नोटबैन: जीबी रोड के सेक्स वर्कर्स का बिजनेस ठप, कह रहे 'हमारे धंधे में उधार नहीं चलता'

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दिल्ली। जबसे नरेंद्र मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों को बैन करने का फैसला लिया है तबसे जीबी रोड पर रोज रहने वाली हलचल गायब है।

पुरानी दिल्ली के इस फेमस रेड लाइट एरिया में धंधा मंदा पड़ा हुआ है और सेक्स वर्कर्स को पिछले एक सप्ताह से कस्टमर नहीं मिल रहे।

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'कस्टमर को आकर्षित करने के प्रयास नाकाम'

'कस्टमर को आकर्षित करने के प्रयास नाकाम'

मोदी सरकार के ऐलान का बुरा असर जिस्मफरोशी के बिजनेस पर पड़ा है। जीबी रोड के सेक्स वर्कर्स का कहना है कि वे कस्टमर को आकर्षित करने के लिए नए-नए तरीके अपना रही हैं लेकिन वे नहीं आ रहे।

दस साल से जीबी रोड के वेश्यालय में रहनेवाली एक सेक्स वर्कर ने कहा, 'पिछले एक सप्ताह से कोई कस्टमर नहीं आ रहा है। वे दिखने बंद हो गए हैं। कोई आता भी है तो पुराने 500-1000 का नोट लेकर आ रहा है जिनको हम लौटा दे रहे हैं। हमारे धंधे में उधार नहीं चलता इसलिए बिना पैसा लिए हम सेवा नहीं दे पा रहे।'

एक दूसरे सेक्स वर्कर का कहना है कि यहां के धंधे का कोई समय तय नहीं है। कई ग्राहक दिन में आते हैं तो कई रात में आते हैं लेकिन नोटबंदी के बाद बिजनेस ठप पड़ा है। जब पुराने ग्राहक नहीं आ रहे तो नए के आने का सवाल ही नहीं है।

200-300 रुपए में बिकते हैं जिस्म

200-300 रुपए में बिकते हैं जिस्म

कुछ समय पहले इस धंधे में कदम रखने वाली एक सेक्स वर्कर का कहना है कि जीबी रोड में अधिकांश सेक्स वर्कर हर ग्राहक से 200 से 300 रुपए तक चार्ज करती हैं। इसमें आधा हिस्सा वह महिला रख लेती हैं जो इनकी सुपरवाइजर हैं। कुछ हिस्सा एजेंट लेता है और आधे से भी कम हिस्सा सेक्स वर्कर को मिलता है। कस्टमर से जो टिप मिलता है उसे सेक्स वर्कर अपने पास रखती हैं। लेकिन फिलहाल न तो ग्राहक आ रहे हैं और न ही टिप मिल रहे हैं।

मजबूर होकर सेक्स वर्कर्स ने दाम गिरा दिए हैं। जो 400 लेती थीं वह अब 100 या 200 ले रही हैं और जो 700-800 रुपए लेती थीं, वे भी अब 200-300 लेकर धंधा कर रही हैं। जीबी रोड में लगभग 80 प्रतिशत सेक्स वर्कर्स के पास फिर भी कोई काम नहीं है। कई सेक्स वर्कर्स अपने गांव लौट गई हैं और कोठों पर सन्नाटा पसरा है।

कैश आधारित है जीबी रोड का यह धंधा

कैश आधारित है जीबी रोड का यह धंधा

जीबी रोड पर चलने वाला जिस्मफरोशी का धंधा कैश पर चलता है इसलिए नोटबंदी के बाद इस पर बुरा असर हुआ है। एक समाजसेवी खैराती लाल भोला का इस बारे में कहना है कि जीबी रोड के वेश्यालय में लगभग 4500 सेक्स वर्कर्स हैं जिनके लिए करेंसी के अभाव में सरवाइव करना मुश्किल हो रहा है।

पिछले 50 साल से भी ज्यादा समय से सेक्स वर्कर्स की जिंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश में लगे खैराती लाल ने कहा कि नोटबंदी के बाद सेक्स वर्कर्स अब दूसरी नौकरियों की तलाश कर रही हैं।

एक सेक्स वर्कर, बैंक में पैसा एक्सचेंज करवाने गईं तो उन पर किसी ने ताने कसे कि अब जीबी रोड वाले भी पैसा जमा करने आ गए हैं। उनकी मांग है कि सेक्स वर्कर्स के लिए अलग बैंक होने चाहिए। लगभग 4500 सेक्स वर्कर्स में से सिर्फ 800 के पास बैंक अकाउंट्स हैं। उनके खातों में अन्य सेक्स वर्कर्स अपने पैसे डाल रहे हैं या फिर दलाल, पैसा एक्सचेंज करने के बाद उनको 500-1000 के नोट के बदले कम पैसे दे रहे हैं।

'हमें इस शहर में नौकरी कौन देगा'

'हमें इस शहर में नौकरी कौन देगा'

नेपाल की एक सेक्स वर्कर का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से वह राशन के सामान, दूध, चीनी, आटा नहीं खरीद पाी है। इस सेक्स वर्कर को दिल्ली में अच्छी नौकरी दिलाने के बहाने लाकर इस धंधे में झोंक दिया गया था।

कोल्हापुर की रहनेवाली एक सेक्स वर्कर ने कहा, 'हम कुछ नहीं कर सकते। हमें कौन नौकरी देगा। हमारे बच्चे नहीं जानते कि हम कौन सा धंधा करते हैं। बच्चों को हम एक बार में पैसे भेजते हैं। जब हमारे पास कैश नहीं हैं तो हम उनको क्या भेजेंगे।'

मोदी सरकार की नोटबंदी के फैसले को एक सेक्स वर्कर ने अच्छा कदम बताया और कहा कि हम तो पहले भी गरीब थे, आज भी गरीब हैं लेकिन उम्मीद है कि काला धन जमा करने वाले अब पकड़े जाएंगे।

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English summary
Sex workers living in GB Road has been badly hit after 500 and 1000 note ban by Narnedra Modi Govt.
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