आजम खान: यूपी के कद्दावर नेता का राजनीतिक करियर

निजी मुलाकातों में साफगोई और नरमदिली से पेश आने वाला यह शख्स जब राजनीतिक मंच से तकरीर कर रहा होता है तो लोगों को किसी नए विवाद के पैदा होने की संभावना पहले से नजर आने लगती है।

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नई दिल्‍ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता और अकसर विवादों में रहने वाले आजम खान वर्तमान में यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वो मायावती के शासनकाल में विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। आजम खान को विवादित नेता लिखना इसलिए भी सही है क्‍योंकि निजी मुलाकातों में साफगोई और नरमदिली से पेश आने वाला यह शख्स जब राजनीतिक मंच से तकरीर कर रहा होता है तो लोगों को किसी नए विवाद के पैदा होने की संभावना पहले से नजर आने लगती है।

आजम खान: यूपी के कद्दावर नेता का राजनीतिक करियर

आजम खान को उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों का सबसे बड़ा हितैषी माना जाता है और वो इसी के बल पर जमकर सियासत भी करते हैं। और उनके विवादित बयानों से वो इस चीज को जाहिर भी करते रहे हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं 68 साल के 'युवा तुर्क' आजम खान की पूरी कहानी।

रामपुर में हुआ आजम खां का जन्‍म

आजम खान का जन्‍म उत्तरप्रदेश के रामपुर में 14 अगस्‍त 1948 को हुआ था, उनकी प्रारंभिक शिक्षा रामपुर के बंकर स्‍कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने रामपुर के सुंदरलाल इंटर कॉलेज से स्‍नातक और फिर 1974 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले ही आजम खान का निकाह ताज़ीन फातिमा हुआ, उनके दो बेटे हैं।

आजम खान का राजनीतिक करियर

आजम खान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय में ही विद्यार्थी संघ के सचिव रहकर की। इन्‍होंने 1976 में जनता पार्टी ज्‍वॉइन कर ली। इसके बाद उन्होंने जनता पार्टी में ही रहकर जिला स्‍तर की राजनीति की। इसके बाद लोकदल ज्‍वॉइन कर लिया लेकिन कुछ ही महीनों में पुन: जनता दल में आ गए।
जनता पार्टी में विखराव व अस्थिरता के चलते 1980 से 1992 के बीच उन्होंने कई बार पार्टियां बदलीं। जनता दल, लोकदल, जनता दल (सेक्युलर) में कुछ-कुछ समय रहने के बाद अंतत: समाजवादी पार्टी में शामिल हुए।

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यहां वह मुलायम सिंह के विश्वसनीय साथी बनने के साथ ही सपा से मुस्लिम मतदाताओं को जोडने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन गए। 1980 से अब तक वह 8 बार विधायक चुने जा चुके हैं। सपा सरकार में तीन बार मंत्री बने। वर्तमान में भी वह कैबिनेट मंत्री हैं। सरकार के साथ समाजवादी पार्टी में भी उन्हें महत्वपूर्ण पद दिए जाते रहे हैं। पिछले दिनों सपा में अमर सिंह के उदय के बाद उन्हें एक बार पार्टी से निष्कासित भी किया गया लेकिन एक साल में फिर से वह पार्टी में बहाल हो गए।

