तिवारी जी, मार्गदर्शक मंडल का दड़बा छोटा सा है, आप उसमें ना आएंगे

By: रिज़वान
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नई दिल्ली। हर ओर खबर चल गई, सबने कहा कि लो भैया... सबसे पुराने कांग्रेसी एनडी तिवारी भाजपा के हो गए। जब सबको लगा चलो सब क्लियर हो गया तो भाजपा ने पलटी मारते हुए कहा कि हमतो तिवारी जी को लिए ही नहीं अपनी पार्टी में, उनके बेटे को लिए हैं। ये सुनकर तिवारी जी के बदन में सुरसरी दौड़ गई, बस तुरंत जाके अमित शाह को पकड़ लिए और पूछा लिया कि अमित ये मामला क्या है? अब दोनों के बीच तनातनी हुई तो हम भी कान लगा दिए।

तिवारी जी, मार्गदर्शक मंडल का दड़बा छोटा सा है, आप ना आएंगे

शाह- आइए तिवारी जी, आप तो हमारे लिए पिता तुल्य हैं, बड़ी खुशी हुई आपको देखकर... बहुत-बहुत स्वागत है आपका।

तिवारी- अरे अमित बेटा, सिर्फ फूलों के गुलदस्ते और मान-सम्मान से ही काम चलाओगे? पार्टी की मेंबरशिप नहीं दोगे क्या?

शाह- हें हें हें.. अरे तिवारी जी, आप भी ना... पार्टी आपकी है। हम आपसे बाहर थोड़े हैं। जो आप चाहेंगे, वो होगा। और फिर शेखर का टिकट मैंने फाइनल कर ही दिया है।

तिवारी- बेटा अमित, तु्म्हारें पैदा होने से पहले से राजनीति कर रहा हूं. मुझे गोली मत दो। बोले थे सम्मान के साथ पार्टी में लेंगे। अब सिर्फ सम्मान दे रहे हो पार्टी में जगह नहीं दे रहे।

शाह- दरअसल हमारी कुछ मजबूरी फंस गई है नेताजी तो इसलिए...

तिवारी- अब क्या मजबूरी हो गई। दस दिन पहले तक को तुम्हारी पार्टी को हमारे अंदर खूब पोटाश दिख रहा था। अब अचानक हमें फुंके हुए कारतूस की तरह से देख रहे हो?

शाह- देखिए, आप बुरा मत मानिए.. मेरी बात सुनिए। आप खुद को पार्टी में ही समझिए लेकिन वो ऑफिशयली सदस्यता... उसपर पेंच थोड़ा फंसा हुआ है। लोग तरह-तरह की बातें बना रहे हैं तो उस वजह से...

तिवारी- पिछले 24 घंटे में हमारी कोई सीडी आ गई हमारी या फिर हमने रातोंरात कोई कांड कर दिया? बताइए हमें...? जो किया है वो सब जानते हैं. राजभवन से लेकर...

शाह- बस-बस... जानते हैं तिवारी जी, सब जानते हैं। हम तो यौवन के दिनों में अखबार में ढूंढ़-ढूंढ़ कर आपके बारे में खबरें पढ़ा करते थे, बच्चों से छुपाकर। आपके बारे में खबरें ही ऐसी छपती थीं कि आदमी किसी दूसरी दुनिया में पहुंच जाए। क्या बताऊं आपको.. मन तो चंचल है ना...

तिवारी- मेरी फिल्म रिवाइंड करके मुझे ही मत दिखाओ। ये बताओ कि पार्टी में मेरी एंट्री में क्या परेशानी है?

शाह- धत्त तेरी... यार अपनी पार्टी के बुड्ढे कम थे कि एक और ले आए.. (बड़बड़ाते हुए)

तिवारी- आपने कुछ कहा क्या?

शाह- नहीं, मैं वो कह रहा था कि कुछ लोग आपके आने से बुरा मान जाएंगे, बस इसीलिए हम हिचक रहे हैं।

तिवारी- अरे हम क्या मांग रहे हैं जो कोई बुरा मान जाएगा। बेटे के लिए टिकट चाहिए था, वो आप दे ही रहे हैं। हमे अपने लिए तो कुछ चाहिए ही नहीं।

शाह- अरे... दरअसल वो महिला कार्यकर्ताओं के मन में आपकी ओर से बड़ा खटका है। कहती हैं कि शरीर भले ही 90 पार कर जर्जर हो गया हो लेकिन तिवारी जी के मन की चंचलता आज भी 60 के दशक वाली ही है।

तिवारी- अरे ये क्या बात हुई, आप ऐसे कैसे कह सकते हैं?

शाह- ये मैं थोड़े ही कह रहा हूं तिवारी जी... महिला कार्यकर्ताओं ने पढ़ ली होगी आपकी आंखों की शरारात... तभी तो... और हां, एक कार्यकर्ता तो कह रही थी कि सब समझते हैं आपके हाथ बुढ़ापे से कांप रहे हैं और आप उसका फायदा जब कोई कार्यकर्ता आशीर्वाद लेने या गुलदस्ता देने आती है तब...

तिवारी- हम आए थे बेटे का करियर सैट करने और आप हैं कि हमारा चरित्र प्रमाण-पत्र बनाने में लगे हुए हैं। छोड़िए साब.... इस उम्र में अब औलाद के लिए ये सब सुनेगें।

शाह- आप बुरा बहुत मानते हैं। अब बता देता हूं खुलकर, महिला कार्यकर्ताओं को तो मना लूंगा लेकिन आडवाणी जी नहीं मान रहे हैं। कह रहे हैं कि मार्गदर्शक मंडल दल में सीनियरटी चला लेता हूं थोड़ी-बहुत तो ये मोदी और शाह उसे भी छीनना चाहते हैं। आप से बताऊं तिवारी जी... मैं तो उन्हें भी मना लूं कोशिश करके... लेकिन एक बात ये रुक जा रहा हूं।

तिवारी- अब और कौन सी बात रह गई अमित?

शाह- दरअसल, मार्गदर्शक मंडल को जो दड़बा हमने अलॉट किया है, वो बहुत छोटा है। उसमें पहले से जिनको बंद किया है, उन्हीं के कभी हाथ, कभी पैर तो कभी जबान उससे बाहर आती रहती है। आप को भी उसमें डाला तो कहीं दूसरे मुहल्ले के ** को देखकर वो आप पर टूट पड़े और रायता फैल गया तो.....

(यह एक व्यंगात्मक लेख है)

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English summary
satire amit shah and nd tiwari conversation
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