निर्भया गैंगरेप की चौथी बरसी: जानिए कब, कैसे क्या-क्या हुआ था उस काली रात

चार साल पहले इसी तरीख को कड़कड़ाती सर्दी में दिल्ली के माथे से परेशानी की बूंदें टपक रही थी। वजह थी, दिल्‍ली की सड़कों पर चलती बस में 6 दरिंदों ने हैवानियत का तांडव किया था उससे पूरा देश उबल रहा था।

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नई दिल्‍ली। 16 दिसंबर 2012, भारतीय इतिहास में दर्ज वो काला पन्‍ना जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया, को चार साल हो गये। हम बात कर रहे हैं निर्भया गैंगरेप की जिसकी आज चौथी बरसी है। चार साल पहले इसी तरीख को कड़कड़ाती सर्दी में दिल्ली के माथे से परेशानी की बूंदें टपक रही थी। वजह थी, दिल्‍ली की सड़कों पर चलती बस में 6 दरिंदों ने हैवानियत का तांडव किया था उससे पूरा देश उबल रहा था। हर तरफ गुस्से की आग थी। जज्बातों का सैलाब था। और एक ही सवाल था कि क्या ये सूरत कभी बदलेगी?
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शायद ही किसी को उसका नाम मालूम हो। किसी अखबार ने उसे नाम दे दिया- निर्भया, और देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं उसके साथ जुड़ गयीं। हालांकि नाम तो उसे और भी मिले पर लोगों को संभवत: निर्भया नाम ही सबसे सटीक लगा और वह लोगों के गुस्से का आधार बन गयी।

साधारण-सी लड़की ही तो थी निर्भया, पड़ोस में रहने वाली किसी रीता या सुनीता की तरह। पैरा-मेडिकल इंटर्न के तौर पर काम करनेवाली युवती, जिसे लेकर उसके पिता ने कुछ सपने संजो रखे थे। वह शायद एक आम लड़की की तरह पहले नौकरी ढूंढती और फिर शादी कर घर बसा लेती। क्या था उस साधारण-सी लड़की में, जिसने उसे असाधारण बना दिया? आईए तस्‍वीरों के माध्‍यम से जानते हैं उस काली रात के बारे में।

निर्भया को जान नहीं इज्‍जत बचानी थी

निर्भया यानी जिसे डर ही न लगे। जब 6 वहशियों ने उसे बस में चढ़ा कर गेट बंद कर लिया होगा, तो क्या वाकई उसे डर नहीं लगा होगा? उसके साथी को लोहे की छड़ से मारने के बाद वे शैतान जब उसकी तरफ बढ़े होंगे, तो क्या उसने डर कर भगवान को याद नहीं किया होगा? हां, वह एक साधारण-सी लड़की ही थी, पर इस एक पल ने उसे असाधारण बना दिया। क्या यदि उसने उन दरिंदों के सामने घुटने टेक दिये होते तो उसका यही अंजाम होता? उसने खुद को यदि उन नर-पिशाचों को सौंप दिया होता तो क्या उसकी जान बच नहीं जाती? लेकिन उसे अपनी जान कहां बचानी थी, उसे तो अपनी इज्‍जत बचानी थी। उस एक पल में उसके भय ने उसे इतना हौसला दे दिया कि वह निर्भया हो गयी। वहशियों के शरीरों पर नाखून और दांत के गहरे निशान इस बात के प्रमाण बने कि उस एक क्षण में वह साधारण सी लड़की किसी जख्‍मी शेरनी में बदल गयी थी।

16 दिसंबर को दिल्‍ली की सड़कों पर हुआ था हैवानियत का तांडव

अपने दोस्‍त के साथ फिल्‍म देख कर निकली पैरा-मेडिकल की छात्रा के साथ चलती बस में 6 लोगों ने सामूहिक बलात्‍कार किया। बलात्‍कार के दौरान उन दरिंदों ने उसे शारीरिक यातनाएं दी और उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डालकर जमा कर रख देने वाली ठंड में सड़क किनारे नग्‍न अवस्‍था में फेंक दिया गया। पहले तो उसे सफदरजंग अस्‍पताल में भर्ती कराया गया फिर उसे सिंगापुर रेफर कर दिया गया। सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्‍पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जानिए कब, कैसे क्या-क्या हुआ था उस काली रात

दरिंदों में से एक ने की खुदकुशी, 4 को फांसी और एक को सुधार गृह

बलात्कारियों में से एक किशोर था इसलिए उसके खिलाफ सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में की गई। बोर्ड ने उसे तीन साल के लिए सुधार गृह में भेज दिया था। अब वो रिहा हो चुका है। पीड़िता की मौत के पांच दिन बाद पुलिस ने पांच व्यस्क आरोपियों के खिलाफ बलात्कार, हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कर लिया था। एक आरोपी राम सिंह 11 मार्च को तिहाड़ जेल में मरा हुआ पाया गया था और उसके खिलाफ मामला बंद कर दिया गया है। चार वयस्क आरोपियों अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मौत की सजा सुनाई गई है।

आज भी हरे हैं निर्भया के परिजनों के जख्‍म

दिल्‍ली गैंगरेप की शिकार पीड़िता के पिता ने कहा कि हमारे आंसू अभी तक सूखे नहीं हैं। हर दिन के गुजरने के साथ उसकी यादें और गहरी होती जाती हैं। घर पर कोई न कोई तो हमेशा रोता रहता है। पीड़िता के 50 वर्षीय पिता ने आंसुओं से भरी आंखों के साथ बताया कि हम कभी इससे उबर नहीं पाएंगे और वह हमारे बीच अभी भी जीवित है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी जब भी कुछ पकाती है तो वह अपनी बेटी को याद करती है। भरी हुई आवाज से उन्होंने कहा कि जब भी हम खाना खाने बैठते हैं, मेरी पत्नी कहती है कि यह उसका पसंदीदा खाना है और हम उसके बिना ही इसे खा रहे हैं।

दिल्‍ली को शर्मसार करते ये आंकड़े

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में देशभर में रेप के 34 हजार 500 से अधिक मामले सामने आए। इनमें से 33 हजार 098 मामलों में अपराधी, पीड़ितों के परिचित थे। रेप के मामले में दिल्‍ली दूसरे स्‍थान पर है। दिल्ली में रेप 2 हजार 199 मामले दर्ज किए गए।

 

 

 

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English summary
For them the world changed forever this very day a year ago when their 23-year-old daughter fell prey to the brutality of six men so vicious that their perversity shamed the collective conscience of India.
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