  • 1980, 1985, 1989, 1991, 2002, 2007 और 2012 में राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य रहे। 
  • 1981-82 में संसदीय अनुसंधान, संदर्भ और राज्य विधानसभा की अध्ययन समिति के सदस्य थे। 
  • 1984-85 में राज्य विधानसभा के प्रत्यायोजित विधान समिति के सदस्य रहे। 
  • राज्य विधानसभा की प्राक्कलन और याचिका समिति के सदस्य का दायित्व भी निभाया।
  • 1989 में आजम उत्‍तरप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और 5 दिसंबर 1989 से 24 जून 1991 तक श्रम, रोजगार, मुस्लिम वक्फ़ और हज के लिए काम किया। 
  • 1993 में वो दोबारा विधानसभा का चुनाव जीतकर राज्‍य सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 
  • 1994 में आजम खान मॉइनॉरिटी फोरम ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष बने और समाजवादी पार्टी से जुड़ गए। 
  • इसी साल वो समाजवादी पार्टी के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी बने। 
  • 26 नवंबर 1996 से 9 मार्च 2002 तक राज्यसभा सदस्य चुन लिए गए। 
  • 1998 में श्रम मंत्रालय में कार्यकारिणी समिति के सदस्‍य बने और इसी वर्ष लेबर एंड वेलफेयर कमेटी के सदस्‍य भी बनाए गए। 
  • 13 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक उत्तरप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। 
  • 6 सितंबर 2003 से 13 मई 2007 तक संसदीय मामलों, शहरी विकास, जल आपूर्ति, शहरी रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन के कैबिनेट मंत्री बने।

आजम खान के विवादित बयान

  • दादरी हत्याकांड पर विवादित बयान देते हुए कहा आज़म ने कहा था कि गो भक्त आज के बाद किसी भी होटल के मीनू में बीफ का दाम न लिखने दें। अगर ऐसा होता है तो सभी फाइव स्टार होटल को बाबरी मजजिद जैसे तोड़ दिया जाए। 
  • 2013 में कारगिल युद्ध पर तीखा बयान देते हुए कहा था कि कारगिल पर फतह दिलाने वाले सेना के जवान हिंदू नहीं मुस्लिम थे। आजम के इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था लेकिन आजम अपने बयान पर कायम रहे।
  • आजम खान ने पीएम मोदी के एक बयान को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि कुत्ते के बच्चे के बड़े भाई हमें तुम्हारा गम नहीं चाहिए। दरअसल मोदी ने एक इंटरव्यू में एक विदेशी मैग्जीन के एक सवाल का जवाब देते हुए मोदी ने कहा था कि अगर उनकी कार के नीचे कुत्ते का बच्‍चा भी आ जाता है तो उन्‍हें दुख होता है। आजम खान ने इस बयान को मुस्‍लिमों से जोड़ा था। 
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में आजम ने भड़काऊ बयाने देते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था कि 302 का अपराधी गुंडा नंबर वन शाह यूपी में दशहत फैलाने आया है। बाद में जब इस बयान खूब हंगामा बरता तो आजम ने कहा कि क्या ऐसे अपराधी को भारत रत्न दिलवा दूं। आजम को तीखे बयानों की वजह से 2014 में चुनाव आयोग ने नोटिस भी थमा दिया था।
  • आजम जोश में हमेशा ऐसी बातें कह जाते हैं जिसका कोई सिर पैर नहीं होता। बदांयू के एक कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के बारे में कई आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा है कि गरीब घरों की महिलाएं यार के साथ नहीं जा सकती, लिहाजा ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं।

पार्टी से 6 साल के लिए निकाले भी गए

2009 के 15वें लोकसभा चुनाव में सपा की उम्‍मीदवार जयाप्रदा के खिलाफ खड़े हुए और हार गए। इसके बाद सपा ने आजम खान को 6 साल के लिए पार्टी से निष्‍कासित कर दिया, लेकिन 4 दिसंबर 2010 को पार्टी ने उनका निष्‍कासन रद्द करते हुए उन्‍हें पार्टी में वापस बुला लिया। 2012 में अखिलेश यादव सरकार में वे कैबिनेट मंत्री बने।

दंगों में उछला नाम

2013 में मुजफ्फरनगर दंगों में आजम का नाम उछला, एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन ने अखिलेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया था, स्टिंग में सामने आया था कि पुलिस अफसर पर दबाव डालकर दंगा करने वाले दोषियों को जेल से छुड़वाया गया। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान फुगाना थाने के एसएचओ ने कहा था कि सरकार से जुड़े किसी आजम खान नाम के व्यक्ति ने फोन कर कहा था कि जो हो रहा है, होने दो।

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English summary
Profile of Azam Khan in Hindi.
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