1948 में भारत ने रोका था सिंधु का पानी, तड़प उठा था पाकिस्तान

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नई दिल्ली। उरी आतंकी हमले के बाद आज इंडिया एक बार फिर से भारत सिंधु समझौते के बारे में सोच रहा है, अगर भारत इस समझौते को रद्द करता है तो पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जायेगा।

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अगर इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो आप पायेंगे कि पाकिस्तान के नापाक इरादों से त्रस्त होकर भारत ने साल 1948 में सिंधु नदी के पानी को रोका था तो पाकिस्तान उस समय बुरी तरह से तड़प उठा था। उसने भारत से काफी प्रार्थनाएं की वो सिंधु के पानी को ना रोकें लेकिन भारत उसके प्रति नरम नहीं हुआ क्योंकि पाकिस्तान तब भी कश्मीर को लेकर ऊंट-पटांग बयानबाजी करता था।

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लेकिन काफी मशक्कत और पापड़ बेलने के बाद साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता हुआ था। ये समझौता तत्कालीन पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच में हुआ था। इसके बाद से अस्सी प्रतिशत नदी का हिस्सा पाकिस्तान प्रयोग करता है।

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अगर सिंधु जल रोका गया तो पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था चरमरा जायेगी और हो सकता है कि भारत इस समझौते के रद्द होने के बाद पाकिस्तान को रावी और झेलम नदियों से भी पानी ना लेने दें क्योंकि वहां तो कोई एग्रीमेंट है ही नहीं।

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English summary
The Indus Waters Treaty is a water-distribution treaty between India and Pakistan, brokered by the World Bank. The treaty was signed in Karachi on September 19, 1960 by Prime Minister of India Jawaharlal Nehru and President of Pakistan Ayub Khan.
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