान अब्दुल गफ्फार खान

खान अब्दुल गफ्फार खान महात्मा गांधी के करीबी थे। वह महान स्वतंत्रता सेनानी थे। सीमा प्रांत और बलूचिस्तान में अहिंसात्मक आंदोलन चलाने के लिए उनको सीमान्त गांधी नाम दिया गया। वह बच्चा खां और बादशाह खान के नाम से भी जाने जाते थे।

सुभाष चंद्र बोस

सुभाष चंद्र बोस

देश की आजादी के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सुप्रीम कमांडर के तौर पर 1943 में सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की थी। तस्वीर में सुभाष चंद्र बोस का यूनिफॉर्म है।

इसी तस्वीर में वह कार भी है जिससे 1941 में वह कलकत्ता के अपने घर से अंग्रेजों की नजरबंदी तोड़कर फरार होने में सफल हुए थे।

लक्ष्मी सहगल

लक्ष्मी सहगल

सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज में लक्ष्मी सहगल, रानी लक्ष्मी रेजिमेंट की कमांडर थीं।

युसुफ मेहराली-जय प्रकाश नारायण

युसुफ मेहराली-जय प्रकाश नारायण

1946- स्वतंत्रता सेनानी युसुफ मेहराली के साथ जय प्रकाश नारायण। ये दोनों समाजवादी नेता थे।

गांधी संग नेहरु, पटेल

गांधी संग नेहरु, पटेल

1946 में जवाहर लाल नेहरु और सरदार बल्लभ भाई पटेल के संग महात्मा गांधी।

फोटो - लाइफ मैगजीन

विभाजन: पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन

विभाजन: पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन

भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान बना। भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत की तरफ लोगों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। लोगों को भारत से पाकिस्तान ले जाने वाली ट्रेन।

फोटो - MARGARET BOURKE-WHITE

देश का विभाजन

देश का विभाजन

भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद लोग घर-बार छोड़ पलायन करने पर मजबूर हुए। इस त्रासदी में लाखों लोग मारे गए।

फोटो सोर्स - लाइफ मैगजीन

पाकिस्तान जाने की तैयारी

पाकिस्तान जाने की तैयारी

भारत पाक विभाजन के बाद दिल्ली के पुराने किले में लगे कैंप के मुस्लिम पाकिस्तान जाने की तैयारी में।

फोटो सोर्स - लाइफ मैगजीन

रिफ्यूजी कैंप में पानी के लिए लाइन

रिफ्यूजी कैंप में पानी के लिए लाइन

1947, नई दिल्ली - विभाजन के बाद दिल्ली पहुंचे शरणार्थी पानी के लिए लाइन में।

संविधान सभा में नेहरु

संविधान सभा में नेहरु

15 अगस्त 1947 को संविधान सभा में पंडित जवाहर लाल नेहरु देश की आजादी की घोषणा करते हुए।

फोटो सोर्स - University of Hawaii at Manoa Library

15 अगस्त 1947 - न्यूयार्क टाइम्स का पहला पन्ना

15 अगस्त 1947 - न्यूयार्क टाइम्स का पहला पन्ना

न्यूयार्क टाइम्स ने भारत और पाकिस्तान का नक्शा छापते हुए लिखा - विश्व के पटल पर दो नए देश प्रकट हुए (टू इंडियन नेशंस इमर्ज ऑन वर्ल्ड सीन।)

15 अगस्त 1947 - आजादी का जश्न

15 अगस्त 1947 - आजादी का जश्न

लाल किले पर पहली आजादी का जश्न मनाने आई भीड़।

लाल किले पर पहली आजादी

लाल किले पर पहली आजादी

पहली आजादी के दिन लाल किले पर उमड़ी भीड़।

फोटो सोर्स - ट्विटर @indiahistorypic

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English summary
Rare photos of Indian freedom struggle that tells the story of major episode in history of India.
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