बेवकूफ न बनें, करवा चौथ पर सोना खरीदने से पहले समझ लें सोने की कीमत का गणित

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नई दिल्ली। आए दिन टीवी और अखबारों में सोने की घटती-बढ़ती कीमतें देखकर अगर आप भी सोना खरीदने की सोचते हैं तो पहले जान लीजिए कि आखिर क्या है इसका गणित।

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टीवी पर दिख रहे सोने की कीमत बाजार में बिकने वाले सोने की भी हो सकती है और शेयर बाजार के सोने की भी। आइए समझते हैं सोने का पूरा गणित।

दो तरह का होता है सोने का बाजार

सोने का बाजार दो तरह का होता है। इसमें से एक होता है वायदा बाजार (फ्यूचर प्राइस) और दूसरा होता है हाजिर या सर्राफा बाजार (स्पॉट प्राइस)। वायदा बाजार में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिलता है।

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वायदा बाजार

इसमें भविष्य की किसी तारीख पर सोना खरीदा जाता है, लेकिन कीमत बहुत कम अदा करनी होती है। हालांकि, एक्सपायरी की तारीख तक आपको सौदा सेटल करना होता है। इस सोने की खरीदारी पूरी तरह से निवेश के उद्देश्य से की जाती है।

सर्राफा बाजार

वहीं दूसरी ओर, सर्राफा बाजार में वह सोना मिलता है, जिससे आम आदमी का पाला पड़ता है। ज्वैलरी आदि के लिए इसी सोने को खरीदा जाता है। इस सोने की कीमत वायदा बाजार के सोने की कीमत से कम होती है।

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सर्राफा बाजार में भी अलग-अलग होते हैं दाम

सर्राफा बाजार में भी सोने की किसी ज्वैलरी की कीमत अलग-अलग हो सकती है। आपको बता दें कि इसकी कीमत अलग-अलग होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से ही एक कारण है सोने की शुद्धता।

सोने की शुद्धता को समझें

अगर सोना 24 कैरेट (100 फीसदी शुद्ध) है तो उसकी कीमत कुछ और होगी, जबकि अगर सोना 22 कैरेट (91.6 फीसदी शुद्ध) है तो उसकी कीमत कुछ और होगी।

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ये चीजें भी बढ़ाती हैं कीमत

इसके अलावा ज्वैलरी का मेकिंग चार्ज और उस राज्य में लगने वाला वैट भी सोने की कीमत में शामिल होता है। इसके चलते भी कीमतें अलग-अलग राज्य में अलग-अलग होती हैं।

कैसे तय होती हैं सोने की कीमतें

हर रोज सुबह बाजार खुलने के साथ ही एमसीएक्स पर स्पॉट प्राइस बताया जाता है। यही वह कीमत होती है, जिसके आधार पर ज्वैलर कीमत तय करते हैं।

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आपको बता दें कि यह एमसीएक्स पर स्पॉट प्राइस 24 कैरेट यानी 100 फीसदी शुद्ध सोने की होती है, ऐसे में अगर आप किसी ज्वैलर की दुकान से सोना खरीद रहे हैं तो उसी हिसाब से पैसे चुकाएं।

कैसे पता करें हमारे सोने की कीमत कितनी है?

सोने की कीमत पता करने के लिए एमसीएक्स द्वारा बताई गई कीमत को 24 से भाग दें और फिर जितने कैरेट का सोना आप खरीद रहे हैं, उससे गुणा कर दें। ध्यान रहे, यह सिर्फ सोने की कीमत होगी, ज्वैलर अपना मेकिंग चार्ज और सरकार की ओर से लगने वाला टैक्स इसकी कीमत को और अधिक बढ़ाएगा।

ये है फॉर्मूला

एमसीक्स द्वारा तय स्पॉट प्राइस/24*जितने कैरेट का सोना आप खरीद रहे हैं

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ध्यान रहे, आप जितने कम कैरेट का सोना खरीदेंगे, वह उतना ही सस्ता होगा, क्योंकि उसकी शुद्धता उतनी ही कम होगी। ऐसे में आपको ध्यान रखने की जरूरत है कि आप कितने कैरेट का सोना खरीद रहे हैं।

कैसे ज्वैलर बनाते हैं बेवकूफ

अक्सर कुछ ज्वैलर लोगों को बेवकूफ बनाकर अधिक पैसे ले लेते हैं। आपको बता दें कि कोई भी ज्वैलरी 24 कैरेट सोने की नहीं बनाई जाती है, क्योंकि 24 कैरेट सोना एकदम शुद्ध होता है, जिसकी वजह से वह बहुत ही मुलायम होता है। यही कारण है कि 24 कैरेट सोने की ज्वैलरी नहीं बनाई जा सकती है।

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ऐसी स्थिति में अधिकतम 22 कैरेट सोने की ज्वैलरी बनाई जाती है, जिसमें कुछ प्रतिशत अन्य धातु का इस्तेमाल होता है। अधिकतर ज्वैलर ग्राहक से 24 कैरेट के हिसाब से ही पैसे ले लेते हैं, जबकि ज्वैलरी 22 कैरेट या फिर उससे भी कम कैरेट की बनी होती है। ऐसे में, ऊपर दिए गए फॉर्मूले से आप खुद ही निर्धारित कर लें कि आपके सोने की कीमत कितनी है। उसमें मेकिंग चार्ज जोड़ने पर आपकी ज्वैलरी की असली कीमत पता चल जाएगी।

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English summary
why gold prices differs in share market and general market
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