पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी के बारे में ये बातें जानते हैं आप?

1942 में भारत छोड़े आंदोलन के दौरान इंदिरा और फिरोज दोनों को जेल जाना पड़ा। इसके बाद फिरोज अंडरग्राउंड हो गए और करीब एक साल तक सामने नहीं आए।

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नई दिल्ली। फिरोज गांधी कौन थे? उन्होंने क्या किया? देश की आधी आबादी इन सवालों के जवाब से अनजान है। फिरोज गांधी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति, राजीव गांधी और संजय गांधी के पिता और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के दामाद थे।

इलाहाबाद में रहता था परिवार

बर्टिल फॉक (Bertil Falk) की किताब 'फिरोज द फॉरगॉटेन गांधी' में उनके बारे में विस्तार से लिखा गया है। फिरोज गांधी पारसी समुदाय से थे और उनका परिवार इलाहाबाद में रहता था। फिरोज गांधी मध्यम वर्गीय परिवार से थे। नेहरू परिवार को वह अच्छे से जानते थे। इंदिरा नेहरू और फिरोज की जान पहचान इंग्लैंड में हुई थी। वहां करीब पांच साल तक पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात हुई। इंदिरा और फिरोज दोनों ने डिग्री भी नहीं हासिल की, जो कि उनके भविष्य को लेकर सवालिया निशान खड़े करता था।

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16 साल की उम्र में पहली बार किया था प्रपोज

1935-40 के बीच लंदन में रहने के दौरान इंदिरा और फिरोज को प्यार हुआ। इंदिरा गांधी ने इसका जिक्र करते हुए लिखा था, 'फिरोज मुझे तब से प्रपोज कर रहे थे जब मैं 16 साल की थी। पेरिस में तब गर्मियां खत्म होने वाली थीं और पूरा शहर हल्की धूप से नहाया हुआ था जब हमने साथ होने का फैसला लिया।'

 

महात्मा गांधी ने दिया था अपना सरनेम

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की शादी वैदिक रीति-रिवाज से मार्च 1942 में इलाहाबाद में हुई थी। कहा जाता है कि जवाहर लाल नेहरू इस शादी के पक्ष में नहीं थे, लेकिन इंदिरा की जिद के आगे उनकी एक नहीं चली।

तब महात्मा गांधी ने उन्हें अपना सरनेम दिया था और शादी के बाद दोनों के नाम के साथ गांधी जुड़ गया। इसके पहले फिरोज का सरनेम भुवाली था।

 

1942 में एक साथ गए थे जेल

1942 में भारत छोड़े आंदोलन के दौरान इंदिरा और फिरोज दोनों को जेल जाना पड़ा। इसके बाद फिरोज अंडरग्राउंड हो गए और करीब एक साल तक सामने नहीं आए। जेल में कैदियों के बीच वह काफी चर्चित रहे। 1948 में फिरोज और इंदिरा तीन मूर्ति हाउस में अपने दो बच्चों के साथ शिफ्ट हो गए।

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नेहरू के पसंदीदा नेता के खिलाफ उठाई थी आवाज

दोनों की शादी में दरार भी आई और सांसद बनने के बाद फिरोज अपने लिए मिले सरकारी आवास में शिफ्ट हो गए। कुछ ही दिनों बाद उन्होंने एक बड़ा कदम उठाते हुए संसद में एलआईसी की ओर से किए गए घोटाले का खुलासा किया, जिसके बाद तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णामाचारी को इस्तीफा देना पड़ा। वह नेहरू के पसंदीदा नेताओं में से एक थे।

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सदन में दिया था जोशीला भाषण

किताब में फिरोज गांधी के लोकसभा में उस भाषण का भी जिक्र है, जो उन्होंने स्कैंडल का खुलासा करने से पहले दिया था। उन्होंने कहा था, 'स्पीकर महोदय, आज सदन में कुछ शार्पशूटिंग और हार्ड हिटिंग होने वाला है। जब मैं हिट करता हूं तो जोर से हिट करता हूं और उससे भी ज्यादा तेज हिट करने की उम्मीद करता हूं।'

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हार्ट अटैक से हुई मौत

अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हुए फिरोज गांधी ने खाने में कोई परहेज नहीं किया। उन्हें दो बार हार्ट अटैक आ चुका था। तीसरी बार सितंबर 1960 के पहले हफ्ते में उन्हें फिर हार्ट अटैक आया और विलिंगडन हॉस्पिटल (अब राम मनोहर लोहिया अस्पताल) में उनकी मौत हो गई। वह 48 साल के थे। इंदिरा गांधी तब केरल में थीं और घटना की जानकारी मिलते ही दिल्ली के लिए रवाना हुईं।

नेहरू भी रह गए थे हैरान

फिरोज गांधी की मौत के बाद उनका पार्थिव शरीर तीन मूर्ति भवन पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। तब इंदिरा उनके शव के बगल में बैठी थीं। बड़ी संख्या में गरीब और मजदूर लोग वहां आकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे थे। तब ये देखकर खुद जवाहर लाल नेहरू भी हैरान थे। नेहरू ने तब अपने करीबी से कहा था, मुझे नहीं पता था कि फिरोज इतना लोकप्रिय हैं।'

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English summary
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