बंधुआ मजदूरों की बेबसी: हर साल यौन शोषण की शिकार होती हैं ये महिलाएं

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नयी दिल्ली। पेट पालने के लिए उसे खेतों में काम करना पड़ता है। बच्चों की भूख मिटाने और परिवार को चलाने के लिए वो हर साल यहां आती हैं, गन्ने के खेतों में काम करती हैं। आपके घर तक मिठास पहुंचाती है, लेकिन आपके घर में मिठास पहुंचाने के दौरान उसकी खुद की जिंदगी बेबस हो जाती है। महाराष्ट्र के गन्ना मजदूरों की बेबसी देखिए, वो हर साल, हर बार यौन शोषण की शिकार होती हैं, लेकिन भूख के आगे बेबस होकर फिर उसी दलदल में आने को मजबूर हो जाती है।

Female Workers sexually harassed every year in Maharashtra

महाराष्ट्र में गन्ने की कटाई करने वाले मजदूरों के साथ जो होता है, उसे पढ़कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। इन मजदूर महिलाओं के साथ हर साल इस हद तक रेप होता है कि उन्हें गर्भाश्य निकलवाने की नौबत आ जाती है। मॉनसून के खत्म होने के बाद महाराष्ट्र में गन्ना कटाई का काम शुरू होता है। महाराष्ट्र में गन्ने की कटाई के लिए जाने वालीं महिलाएं साल दर साल बलात्कार का दर्द झेलती है।

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खेतों के मालिकों से लेकर बिचौलिये तक उन्हें अपना शिकार बनाते हैं। लेकिन कर्ज के तले दबे ये लोग आवाज उठाना तो दूर इस दर्द को झेलने को मजबूर हो चुके हैं। परिवारवाले इन महिला मजदूरों को गर्भाश्य निकलवा देने को कहते हैं ताकि वे रेप के बाद प्रेग्नेंट होने का खतरा ना हो। महाराष्ट्र के बीड जिले में दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं, जो इस तरह के यौन शोषण का शिकार हुई हैं। ये महिलाएं कर्जके तले दबी होती हैं।

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खेत मालिकों द्वारा दिए हुई कर्ज के बदले उन्हें 6 से 8 महीने तक उनके खेतों में काम करना पड़ता हैं। जब ये महिलाएं एक सीजन में इस कर्ज को खत्म नहीं कर पातीं तो उन्हें अगले सीजन में भी आने को मजबूर किया जाता है। वो फिर आती हैं और उन्हें फिर से उसी दर्द और पीड़ा को सहना पड़ता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं की माने तो ये बंधुआ मजदूरी का सबसे घिनौना रूप है, जहां महिलाएं बार-बार यौन उत्पीड़िन की शिकार होती है। वो अपने साथ हो रहे इस प्रताड़ना के लिए ना तो किसी को दोषी ठहरा सकती हैं और ना ही किसी के साथ इसे बांट सकती है। अपना भाग्य समझकर वो हर साल बस इसे झेलती है। ऐसे में क्या मानवाधिकार और महिला आयोग को उनके इस दर्द को स्वंत संज्ञान पर जानने की जरुरत नहीं है।

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English summary
Female workers in western Maharashtra's sugarcane fields routinely face abuse and rape by landlords and middlemen who enslave them through debt bondage rape of labour women, rape in maharashtra, rape in india.
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