एडवांटेज इंडिया: चुनौतियों से उपलब्धियों तक

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भारत के वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के दिल में उसके आखिरी वक्त तक देश के लिए अथाह प्रेम और विकास की चिंता थी, इस बात को प्रदर्शित करती है उनकी आखिरी किताब 'एडवांटेज इंडिया'। देश के सामने आने वाली चुनौतियों से लेकर उस के सामने आने वाले अवसरों को लेकर डॉ कलाम ने हर पहलू का जिक्र अपनी आखिरी किताब में किया है। इस किताब में डिजिटल इंडिया से लेकर मेक इन इंडिया और स्मार्ट सिटी से लेकर ग्रामीण भारत तक को समेटा गया है।

Advantage India-Kalam's last bequest to the nation

जाने-माने लेखक सृजनपाल सिंह ने डॉ कलाम की हर बात को उनकी हर इच्छा और विचार को इस किताब के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है। डॉ. अब्दुल कलाम के आखिरी शब्द हैं, जो उन्होंने 17 जुलाई 2015 को शिलॉन्ग के एक व्याख्यान में कहे थे उसका उल्लेख सृजनपाल सिंह ने बखूबी किया है। इस किताब के जरिए लेखक ने ना सिर्फ डॉ कलाम के जीवन के परम उद्देश्य के दर्शन करवाए हैं बल्कि उनके मकसद को भी उजागर किया है।

डॉक्टर कलाम के आखिरी शब्दों को जिस एक जगह इस मंत्र को दस्तावेजी आकार देकर उसे सार्थक शक्ल प्रदान की गई है वो प्रशंसा के काबिल है। राजपाल एंड सन्स की ओर से प्रकाशित इस पुस्तक में डॉक्टर कलाम ने अपनी उस दृष्टि से परिचय कराया है, जिसके बारे में या तो वो खुद जानते थे या फिर उनके आस पास रहने वाले कुछ खास लोग।

एडवांटेज इंडिया चुनौतियों से उपलब्धियों तक पुस्तक में लेखक ने डॉक्टर कलाम की दिल्ली से जौनपुर की यात्रा का जिक्र किया है। लेखक ने बताया है कि कैसे इस यात्रा के दौरान डॉ कलाम बादशाहनगर जैसे बेहद मामूली कस्बे में रुके थे। वहां उन्होंने लोगों के साथ छोटी सी दुकान में चाय पी। ये यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं थी बल्कि इस यात्रा ने डॉ कलाम के जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। इस छोटी सी चाय की दुकान के माध्यम से कलाम ने देश के व्यापार और उसकी अर्थव्यवस्थ को समझने की जिज्ञासा भर दी। अपनी इस जिज्ञासा को उन्होंने पूरा भी किया है और बादशाहनगर की छोटी से दुकान ने हासिल सीख को बड़े कॉरपोरेट तक पहुंचाया।

लेखक सृजनपाल सिंह ने कलाम की इस यात्रा का विख्या सजे ढंग से की है। इस यात्रा के दौरान कलाम ने छोटे-छोटे कस्बे के लोगों की आंखों में छुपे बड़े बड़े जिन सपनों को देखा, खस्ताहाल सड़कों की वजह से उन्हें रास्ते में जो दिक्कतें हुई, उसकी वजह से कलाम के मन में जो विचार आया, लेखक ने सब बातों का जिक्र किया है। अपने जीवन की इस अंतिम किताब के जरिए डॉक्टर कलाम ने बताने की पुरजोर कोशिश की है कि वो देश को साल 2020 तक विकसित देशों की सूची में देखना चाहते हैं। इतनी ही नही कलाम कलाम देश की युवा शक्ति को उस की सबसे बड़ी ताकत समझते थे।

कलाम का मानना था कि युवा शक्ति ही डिजिटल युग के साथ कदम बढ़ाते हुए विकास के पथ पर इतनी आगे जा सकती है, जिसके बारे में शायद कोई मुल्क सपना तक नहीं देख सकता। लेखक ने कलाम के इन विचारों को बारीकी से इस किताब में प्रस्तृत किया है। सारांश के तौर पर कहा जाए तो कलाम की आखिरी किताब के साथ सृजनपाल सिंह ने पूरा-पूरा न्याय किया है। किताब पाठकों को बांधे रखती है। विकासित भारत का सपना दिखाने वाली इस किताब में कलाम ने अपनी आखिरी इच्छा जाहिर की है।

  • पुस्तक-एडवांटेज इंडिया, चुनौतियों से उपलब्धियों तक
  • लेखक: सृजनपाल सिंह
  • मूल्य- 299 रूपए
  • प्रकाशक-राजपाल एंड संस, दिल्ली
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English summary
Advantage India", a book that throws light on the country's opportunities and the key challenges in the next five years, will be the last bequest to the nation by former president A.P.J. Abdul Kalam.
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